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फेसबुक पर फिर दिखेंगे बिटकॉइन जैसी क्रिप्‍टोकरंसी के एड, हटाया बैन

इनीशियल कॉइन ऑफरिंग्‍स या बाइनरी ऑप्‍शंस से संबंधित एड अभी भी रहेंगे प्रतिबंधित

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नई दिल्‍ली. बिटकॉइन जैसी क्रिप्‍टोकरंसी पर बैन को लेकर सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म फेसबुक ने मन बदल लिया है। फेसबुक ने अब क्रिप्‍टोकरंसी एड पर से बैन हटा लिया है। हालांकि फेसबुक का कहना है कि वह केवल प्री-अप्रूव्‍ड एडवर्टाइजर्स के एड ही स्‍वीकार करेगी, साथ ही ऐसा कुछ निश्चित परिस्थितियों में ही किया जाएगा। इसके अलावा इनीशियल कॉइन ऑफरिंग्‍स या बाइनरी ऑप्‍शंस से संबंधित एड अभी भी प्रतिबंधित रहेंगे। इनीशियल कॉइन ऑफरिंग्‍स या ICO कंपनियों के लिए इन्‍वेस्‍टर्स क्रिप्‍टोग्राफिक एसेट्स बेचकर फंड जुटाने का एक जरिया है। 

 

बता दें कि फेसबुक ने अपने प्‍लेटफॉर्म पर क्रिप्‍टोकरंसी एड्स पर जनवरी 2018 में बैन लगाया था। उस वक्‍त बिटकॉइन व अन्‍य क्रिप्‍टोकरंसी में लगातार तेजी आ रही थी, लोग उनमें मुनाफा देखकर इन्‍वेस्‍ट कर रहे थे। लेकिन यह इन्‍वेस्‍टमेंट पूरी तरह सु‍रक्षित है, इस बात की पुष्टि नहीं थी और डिजिटल करेंसी में धोखाधड़ी या जालसाजी के कई मामले भी सामने आए थे। लोगों को गुमराह करने वाले विज्ञापनों और धोखाधड़ी से बचाने के लिए फेसबुक ने हर तरह की क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित विज्ञापनों पर बैन लगा दिया था। इसकी जानकारी फेसबुक के प्रोडक्‍ट मैनेजर रॉब लेदर्न ने कंपनी की ब्‍लॉग पोस्‍ट में दी थी। फेसबुक के बाद गूगल, ट्विटर, स्‍नैपचैट आदि ने भी इन्‍हें बैन कर दिया था।   

 

दिए थे नई पॉलिसी लाने के संकेत

लेदर्न ने उसी वक्‍त संकेत दे दिया था कि भविष्य में क्रिप्‍टोकरेंसी से ताल्‍लुक रखने वाले बिजनेस के विज्ञापनों के लिए फेसबुक एक नई पॉलिसी ला सकती है। क्रिप्‍टोकरंसी हेज फंड ब्‍लैक स्‍क्‍वैयर कैपिटल में पोर्टफोलियो मैनेजर क्रिस यू के मुताबिक, फेसबुक का यह कदम हैरान करने वाला नहीं है क्‍योंकि उसने बैन लगाते वक्‍त ही क्रिप्‍टोकरंसी एड के लिए पॉलिसी लाने की बात कही थी। लेकिन इतना जरूर है कि मार्केट को इतनी जल्‍दी इस बारे में कदम उठा लिया जाने की उम्‍मीद नहीं थी। अब हमें गूगल, ट्विटर और अन्‍य सोशल नेटवर्क्‍स की ओर से क्रिप्‍टोकरंसी के लिए पॉलिसी डिसीजंस का इंतजार है। 

 

क्‍या है नई पॉलिसी में

अब क्रिप्‍टोकरंसी के एडवर्टाइजर्स को फेसबुक पर एड देने के लिए एक फॉर्म भरना होगा। इसमें क्रिप्‍टोकरंसी का लाइसेंस और करंसी की सार्वजनिक ट्रेडिंग होती है या नहीं आदि चीजों की जानकारी देनी होगी। इससे फेसबुक को एडवर्टाइजर की योग्‍यता परखने में मदद मिलेगी। 

 

आगे पढ़ें- हर कोई नहीं दे पाएगा एड 

हर कोई नहीं दे सकेगा एड

फेसबुक के प्रोडक्‍ट मैनेजर रॉब लेदर्न ने कंपनी की ब्‍लॉग पोस्‍ट में कहा कि इन प्रतिरोधों के चलते हर कोई एड नहीं दे पाएगा, केवल वही ऐसा कर पाएगा जिसकी क्रिप्‍टोकरंसी वाकई में ट्र‍ेडिंग में है। आगे कहा कि हम फीडबैक पर भी ध्‍यान देंगे, यह देखेंगे कि हमारी यह पॉलिसी काम आ भी रही है या नहीं। फेसबुक इस टेक्‍नोलॉजी की स्‍टडी जारी रखेगी ताकि जरूरत पड़ने पर हम इसमें संशोधन कर सकें। 

 

आगे पढ़ें- मई में बनाया ब्‍लॉकचेन ग्रुप

मई में बनाया था ब्‍लॉकचेन ग्रुप

मई में फेसबुक ने एक नया एक्‍सपेरिंमेंटल ब्‍लॉकचेन ग्रुप भी बनाया था। ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी ही बिटकॉइन जैसी क्रिप्‍टोकरंसी का आधार है। इस ग्रुप की अगुवाई पूर्व मैसेंजर एग्‍जीक्‍यूटिव डेविड मर्कस कर रहे हैं। 

 

सोर्स- CNBC, फोर्ब्‍स

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