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कभी Forbes की अरबपति लिस्‍ट में था नाम, कर्ज चुकाने के लिए बेचना पड़ा बंगला

कर्ज में डूबे भारत के टॉप अर‍बपतियों में शुमार मालविंदर और शिविंदर सिंह अब अपनी प्रॉपर्टी बेचकर कर्ज चुका रहे हैं।

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नई दिल्‍ली. कर्ज में डूबे भारत के टॉप अर‍बपतियों में शुमार मालविंदर और शिविंदर सिंह अब अपनी प्रॉपर्टी बेचकर कर्ज चुका रहे हैं।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में सिंह ब्रदर्स ने दिल्‍ली के लुटियंस जोन के बंगले का सौदा किया है। इस बंगले को 185 करोड़ रुपए में बेचा गया है। बंगले की बिक्री से प्राप्‍त हुई राशि को उस देनदार को चुकाया जाएगा, जिसके पास सिंह ब्रदर्स ने बंगला गिरवी रखा था। 

 

बता दें कि मालविंदर और शिविंदर सिंह फोर्ब्‍स की 100 रिचेस्‍ट इंडियंस 2016 लिस्‍ट में शामिल थे। उस वक्‍त इनकी संपत्ति 8864 करोड़ रुपए थी और लिस्‍ट में ये 92वें स्‍थान पर थे। लेकिन आज इन भाइयों को कर्ज चुकाने के लिए अपना बंगला बेचना पड़ा है। 

 

कौन हैं सिंह ब्रदर्स 

मालविंदर और शिविंदर सिंह भारत के फेमस फोर्टिस हेल्‍थकेयर के फाउंडर हैं। वे रैलीगेयर हेल्‍थकेयर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के मालिक भी हैं। दोनों ने 1990 के दशक में फोर्टि‍स हेल्‍थकेयर की स्‍थापना की थी। इसके अलावा सिंह ब्रदर्स फार्मा कंपनी रैनबैक्‍सी के फाउंडर भी हैं। उन्‍होंने 2008 में अपना स्‍टेक जापानी कंपनी को 2.4 अरब डॉलर में बेच दि‍या था। 

 

आगे पढ़ें- कौन है नया मालिक 

कौन है बंगले का खरीदार 

सिंह ब्रदर्स के इस बंगले को मैक्‍स इंडिया ग्रुप के फाउंडर अनलजीत सिंह ने खरीदा है। अनलजीत सिंह मालविंदर और शिविंदर सिंह के चाचा हैं।  

 

आगे पढ़ें- क्‍या हैं सिंह ब्रदर्स के बंगले की खासियत

बंगले की खासियत

लुटियन जोन के इस बंगले की खासियत 0.5 एकड़ है। यह 1 राजेश पायलट लेन में स्थित है। यह बंगला उस 3 एकड़ प्‍लॉट का हिस्‍सा है, जिसके मालिक अनलजीत सिंह के पिता भाई मोहन सिंह थे। इस प्‍लॉट के बाकी के हिस्‍सों 2 राजेश पायलट लेन और 15 एपीजे अब्‍दुल कलाम रोड के ओनर अनलजीत सिंह ही हैं।  
 
आगे पढ़ें- हाल ही में फोर्टिस बोर्ड से दिया है इस्‍तीफा 

 

दे चुके हैं फोर्टिस के बोर्ड से इस्‍तीफा 

बता दें कि सिंह ब्रदर्स पर फोर्टिस से 500 करोड़ रुपए बिना बोर्ड अप्रूवल निकालने का आरोप है। पैसों का यह लेनदेन करीब एक साल पहले हुआ था। हाल ही में उन्‍होंने फोर्टिस के बोर्ड से इस्‍तीफा दे दिया है। उनके इस्‍तीफे से चंद दि‍नों पहले ही दि‍ल्‍ली हाईकोर्ट ने इंटरनेशनल मध्‍यस्‍थ अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जि‍समें उन्‍हें जापानी कंपनी डियाची सेन्‍को को 3500 करोड़ रुपए देने हैं। 

 

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