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भले ही न हो अकांउट या कर दिया लॉग आउट, फिर भी डाटा कलेक्‍ट करती है फेसबुक

डाटा लीक मामले में चौतरफा आलोचना का सामना कर रही फेसबुक ने एक और खुलासा किया है।

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सैन फ्रांसिस्‍को. डाटा लीक मामले में चौतरफा आलोचना का सामना कर रही फेसबुक ने एक और खुलासा किया है। खुलासा यह है कि आपके लॉग आउट होने के बाद भी फेसबुक आपका डाटा कलेक्‍ट करती रहती है। पिछले हफ्ते फेसबुक सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने यूएस कांग्रेस के समक्ष फेसबुक के कामकाजी तरीकों और अपनी ओर से सफाई पेश की थी। अब फेसबुक ने मंगलवार को इस बात को लेकर सवालों के जवाब दिए कि जब लोग फेसबुक पर लॉग इन नहीं होते हैं तो उस वक्‍त वह कैसे उनका डाटा कलेक्‍ट करती है। 
 
कई वेबसाइट और ऐप अपने कंटेंट और एड को बनाने के लिए फेसबुक की सर्विसेज लेते हैं। फेसबुक में प्रोडक्‍ट मैनेजमेंट डायरेक्‍टर डेविड बेसर ने एक ब्‍लॉग पोस्‍ट में कहा कि लाइक बटन या फेसबुक एनालिटिक्स जैसे ऐप और वेबसाइट, जो हमारी सर्विस इस्‍तेमाल करते हैं वे अपने एड और कंटेंट को बेहतर बनाने के लिए हमें इन्‍फॉरमेशन भेजते हैं। इसके बदले में फेसबुक एड में और लोग कैसे उनकी सर्विस का इस्‍तेमाल कर रहे हैं इसे समझने में उनकी मदद करता है। इसमें उन्‍होंने आगे बताया कि जब आप इन साइट या एप पर जाते हैं तो आपकी इनफॉरमेशन हम तक पहुंच जाती है, फिर भले ही आप लॉग आउट हों या आपका फेसबुक अकाउंट न हो। इन साइट या एप को नहीं पता होता कि कौन फेसबुक यूजर है और कौन नहीं। 

 

आगे पढ़ें- कौन सा ब्राउजर कर रहे इस्‍तेमाल यह भी रहता है पता 

आपके ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्‍टम की भी रहती है जानकारी 


जब आप फेसबुक की सर्विस ले रही किसी वेबसाइट पर जाते हैं तो आपका ब्राउजर जैसे क्रोम, सफारी या फायरफॉक्‍स साइट के सर्वर पर एक रिक्‍वेस्‍ट भेजता है। ब्राउजर आपका आईपी एड्रेस शेयर करता है ताकि वेबसाइट को पता हो कि इंटरनेट पर कहां साइट का कंटेंट भेजना है। वेबसाइट को आपके द्वारा इस्‍तेमाल किए जा रहे ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्‍टम (जैसे- एंड्रॉयड या विंडोज) की इनफॉरमेशन भी रहती है। इसके पीछे वजह है कि सारे ब्राउजर और डिवाइस एक जैसे फीचर्स को सपोर्ट नहीं करते हैं। इसके अलावा वेबसाइट को कुकीज की इनफॉरमेशन भी मिलती है। कुकीज इस बात के आइडेंटीफायर्स होते हैं कि आप पहले कभी उस साइट पर गए हैं या नहीं। इससे आपके द्वारा पहले सेव किए गए आइटम्‍स जैसी चीजों को एक्‍सेस करने में मदद मिलती है। 

 

आगे पढ़ें- यूं ब्राउजर देता है इनफॉरमेशन

आपका ब्राउजर यूं भेजता है इनफॉरमेशन 

बेसर ने कहा कि इसलिए जब कोई वेबसाइट हमारी किसी सर्विस को इस्‍तेमाल करती है तो आपके द्वारा वेबसाइट को एक्‍सेस करते वक्‍त वहां पहुंची इनफॉरमेशन आपका ब्राउजर फेसबुक को भेज देता है। फेसबुक को इस बात की भी जानकारी रहती है कि आप किसी वेबसाइट या एप का इस्‍तेमाल कर रहे हैं। यह जानकारी टूल्‍स उपलब्‍ध कराते वक्‍त हमारे लिए उपयोगी होती है। बेसर का यह भी कहना है कि वेबसाइट्स और एप्‍स से जो इनफॉरमेशन हमें मिलती है, उसका इस्‍तेमाल फेसबुक पर सिक्‍योरिटी को बेहतर बनाने में भी होता है। 

 

आगे पढ़ें- और भी कई कंपनियां हैं कतार में

फेसबुक अकेली नहीं है ऐसा करने वाली 

फेसबुक ने यह भी कहा है कि वह ऐसा करने वाली अकेली कंपनी नहीं है। ऐसी कई अन्‍य कंपनियां भी हैं जो एप्‍स और साइट के जरिए यूजर की इनफॉरमेशन प्राप्‍त करती हैं। आगे कहा कि ट्विटर, पिनट्रेस्‍ट और  लिंक्‍डइन सभी में लाइक और शेयर जैसे बटन हैं ताकि लोग उनकी सर्विस के जरिए चीजें शेयर कर सकें। गूगल की भी पॉपुलर एनालिटिक्‍स सर्विस है और अमेजॉन, गूगल और ट्विटर सभी लॉग इन फीचर की पेशकश करते हैं। इन समेत कई अन्‍य कंपनियां एडवर्टाइजिंग सर्विसेज की भी पेशकश करते हैं। 

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