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इंटर्नशिप ने सिखाया लाइफ का अहम सबक, बिल गेट्स-स्‍टीव जॉब्‍स और एलन मस्‍क को दुनिया के अमीरों में कर दिया शुमार

इंटर्नशिप के जरिए इन तीनों को अपने ड्रीम जॉब को पहचानने, उस दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिली...

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नई दिल्‍ली. भारत में इंटर्नशिप को बहुत ज्‍यादा जरूरी नहीं माना जाता। कई लोग ऐसे हैं, जो इंटर्नशिप को सीखने से ज्‍यादा नौकरी पाने का जरिया मानते हैं। सच तो यह है कि इंटर्नशिप आपके करियर को दिशा देने में अहम भूमिका निभाती है। इसके बेस्‍ट उदाहरण हैं- दुनियों अरबपतियों में शुमार बिल गेट्स, एलन मस्‍क और एप्‍पल के फाउंडर स्‍टीव जॉब्‍स। इन तीनों का ही मानना है कि इंटर्नशिप ने उन्‍हें कामयाब बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इंटर्नशिप के जरिए उन्‍हें अपने ड्रीम जॉब को पहचानने, उस दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिली और ये लोग दुनिया के अमीर और मशहूर लोगों में शामिल हो गए। आइए आपको बताते हैं कि गेट्स, मस्‍क और जॉब्‍स की लाइफ में इंटर्नशिप ने ऐसा क्‍या अहम योगदान दिया- 

 

एलन मस्‍क

एलन मस्‍क के अरबपति बनने में उनकी इंटर्नशिप्‍स का बहुत बड़ा हाथ है। मस्‍क ने अपनी इंटर्नशिप्‍स के दौरान विभिन्‍न इंप्‍लॉयर्स से प्रोफेशनल लाइफ के अलग-अलग गुर सीखे। मस्‍क को पहली इंटर्नशिप 1990 के दशक की शुरुआत में उस वक्‍त मिली, ज‍ब वह कनाडा की क्‍वीन्‍स यूनिवर्सिटी में फिजिक्‍स की पढ़ाई कर रहे थे। मस्‍क और उनके भाई किंबल यूं ही ऐसे लोगों को कॉल किया करते थे, जिनसे वे मिलना चाहते थे। ऐसे ही उन्‍होंने एक दिन बैंक ऑफ नोवा स्‍कॉशिया के एक टॉप एग्‍जीक्‍यूटिव पीटर निकोलसन को कॉल किया। निकोलसन ने न केवल मस्‍क और उनके भाई से बात की बल्कि उनके साथ लंच करने के लिए भी तैयार हो गए। 

 

निकोलसन ने मस्‍क को बैंक में समर इंटर्नशिप और 1 घंटे के लगभग 14 डॉलर का ऑफर दिया। इसी इंटर्नशिप के दौरान मस्‍क ने अपने बॉस को बॉन्‍ड ट्रेड से संबंधित एक प्रपोजल पेश किया। बॉस को वह प्रपोजल पंसद आया और उन्‍होंने इसे बैंक के सीईओ को भेज दिया। हालांकि वहां इसे रिजेक्‍ट कर दिया गया, लेकिन इससे मस्‍क के अंदर एक आत्‍मविश्‍वास पैदा हुआ। मस्‍क मुताबिक, इस वाकए से उन्‍होंने बैंकर्स की सोच को समझा,  जिससे उन्‍हें 1999 में अपना फाइनेंस स्‍टार्टअप एक्‍सडॉट कॉम शुरू करने में मदद मिली। 

 

बैंक ऑफ नोवा के बाद मस्‍क ने 1994 की गर्मियों में दो अन्‍य इंटर्नशिप कीं। एक एनर्जी स्‍टोरेज स्‍टार्टअप पिनैकल रिसर्च इंस्‍टीट्यूट के साथ दिन में और रॉकेट साइंस जेम्‍स स्‍टार्टअप के साथ रात में। 

 

आगे पढ़ें- स्‍टीव जॉब्‍स और बिल गेट्स की कहानी 

बिल गेट्स

बिल गेट्स के पिता एक वकील थे और इसके चलते बिल गेट्स ने भी एकबारगी वकालत में ही करियर बनाने की सोची। उनके माता-पिता अमेरिका के दिवंगत नेता ब्रॉक एडम्‍स के दोस्‍त थे। ब्रॉक के सुझाव पर 1972 के गर्मियों के सीजन में बिल गेट्स ने ओलंपिया की स्‍थानीय प्रतिनिधि सभा (भारत में विधानसभा के समकक्ष) में इंटर्नशिप शुरू की। उस वक्‍त वह केवल 16 साल के थे। बिल गेट्स के जिम्‍मे विधायी कार्रवाई से जुड़े डॉक्‍युमेंट्स को कांग्रेस मेंबर्स के ऑफिस में पहुंचाना, नए बिल और संशोधन लेकर सदन ले जाना और क्‍लर्क वाले कुछ अन्‍य काम थे। गेट्स ने 1 महीने यह इंटर्नशिप की। 

उसके बाद उन्‍होंने महसूस किया कि वह वकील या नेता बनने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। उनकी रुचि तो कारोबार में है। गेट्स के मुताबिक, इंटर्नशिप के दौरान वह हमेशा बिजनेस कॉन्‍ट्रैक्‍ट और उससे जुड़ी चीजों में दिलचस्‍पी लेते थे। वह हमेशा बिजनेस वर्ल्‍ड से जुड़ी जानकारी पढ़ते रहते थे। वह इस वक्‍त क्‍या कर रहे हैं और उन्‍हें अपनी जिंदगी में क्‍या बनना है, इस बारे में सोचने में उनकी इंटर्नशिप ने अहम भूमिका निभाई। 

 

आगे पढ़ें- स्‍टीव जॉब्‍स को कैसे मिली मदद

स्‍टीव जॉब्‍स

एप्‍पल के को-फाउंडर स्‍टीव जॉब्‍स ने अपनी पहली इंटर्नशिप 12 साल की उम्र में की थी। उन्‍होंने हैवलेट पैकर्ड (एचपी) के को-फाउंडर बिल हैवलेट को को यूं ही एक कॉल किया था। कॉल के जरिए जॉब्‍स ने हैवलेट से पूछा कि क्‍या उनके पास फ्रीक्‍वेंसी काउंटर बनाने के लिए स्‍पेयर पार्ट मिलेंगे। हैवलेट ने न केवल स्‍टीव जॉब्‍स को पार्ट उपलब्‍ध कराए बल्कि उन्‍हें एचपी में समर इंटर्नशिप का मौका भी दिया। जॉब्‍स ने यह खुलासा सिलिकॉन वैली हिस्‍टोरिकल एसोसिएशन को दिए एक इंटरव्‍यू में किया था। इस इंटर्नशिप ने जॉब्‍स को अपना बिजनेस खड़ा करने में काफी मदद की। 

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