बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Companiesइंटरव्‍यू में ऐसा क्‍या होता है कि फेसबुक दे देती है करोड़ों का पैकेज, ये है इनसाइड स्‍टोरी

इंटरव्‍यू में ऐसा क्‍या होता है कि फेसबुक दे देती है करोड़ों का पैकेज, ये है इनसाइड स्‍टोरी

दिग्‍गज टेक कंपनी फेसबुक में जॉब करने की बात आए तो कौन मना करना चाहेगा।

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नई दिल्‍ली. दिग्‍गज टेक कंपनी फेसबुक में जॉब करने की बात आए तो कौन मना करना चाहेगा। कंपनी अपने इंप्‍लॉइज को करोड़ों का पैकेज देती है। कंपनी यह सैलरी एक खास मानक के आधार पर देती है। यहां नए इंप्‍लॉइज की शुरुआती सैलरी और मौजूदा इंप्‍लॉइज की सैलरी में इजाफा के लिए एक तय फॉर्मूला है। इसलिए हायरिंग में निगोशिएशन स्किल का काम न के बराबर है। कोई भले ही निगोशिएशन करने में कितना भी माहिर हो फेसबुक अपने सेट फॉर्मूले के आधार पर ही सैलरी तय करती है। 

 

हाल ही में ग्‍लासडोर ने फेसबुक को 2018 में काम करने की सर्वोत्‍तम जगह करार दिया है। ग्‍लासडोर के मुताबिक, फेसबुक में एवरेज सालाना बेस सैलरी 77.84 लाख रुपए है। वहीं एवरेज टोटल कंपंजेशन लगभग 1 करोड़ रुपए से ऊपर है। 

 

सोर्स: इंक डॉट कॉम व बिजनेस इनसाइडर 

 

आगे पढ़ें- क्‍यों निगोशिएशन स्किल को तवज्‍जो नहीं 

क्‍यों नहीं दी जाती निगोशिएशन को तवज्‍जो 

फेसबुक में एचआर वीपी जैनेले गेल के मुताबिक, फेसबुक के लिए निगोशिएशन करना एक महत्‍वपूर्ण स्किल है लेकिन यह सब कुछ नहीं है। कंपंजेशन के मामले में तो बिल्‍कुल नहीं। हम निगोशिएशन के चक्‍कर में नहीं पड़ते क्‍योंकि इसमें वहीं जीतता है जो बेस्‍ट निगोशिएशर होता है। फेसबुक ऐसा नहीं चाहती। वह कैंडीडेट के स्किल्‍स और उसके एक्‍सपीरिएंस को तवज्‍जो देना चाहती है। फेसबुक निगोशिएशन स्किल्‍स के लिए किसी इंप्‍लॉई को तब तक हायर नहीं करती, जब तक कंपनी में उसकी भूमिका निगोशिएशन के लिए न हो। यही बात इंप्‍लॉई की सैलरी में इजाफे के मामले में भी लागू होती है। 

 

आगे पढ़ें- निष्‍पक्षता जरूरी

निष्‍पक्षता को दिया जाता है महत्‍व

गेल का कहना है कि फेसबुक में इंप्‍लॉई के सैलरी में निष्‍पक्षता होना हमारे लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण है। हम इस सिस्‍टम को कड़ा बनाए रखने के लिए बहुत ज्‍यादा टाइम देते हैं। गेल ने बताया कि इंप्‍लॉइज के लिए कंपंजेशन तय करने के लिए फेसबुक का अपना सिस्‍टम है। इसके तहत जॉब कैटेगरी, एक्‍सपीरिएंस लेवल, लोकेशन जैसे फैक्‍टर्स का ध्‍यान रखा जाता है। किसी भी इंप्‍लॉर्इ की संभावित सैलरी को लेकर एक रेंज तय है, जिसका कड़ाई से पालन होता है। यह रेंज लेवल और भूमिका के आधार पर तय होती है। 

 

आगे पढ़ें- कैंडीडेट की पहले की सैलरी पर भी देती है ध्‍यान 

देखी जाती है कैंडीडेट की पुरानी और मौजूदा सैलरी 

गेल का कहना है कि हम किसी इंप्‍लॉई को उसके एक्‍सपीरिएंस और फेसबुक के लिए वह क्‍या कर सकता है, इसके आधार पर हायर करते हैं। इसलिए हम उसकी मौजूदा स्थिति पर विचार करते हैं। अगर किसी कैंडीडेट को दिए गए ऑफर की वैल्‍यू उसके मौजूदा और कंपीटिंग कंपंजेशन से कम है तो हमारा कंपंजेशन एनालिस्‍ट उस कैंडीडेट को एक कॉम्पिटीटिव ऑफर उपलब्‍ध कराने पर काम करेगा। अगर प्रस्‍तावित सैलरी उसकी मौजूदा सैलरी से ज्‍यादा है तो उसकी हायरिंग प्रोसेस आगे बढ़ जाती है।  

 

आगे पढ़ें- नहीं चाहती इंप्‍लॉइज के बीच मतभेद

नहीं चाहती इंप्‍लॉइज के बीच मतभेद 

गेल के मुताबिक, फेसबुक का फॉर्मूला है कि नियुक्‍त किए जाने वाले अलग-अलग तरह के लोगों के बीच किसी भी तरह का मतभेद न हो। कई स्‍टडीज में सामने आया है कि महिलाएं उन्‍हें मिलने वाली पहले ऑफर को तुरंत स्‍वीकार कर लेती हैं, जबकि पुरुष और ज्‍यादा के लिए निगोशिएट करते हैं। मैककिन्‍से एंड कंपनी की एक रिसर्च में तो यह भी सामने आया कि जब महिलाएं ज्‍यादा सैलरी के लिए निगोशिएट करती हैं तो उन्‍हें बहुत ज्‍यादा एग्रेसिव माना जाता है। फेसबुक में इस तरह की चीजें न हों, इसीलिए हमने यहां जॉब को लेकर कई बेंचमार्क सेट किए हुए हैं। ये जॉब कैटेगरी, लेवल और लोकेशन पर आधारित हैं। 

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