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Google में आसान हुई हायरिंग प्रोसेस, अब 'रूल ऑफ फोर' कर रहा नौकरी देने-न देने का फैसला

अभी तक गूगल में इंटरव्‍यू की प्रोसेस काफी लंबी थी। यहां नौकरी देने से पहले 12 इंटरव्‍यू लिए जाते थे।

Google reduced its interview process from 12 and implemented rule of four

नई दिल्‍ली. गूगल जैसी दिग्‍गज कंपनी में नौकरी पाने की चाह भला किसे नहीं होगी। यहां मिलने वाली अच्‍छी सैलरी, हाई जॉब सैटिसफैक्‍शन, बड़े फायदे आदि लोगों को लुभाते हैं। लेकिन कंपनी जितनी बड़ी और नामी हो, उसमें नौकरी पाना उतना ही मुश्किल होता है। ऐसी कंपनियां अच्‍छी सुविधाएं देती हैं तो इंप्‍लॉई द्वारा काम में उसका 100% दिए जाने की उम्‍मीद भी रखती हैं और इसीलिए अच्‍छे टैलेंट की तलाश के लिए हर मुमकिन कोशिश करती हैं। इसी कोशिश में टफ इंटरव्‍यू प्रोसेस भी शामिल होती है। गूगल भी इससे अछूती नहीं है।

 

अभी तक गूगल में इंटरव्‍यू की प्रोसेस काफी लंबी थी। यहां नौकरी देने से पहले 12 इंटरव्‍यू लिए जाते थे। स्‍टाफ डॉट कॉम के एक आर्टिकल के मुताबिक, गूगल में हर साल 20 लाख से ज्‍यादा जॉब एप्‍लीकेशन आते हैं। इनमें से गूगल टैलेंटेड और अच्‍छा काम करने वालों को छांट सके, इसके लिए कैंडीडेट को वहां 12 इंटरव्‍यू प्रोसेस से गुजरना होता था। यह प्रोसेस काफी लंबी थी, जिसके चलते यह कहा जाने लगा कि गूगल में नौकरी पाना हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन पाने से भी 10 गुना ज्‍यादा मुश्किल है। 

 

इतनी लंबी प्रोसेस के बावजूद नहीं मिल रहा था मनचाहा रिजल्‍ट

जॉब इंटरव्‍यू की इतनी लंबी प्रोसेस के बावजूद कंपनी कैंडीडेट को हायर करने के अपने फैसलों से संतुष्‍ट नहीं थी। इतनी जटिल प्रोसेस भी सही इंप्‍लॉई का चुनाव ही किया गया है, इस‍ बात को सुनिश्चित नहीं कर रही थी। इसे देखते हुए कंपनी ने फैसला किया कि वह इस बात का पता लगाएगी कि इतनी लंबी और जटिल प्रोसेस जरूरी है या नहीं, साथ ही यह भी कि किसी इंप्‍लॉई को रखने का फैसला करने के लिए आखिर कितने इंटरव्‍यू काफी होंगे। 

 

ऐसे खोजा 'रूल ऑफ फोर'

उसके बाद गूगल की पीपुल एनालिटिक्‍स टीम ने 5 साल के इंटरव्‍यू डाटा और फीडबैक की जांच की। अपनी जांच में गूगल ने पाया कि चार इंटरव्‍यू के बाद कंपनी यह अंदाजा लगा सकती है कि कौन सा कैंडीडेट नौकरी पाने के काबिल है। यानी अब 12 के बजाय केवल 4 इंटरव्‍यू और एक एडिशनल इंटरव्‍यू फैसला लेने के लिए काफी होगा। इस रिसर्च और कुछ अन्‍य एक्‍सपेरिमेंट्स के आधार पर गूगल ने रूल ऑफ फोर लागू किया। 

 

रूल ऑफ फोर का फायदा

गूगल के इस फैसले से कैंडीडेट को हायर करने में लगने वाले एवरेज टाइम में 2 हफ्ते की कमी आई। साथ ही गूगल इंप्‍लॉइज के इंटरव्‍यू में लगने वाले हजारों घंटे भी बचे। इसके अलावा अप्‍लाई करने वाले कैंडीडेट्स को भी फायदा हुआ। गूगल की लंबी इंटरव्‍यू प्रोसेस में कैंडीडेट्स को 12 इंटरव्‍यू की तैयारी, ट्रैवलिंग, मौजूदा नौकरी से टाइम निकालना, परिवार से दूर रहना होता था। इसमें उनका भी काफी वक्‍त और एनर्जी लगती थी। लेकिन रूल ऑफ फोर के चलते अब उनके लिए भी आसानी हो गई, जिससे कंपनी का कैंडीडेट एक्‍सपीरियंस बेहतर हुआ। 

 

सोर्स- इंक डॉट कॉम 

 

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