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शादी के सीजन में बढ़ी कांजीवरम, बनारसी की डिमांड, साड़ियों में लौटा सोने-चांदी का यूज

शादी के सीजन में फिर से साड़ियों में सोने का यूज वापस लौट रहा है।

gold use in kanjivaram saree is trending

नई दिल्ली। शादी के सीजन में फिर से साड़ियों में सोने का यूज वापस लौट रहा है। इस समय कारोबारी बनारसी, कांजीवरम, कर्नाटक सिल्क साड़ियों में इसका इस्तेमाल करने लगे हैं। कांजीवरम और बनारसी साडियों के ट्रेंड में लौटने और सोने-चांदी की कीमतें शादी के सीजन में अधिक नहीं बढ़ने से साडियों की लागत में 30-40 फीसदी कमी आई है। बढ़ती डिमांड को भुनाने के लिए कारोबारी एक्सचेंज ऑफर से लेकर रिसेल का ऑफर दे रहे हैं। आइए जानते हैं कि साड़ियों के कारोबार का क्या है ट्रेंड..

 

लौटने लगा है सोने का ट्रेंड

 

शादियों के सीजन में गोल्ड और सिल्वर की कीमतें कम होने से प्योर सिल्क साड़ी में गोल्ड लौटने लगा है। शुभालक्ष्मी ने अपनी बेटी की शादी के लिए प्योर गोल्ड थ्रेड की कांजीवरम साड़ी 30,000 रुपए में खरीदी, जिसकी कीमत आज से करीब चार साल पहले 45 से 50 हजार रुपए थी। नल्ली साड़ी के अधिकारी ने बताया कि गोल्ड की कीमतें कम होने से साडियों में गोल्ड और सिल्वर थ्रेड का इस्तेमाल बढ़ने लगा है। कंपनी गोल्ड और गोल्ड कोटेड सिल्वर थ्रेड दोनों का यूज साड़ियों मे करती है।

 

कम हुई साड़ी की कीमतें

 

दाम कम होने से कस्टमर शादी के लिए आर्टिफिशियल गोल्ड जरी की जगह प्योर गोल्ड और सिल्वर साड़ी खरीद रहे हैं। गोल्ड और सिल्वर की कीमतें कम होने से कांजीवरम, कर्नाटक सिल्क साड़ियों के दामों में 30-35 फीसदी की कमी आई है। कांचीपुरम सिल्क साड़ीज मैन्युफैक्चर की बिजनेस डेवलपमेंट हेड महालक्ष्मी ने बताया पांच साल पहले ऐसा हुआ था कि गोल्ड का प्राइस 35 हजार रुपए के आसपास था तब कांजीवरम साड़ी की कीमत 50,000 रुपए से 2 लाख रुपए तक पहुंच गई थी लेकिन कीमतें काफी हद तक 30 से 32 हजार के बीच रहने से कांजीवरम साड़ी की कीमत 35 हजार रुपए से लेकर 1.50 लाख रुपए पर आ गई है।

 

मिल रहा है एक्सचेंज ऑफर

 

कंपनियां सिल्वर जरी सिल्क और गोल्ड जरी वर्क साड़ी को बेचने पर 30 फीसदी का कैश बैक दे रही है। कांजीवरम, कर्नाटक सिल्क साड़ी को खरीदने के बाद बेचने ओरिजनल कीमत का 30 फीसदी मिल जाएगा। साड़ियों की कोई रीसेल वैल्यु नहीं होती लेकिन प्योर सिल्क कांजीवरम साड़ियों की रीसेल वैल्यु है। यही नहीं पुरानी कांजीवरम साड़ी को बेचने पर भी 3 से 10 हजार रुपए कंपनियां दे रही है। तमिलनाडु की कोमाक्षी सिल्क साड़ी की अधिकारी मधुरिमा ने बताया कि 30 से 40 पुरानी साड़ियों में प्योर गोल्ड और सिल्वर का इस्तेमाल किया होता है। उसको कंपनियां रिफ्रेश करके साड़ियों पर फिर से इस्तेमाल कर लेती हैं।

 

महंगे गोल्ड के कारण कम कैरेट का इस्तेमाल होने लगा था

 

साल 2012-13 में गोल्ड की कीमतें 35,000 रुपए और सिल्वर की कीमतें 74,000 रुपए के पार पहुंचने से कांजीवरम और कर्नाटक सिल्क साड़ियों की कीमतें आसमान छूने लगी थी। कीमत अधिक होने से डिमांड कम होने लगी थी। तब सिर्फ ऑर्डर पर ही गोल्ड और सिल्वर जरी की साड़ियां बनाई जाने लगी। कीमतें कम करने के लिए साड़ी मैन्युफैक्चर 22 से 24 कैरेट गोल्‍ड की जगह 12 से 14 कैरेट का गोल्ड इस्तेमाल करने लगे लेकिन अब ये साड़ियां कीमतें कम होने और ट्रेंडिंग में आने से इनकी डिमांड बढ़ने लगी है।

 

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