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ये है देश का सबसे बुजुर्ग अरबपति, कभी केमिस्ट शॉप पर करता था नौकरी

फोर्ब्‍स ने दुनिया के अरबपतियों की 2018 की लिस्‍ट जारी कर दी है।

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नई दिल्‍ली. फोर्ब्‍स ने दुनिया के अरबपतियों की 2018 की लिस्‍ट जारी कर दी है। इस लिस्‍ट में एक ऐसे भारतीय का नाम है, जिसकी उम्र भले ही 92 साल हो चुकी है लेकिन बिजनेस जगत खासकर फार्मा इंडस्‍ट्री में उसका नाम अभी भी किसी पहचान का मोहताज नहीं है। हम बात कर रहे हैं अल्‍केम लैबोरेटरीज के चेयरमैन इमेरिटस संप्रदा सिंह की।  

 

फोर्ब्स की ‘द वर्ल्ड बिलियनेयर्स लिस्ट 2018’में संप्रदा सिंह 1.2 अरब डॉलर की दौलत के साथ 1,867वें पायदान पर रहे। सिंह ने 45 साल पहले फार्मा कंपनी अल्‍केम की स्थापना की थी। अपनी मेहनत और काबिलियत के बल पर 26 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा की वैल्‍यूएशन वाली कंपनी खड़ी करने वाले संप्रदा सिंह कभी एक केमिस्‍ट शॉप पर नौकरी किया करते थे। 

 

दो एंटीबायोटिक ने दी पहचान 

अमीरों की लिस्‍ट में संप्रदा सिंह को शामिल करने वाले फोर्ब्स ने कहा, ''अपनी एंटीबायोटिक्स क्लैवम और टैक्सिम के लिए जानी जाने वाली जेनरिक कंपनी का शेयर नवंबर 2016 से अब तक दोगुना चढ़ चुका है। मार्च, 2017 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान अल्‍केम का नेट प्रॉफिट 20 फीसदी बढ़कर 13.9 करोड़ डॉलर और रेवेन्यू 91.3 करोड़ डॉलर रहा था।'' इसका साफ मतलब है कि सिंह की कंपनी की कामयाबी का सफर जारी है। 

 

बिहार के रहने वाले हैं संप्रदा सिंह 

1925 में बिहार के जहानाबाद में मोदनगंज प्रखंड के ओकरी गांव में संप्रदा सिंह का जन्‍म एक किसान परिवार में हुआ था। उन्‍होंने पटना यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई की है। उन्होंने 8 अगस्‍त 1973 को अल्‍केम लैबोरेटरीज लिमिटेड की स्थापना की। उन्‍होंने पॉलिटिकल साइंस में पोस्‍ट ग्रेजुएशन भी किया। 1 अप्रैल 2015 से वह कंपनी  के चेयरमैन इमेरिटस हैं और मुंबई में अपने परिवार के साथ रहते हैं।


आगे पढ़ें... पढ़ने-लिखने के बाद खेती करना चाहते थे संप्रदा सिंह 

 

खेती करना चाहते थे संप्रदा सिंह

पटना यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद संप्रदा सिंह खेती करना चाहते थे। पढ़-लिखकर खेती करने आए संप्रदा सिंह को देख गांव के लोग कहते थे 'पढ़े फारसी बेचे तेल, देखो रे संप्रदा का खेल।' संप्रदा सिंह के पिता के पास करीब 25 बीघा जमीन थी। पढ़ाई पूरी कर वो गांव आए और आधुनिक तरीके से खेती करने की कोशिश की। वह धान और गेहूं की जगह सब्जी की खेती करना चाहते थे। खेती शुरू की तो उनके सामने सबसे बड़ी परेशानी सिंचाई की आई। संप्रदा ने डीजल से चलने वाला वाटर पंप लोन पर लिया और उससे सब्जी की सिंचाई करने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हुए। उसी साल अकाल पड़ गया। इंसानों और जानवरों के पीने के लिए पानी नहीं मिलता था तो खेती कहां से होती।

 

आगे पढ़ें... 'मगध फार्मा' से की शुरुआत 

 

पटना में शुरू की 'मगध फार्मा' 

संप्रदा सिंह ने 1953 में सिंह ने रिटेल केमिस्‍ट के तौर पर एक छोटी शुरुआत की। लक्ष्मी शर्मा के साथ पटना में दवा की दुकान शुरू की। वह हॉस्पिटल में दवा की सप्लाई भी करने लगे। 1960 पटना में मगध फार्मा के बैनर तले उन्‍हेांने फार्मा डिस्‍ट्रीब्‍यूशन का बिजनेस शुरू किया। धीरे-धीरे अपनी मेहनत के बल पर उन्‍होंने कई मल्‍टीनेशनल कंपनियों की डिस्‍ट्रीब्‍यूशटरशिप ले ली। कुछ ही दिनों में उन्‍होंने भारत के पूर्वी क्षेत्र का दूसरा बड़ा डिस्‍ट्रीब्‍यूशन नेटवर्क खड़ा कर दिया। संप्रदा सिंह की दवा एजेंसी अच्छी चल रही थी, लेकिन वह इतने से संतुष्ट होने वाले नहीं थे। वह कारोबार को विस्‍तार देने के इरादे से मुंबई चले गए।

 

एक लाख रुपए से शुरू की कंपनी

बताते हैं कि संप्रदा सिंह एक लाख रुपए पूंजी लेकर मुंबई गए और दवा कंपनी शुरू की। उन्होंने अल्‍केम लैबोरोटरीज नाम की कंपनी बनाई और दूसरे की दवा फैक्ट्री में अपनी दवा बनवाई। दवा की मांग बढ़ने पर संप्रदा सिंह ने अपनी दवा फैक्ट्री शुरू कर दी। संप्रदा सिंह 8 अगस्‍त 1973 से अल्‍केम लैबोरेटरीज लिमिटेड के नॉन एग्‍जीक्‍यूटिव डायरेक्‍टर हैं। 

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