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करते हैं प्राइवेट जॉब, जानिए अप्रैल में कितनी बढ़ेगी सैलरी

प्राइवेट जॉब करते हैं तो इस साल आपकी सैलरी में औसतन 10 फीसदी से कम ही बढ़ोत्‍तरी होने की उम्‍मीद है।

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नई दिल्‍ली. प्राइवेट जॉब करते हैं  तो इस साल आपकी सैलरी में औसतन 10 फीसदी से कम ही बढ़ोत्‍तरी होने की उम्‍मीद है। यह लगभग पिछले साल जितना ही है। वहीं, यदि आप खास प्रतिभा के धनी है तो आपका अपरेजल 15 फीसदी से ज्‍यादा हो सकता है, क्‍योंकि अब कंपनियां परफॉर्मेंस पर ज्‍यादा फोकस कर रही हैं। एचआर कंसल्‍टेंसी एआन हैविट के सालाना सैलरी बढ़ोत्तरी सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल इंडिया इंक की एवरेज सैलरी हाइक 9.4 फीसदी रह सकती है। 

 

एआन का मानना है कि भारत में एवरेज वेतन वृद्धि 9.4 से 9.6 फीसदी के बीच रह सकती है। सर्वे के अनुसार, भारत में कंपनियों ने 2017 में 9.3 फीसदी की एवरेज सैलरी हाइक दी थी। सालाना आधार पर इस बार भी सैलरी हाइक लगभग इतनी ही रह सकती है। हालांकि एशिया-पैसेफिक रीजन की बात करें तो भारत में वेतन वृद्धि की स्थिति बेहतर है। 
 

चीन में 7% से भी कम बढ़ेगी सैलरी

चीन में सैलरी हाइक 6.7 फीसदी, फिलिपिंस में 5.8 फीसदी, मलयेशिया में 5.1 फीसदी, सिंगापुर में 4 फीसदी, ऑस्‍ट्रेलिया में 3.2 फीसदी और जापान में 2.5 फीसदी रह सकती है। सर्वे में कहा गया है कि हर साल कंपनियों का फोकस परफार्मेंस पर बढ़ता जा रहा है। सबसे बेहतर परफार्मेंस वाला कर्मचारी एवरेज 15.4 फीसदी की सैलरी ले रहा है, जोकि एवरेज परफार्म करने वाले से 1.9 गुना ज्‍यादा है। 

 

जरूरी स्किल की कमी चिंताजनक

एऑन इंडिया कंसल्‍टिंग के पार्टनर आनंदरूप घोष ने बताया कि कंपनियों के लिए कर्मचारियों में जरूरी स्किल की कमी चिंता की एक अहम वजह बन रहा है। कंपनियां नियुक्ति करने और सैलरी देने के मामले में अब पहले से अधिक सतर्कता बरत रही हैं। 

 

 

आगे पढ़ें... किस सेक्‍टर में बढ़ेगी ज्‍यादा सैलरी

 

 

इन सेक्‍टर में ज्‍यादा सैलरी हाइक

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, प्रोफेशनल्‍स सर्विसेज, कंज्‍यूमर इंटरनेट कंपनीज, लाइफ साइंसेज, ऑटोमोटिव और कंज्‍यूमर प्रोडक्‍ट जैसे सेक्‍टर्स में 2018 में भी डबल डिजिट सैलरी हाइक मिल सकती है। अहम बात यह है कि देश के आर्थिक हालातों में सुधार के बावजूद सैलरी हाइक पिछले साल के लेवल पर बनी हुई है। दूसरी ओर, भारत में आट्रिशन रेट कम हुआ है। 2017 में यह घटकर 15.9 फीसदी पर आ गया, जो पिछले दशक में औसतन 20 फीसदी रहा था। 

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