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मिलिए PAD Woman से, लाखों की नौकरी छोड़ करती हैं पैड्स सप्लाई

नई दिल्ली। शुक्रवार को फिल्म 'पैडमैन' आ रही है। फिल्म 'पैडमैन' अरूणाचलम मुरूगनाथन की जिंदगी पर आधारित है जिन्होंने अपनी वाइफ और गांव की महिलाओं की परेशानी को देखते हुए सेनेटरी नैपकिन बनाने की सस्ती मशीन डेवलप की। अभी तक सभी पैडमैन के बारे में जानते हैं यहां हम आपको देश की पैड वुमन से मिलवा रहे हैं जिन्होंने सैनिटरी नैपिकन को देश के रूरल एरिया में पहुंचाने के लिए मल्टीनेशनल कंपनी की अच्छी खासी नौकरी को छोड़ दिया।

 

ये हैं इंडिया की पैड वुमन

 

सरल डिजाइन्स की को-फाउंडर और सीईओ

 

सरल डिजाइन्स की को-फाउंडर और सीईओ सुहानी मोहन ने गांवों की महिलाओं की की परेशानी को कम करने के लिए सरल डिजाइन्स की शुरूआत की। सरल डिजाइन्स की शुरूआत साल 2015 में हुई थी। वह कम खर्च में सैनिटरी नैपिकन मैन्युफैक्चर करती है। सुहानी मोहन ने moneybhaskar.com को बताया कि बचपन में उनकी मां उन्हें इंदिरा नूई जैसे बनने के एस्पायर करती थी। उनकी मां न्यूक्लियर साइंसटिस्ट है और वह अपनी बेटी से भी कुछ बड़ा उम्मीद कर रही थी।

 

पीरियड के हाइजिन को लेकर मिले चौकांने वाले तथ्य

 

साल 2011 में आईआईटी मुंबई से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने डोएचे बैंक में इन्वेस्टमेंट बैंकर की नौकरी की। नौकरी के दौरान वह कंपनी की सीएसआर एक्टिविटी में हिस्सा लेती थी। तब उन्हें महिलाओं के हाइजिन को लेकर चौकांने वाले तथ्य मिले। सुहानी ने बताया कि कंपनी की सीएसआर एक्टिविटी के दौरान एनजीओ गूंज के अधिकारी ने उन्हें बताया कि देश में 80 फीसदी महिलाएं सैनिटरी नैपिकन का इस्तेमाल नहीं करती। देश में पीरियड के दौरान सफाई को लेकर महिलाएं ही जागरूक नहीं है। उन्हें सैनिटरी नैपिकन ही नहीं इस्तेमाल करने के लिए कपड़ा भी नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि अगर घर में 5 महिलाएं हैं, तो वह सभी एक ही चिथड़े कपड़े का इस्तेमाल करती है। इसके कारण उन्हें सबसे ज्यादा इन्फेंक्शन होता है। कुछ ऐसे भी मामले सामने आए जब ब्लाउज के हुक के कारण महिलाओं को टेटनेस हुआ।

 

आगे पढ़ें - पेरेंट्स को समझाने में लगा समय...

 

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