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1 महीने में कटे 30 लाख गैस कनेक्‍शन, कहीं आपने भी नहीं की है ये गलती

अधिकारियों के मुताबिक, ये 30 लाख कनेक्शन डोमेस्टिक नॉन सब्सिडाइज कन्‍ज्‍यूमर्स (DNSC) के हैं...

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नई दिल्‍ली.  देश की 3 बड़ी पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) ने एक महीने करीब 30 लाख ग्राहकों के कनेक्‍शन काट दिए हैं। बिजनेस स्‍ट्रैंडर्ड में छपी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन ग्राहकों के खिलाफ खास कारणों की चलते कार्रवाई की गई है। 

 

खातों से लिंक नहीं थे कनेक्‍शन 
अधिकारियों के मुताबिक, ये 30 लाख कनेक्शन डोमेस्टिक नॉन सब्सिडाइज कन्‍ज्‍यूमर्स (DNSC) के हैं। ये लोग नॉन कैश ट्रांजेक्‍शन कम्‍प्‍लाइंट यानी एनसीटीसी के तहत काम कर रहे थे। सीधी भाषा में कहें तो इन लोगों ने अपने खातों से बैंक अकाउंट जैसी जरूरी चीजों से लिंक नहीं किया था। एनसीटीसी कनेक्शन पर सरकार सब्सिडी नहीं देती है। खाना बनाने के अलावा अन्य कॉमर्शियल कामों में रसोई गैस का इस्तेमाल रोकने के लिए कंपनियों की ओर से यह कार्रवाई की गई है।  

 

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कहीं अपने भी तो नहीं की है गलती  
रिपोर्ट के मुताबिक, 1 करोड़ कनेक्‍शन अब भी तीनों कंपनियां की जांच के दायरे में हैं। मतलब आपने भी अगर अपने गैस कनेक्‍शन को बैंक अकाउंट के साथ लिंक नहीं कराया है, तो आपके गैस कनेक्‍शन पर भी गाज गिर सकती है। भले ही आपने गिव इट अप अभियान के तहत सिलेंडर पर सरकार से सब्सिडी छोड़ रखी हो। इसलिए ऐसा है तो तुरंत अपने गैस कनेक्‍शन को आधार और अकाउंट से लिंक कराएं। 

 

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अब तक खत्‍म किए 3.75 करोड़ फर्जी कनेक्शन 
रसोई गैस के लिए Direct Benefit Transfer of LPG यानी डीबीटीएल लागू होने के बाद करीब 3.74 करोड़ फर्जी कनेक्शन खत्म कर दिए गए हैं। इससे सरकार को करीब 30 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई है। सरकार ने गिव अप अभियान, सभी जिलों में डीबीटीएल लागू करने व एलपीजी कनेक्शन को आधार से जोडऩे जैसे कई अभियान चलाए हैं। ताकी लीकेज को कम से कम किया जा सके और जरूरत मंद लोगों तक LPG की पहुंच की सुनिश्चित किया जा सके। 
 
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7.5 करोड़ फर्जी कनेक्‍शन की पहचान 
पिछले साल सरकार ने ऐसे लोगों के रसोई गैस कनेक्‍शन को सब्सिडी के दायरे से बाहर कर दिया था, जिनकी सालाना इनकम 10 लाख रुपए या उससे ज्यादा है। सरकार ने कम से कम 7.5 करोड़ फर्जी या डुप्लीकेट कनेक्शन चिह्नित करने में सफल रही है। सरकार के इस कदम से अफरातफरी भी हो सकती है। अगर उपभोक्ता के मौजूदा कनेक्शन को बंद कर दिया जाता है तो खाना बनाने के लिए कोई वैकल्पिक ईंधन नहीं है।

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