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अकाउंट में सैलरी आते ही 6 बातों का रखें ध्‍यान, सिक्‍योर रहेगा फ्यूचर

अक्‍सर होता है कि हर कोशिश के बावजूद सैलरी महीने का आखिर आते-आते खत्‍म हो जाती है और सेविंग्‍स के लिए कुछ नहीं बचता।

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नई दिल्‍ली. नौकरीपेशा लोगों को जैसे ही सैलरी मिलती है, वे सबसे पहले महीने के खर्चे गिनते हैं। इन खर्चों के पूरा होने पर अगर कुछ बच जाता है तो फिर उसे भविष्‍य के लिए सेविंग्‍स में लगाने के बारे में सोचा जाता है। लेकिन अक्‍सर होता है कि हर तरह से कोशिश करने के बावजूद सैलरी महीने का आखिर आते-आते खत्‍म हो जाती है और सेविंग्‍स के लिए कुछ नहीं बचता। इसकी वजह है सैलरी-खर्च और सेविंग्‍स के बीच सही तरीके से मैनेज न कर पाना। फाइनेंशियल प्‍लानर्स के मुताबिक अगर आप वाकई में फ्यूचर के लिए सिक्‍योरिटी चाहते हैं तो पहले सेविंग्‍स और बाद में खर्चों को रखें। एडवांटेज फाइनेंशियल प्‍लानर्स LLP में पार्टनर और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्‍लानर तारेश भाटिया सैलरी के मैनेजमेंट के लिए 5 प्‍वॉइंट्स का ध्‍यान रखने की सलाह देते हैं, आइए आपको बताते हैं क्‍या हैं वे प्वॉइंट्स- 

 

सबसे पहले 20-30% की करें सेविंग

तारेश के मुताबिक, फ्यूचर सिक्‍योर करने के लिए सबसे पहले अपनी सैलरी के 30 फीसदी हिस्‍से को सेविंग्‍स में डालना चाहिए, इससे लॉन्‍ग टर्म बेनिफिट हासिल होगा। अगर आप पेरेंट्स हैं तो बच्‍चों की पढ़ाई-लिखाई, शादी आदि के लिए एक ठीक-ठाक फंड की जरूरत पड़ेगी। शादीशुदा नहीं भी हैं तो अभी न सही लेकिन आगे चलकर ये खर्च आपके सामने आएंगे ही। ऐसे में यह 30 फीसदी की सेविंग काफी काम आएगी। 

 

वही अगर नौकरीपेशा हैं तो रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियल सपोर्ट के लिए आपके पास फंड होना जरूरी है। इसलिए तब भी यह सेविंग फायदेमंद रहेगी। इसके लिए एफडी, पीएफ आदि को माध्‍यम बनाया जा सकता है। चाहें तो किसी फाइनेंशियल प्‍लानर की मदद भी ली जा सकती है। 

 

इमर्जेन्‍सी के लिए भी हो छोटा फंड

मुसीबत कभी बताकर नहीं आती। जिंदगी में कभी भी अचानक से पैसों की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में अगर फंडिंग पास नहीं हुई तो मुश्किल खड़ी हो जाती है। इसलिए एक इमर्जेन्‍सी फंड भी जरूरी है, लेकिन इसके लिए आपको अलग से पैसे जमा करने की जरूरत नहीं है। जो 30 फीसदी हिस्‍सा आपने सेविंग्‍स में रखा है, उसी में से एक छोटा हिस्‍सा इमर्जेन्‍सी के लिए अलग रखना चाहिए। इसे कन्टिन्‍युटी फंड भी कहा जाता है। सेविंग फंड का मिनिमम 5 परसेंट इस कंटिन्‍युटी फंड के लिए रखें। 

 

आगे पढ़ें- बाकी के प्‍वॉइंट्स 

 

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40-50% से करें घर के खर्च मैनेज

पेट्रोल का खर्च, किचन का खर्च, ग्रॉसरी, बच्‍चों की फीस,  घर का किराया, मोबाइल बिल, इंटरनेट बिल आदि को घर के खर्चों में शामिल किया जाता है। सैलरी का 40-50 फीसदी हिस्‍सा इन खर्चों के लिए रखें। 

 
20-30% EMI, इंश्‍योरेंस, लोन के लिए 

अगर  आपने कोई लोन लिया हुआ है, इंश्‍योरेंस कराया हुआ है तो उसकी EMI या ऐसे ही किसी अन्‍य खर्च के लिए भी सैलरी का एक हिस्‍सा अलग करें। यह सैलरी का 20 से 30% हो सकता है। 

 

आगे पढ़ें- आखिरी दो प्‍वॉइंट्स

एक्‍स्‍ट्रा खर्च से बचने के लिए ड्यू डेट से पहले भरें बिल

बिजली का बिल, मोबाइल का बिल, क्रेडिट कार्ड बिल जैसे हर महीने के बिल उनकी ड्यू डेट से पहले क्लियर कर दें। ऐसा करने से आप आखिरी वक्‍त की टेंशन से तो बचेंगे ही, साथ ही डेट निकल जाने पर दिया जाने वाला एक्‍स्‍ट्रा चार्ज भी बच जाएगा। 

 

उम्र के मुताबिक भी कर सकते हैं फाइनेंशियल प्‍लानिंग

तारेश के मुताबिक, आप चाहें तो अपनी उम्र के हिसाब से भी फाइनेंशियल प्‍लानिंग कर सकते हैं। इस तरह की प्‍लानिंग के तहत आपको किस उम्र पर कितने पैसों की जरूरत पड़ेगी, इसे ध्यान में रखा जाता है और उस हिसाब से प्‍लानिंग हाती है। अगर आप इस तरह की प्‍लानिंग को अपनाते हैं तो जरूरत के वक्‍त आपके पास एक निश्चित पूंजी मौजूद रहेगी।

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