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भारत के सबसे लंबे रेल पुल से जल्द ही जा सकेंगे असम से अरुणाचल प्रदेश

यह पुल मणिपुर की आइरिंग नदी पर बन रहा है।

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नई दिल्ली। गुजरात में सरदार वल्लब भाई पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ती के बाद अब नॉर्थईस्ट फ्रंटीयर रेलवे (NFR) की ओर से मणिपुर में दुनिया का सबसे लंबा रेलवे ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। इस ब्रिज को भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। एनएफआर के एक प्रवक्ता ने बताया कि  पुल का निर्माण 111 किलोमीटर लंबी जिरीबाम-तुपुल-इम्फाल नई ब्रॉड गेज लाइन परियोजना के हिस्से के रूप में किया जा रहा है।  इस पुल के निर्माण कार्य की रफ़्तार बढ़ाने की भी घोषणा की गई। यह पुल मणिपुर की आइरिंग नदी पर बन रहा है। हाल ही में मंत्रालय की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक, इस पुल की ऊंचाई 141 मीटर होगी जो कि यूरोप के मोंटेनेग्रो में बने 139 मीटर लंबे ब्रिज से भी ऊंचा होगा। इस ब्रिज के लिए पिलर तैयार किए जा चुके हैं। रेल मंत्रायल ने इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। से बनाने में कुल 40 हजार करोड़ खर्च किए जाएंगे। 

 

अनुमान लगाया जा रहा है कि इस पुल का निर्माण 2020 तक पूरा हो जाएगा। यह रेलवे पुल मणिपुर में 111 किलोमीटर लंबे जिरीबाम-तुपुल-इंफाल के बीच बिछाई जा रही नई ब्राड गेज लाइन के तहत बनाया जा रहा है। नई ब्राड गेज लाइन की कुल लंबाई 703 मीटर हो सकती है। इस पुल कुल 45 सुरंगे होंगी। इसमें एक सुरंग ऐसी है जिसकी लंबाई 10.80 किलोमीटर होगी। यह पूर्वोत्तर राज्यों की सबसे लंबी सुरंग होगी। इस पुल के निर्माण से बिहार से किशनगंज के रास्ते एनजेपी के समीप से पांच राज्यों मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, सिक्किम व नगालैंड तक यात्रा आसान हो जाएगी।

 

अगली स्लाइड में पढ़ें  देश के सबसे लंबे रेल-सड़क पुल की आधारशिला 1997 में रखी थी, 

अब पीएम करेंगे उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के अवसर पर ब्रह्मपुत्र नदी पर बने बोगीबील पुल का उद्घाटन करेंगे। यह पुल इसे देश का सबसे लंबा रेल-सड़क पुल बताया जा रहा है। यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर तथा दक्षिणी तटों को जोड़ता है। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 'प्रधानमंत्री मोदी इस पुल का उद्घाटन 25 दिसंबर को करेंगे, जिसे सरकार द्वारा सुशासन दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस पुल की आधारशिला 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने रखी थीं, लेकिन इसका निर्माण कार्य अप्रैल 2002 में ही शुरू हो पाया, तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रेल मंत्री नीतीश कुमार के साथ इसका शिलान्यास किया था।'

 

पुल की लंबाई 4.94 किलोमीटर है
इस पुल के बन जाने से अरुणाचल प्रदेश से चीन की सीमा तक पहुंचना आसान हो जाएगा। पूर्वोत्तर के राज्य असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस बोगीबील पुल की लंबाई 4.94 किलोमीटर है। यह पुल नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित डिब्रूगढ़ जिले को अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगते धेमाजी जिले के सीलापथार को जोड़ता है। 

 

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अनुमानित लागत 5800 करोड़ रुपए
बोगीबील पुल डिब्रूगढ़ शहर से 17 किलोमीटर दूरी पर ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहा है। बोगीबील पुल की अनुमानित लागत 5800 करोड़ रुपए है। इस पुल का निर्माण विदेश की अत्याधुनिक तकनीक इस्तेमाल से किया गया है। इस पुल के बन जाने से ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी किनारे और उत्तरी किनारे पर मौजूद रेलवे लाइन आपस में जुड़ जाएंगे। ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी किनारे पर मौजूद चल खोवा और मोरान हॉट रेलवे स्टेशन तैयार हो चुके हैं। 

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