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इम्‍प्‍लॉइज से चाहते हैं अच्‍छा काम, तो सैलरी के अलावा इन 5 चीजों का रखें ध्‍यान

हर इम्‍प्‍लॉयर चाहता है कि उसके इम्‍प्‍लॉइज उसकी कंपनी के लिए अपना 100 परसेंट दें।

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नई दिल्‍ली. हर इम्‍प्‍लॉयर चाहता है कि उसके इम्‍प्‍लॉइज उसकी कंपनी के लिए अपना 100 परसेंट दें। उसे यही उम्‍मीद होती है कि इम्‍प्‍लॉइज के अच्‍छे काम से उसकी कंपनी नई बु‍लंदियों पर पहुंचे। इसके लिए कई इम्‍प्‍लॉयर, इम्‍प्‍लॉइज की सैलरी को लेकर किसी तरह की कंजूसी नहीं करते। अच्छे काम के लिए वे अच्‍छी सैलरी को जरूरी मानते हैं। लेकिन कई बार देखा गया है कि टैलेंटेड और मेहनती होने व अच्‍छी सैलरी के बावजूद इम्‍प्‍लॉइज का मन काम में नहीं लगता। यहां तक कि वह नौकरी बदलने के बारे में सोचने लगता है। आखिर क्‍यों अच्‍छी सैलरी भी इम्‍प्‍लॉइज को रोककर रखने में नाकामयाब रहती है और कई बार कई बार कम सैलरी पर भी लोग लंबे समय तक एक ही कंपनी में रहते हैं। इसकी वजह यह है कि सैलरी के अलावा भी इम्‍प्‍लॉइज के लिए कुछ चीजें मायने रखती हैं। इंक डॉट कॉम की एक रिपोर्ट में ऐसी ही 5 चीजों का जिक्र किया गया है, जो पैसों के अलावा इम्‍प्‍लॉइज को खुश रखने के लिए महत्‍वपूर्ण हैं। अगर इम्‍प्‍लॉयर चाहते हैं कि उनके इम्‍प्‍लॉइज काम को अपना 100 परसेंट दें तो उनकी कंपनी में इन चीजों का होना बेहद जरूरी है।

 

1. साथी इम्‍प्‍लॉइज के साथ वक्‍त बिताने का मौका

 

ऑफिस में काम तो जरूरी ही है लेकिन साथ ही सभी इम्‍प्‍लॉइज की आपसी बॉन्डिंग होना भी जरूरी है। इसके लिए इम्‍प्‍लॉयर्स को चाहिए कि वे अपने इम्‍प्‍लॉइज को साथ में टाइम स्‍पेंड करने का मौका दें। इसके पीछे वजह है कि इन्‍सान अपनी फैमिली को छोड़कर अपना लगभग आधे से ज्‍यादा दिन ऑफिस में बिताता है। ऐसे में वह उस खालीपन को भरना चाहता है, जिसके चलते वह ऑफिस के अपने साथी कर्मचारियों को ही अपने फैमिली मेंबर जैसा मानने लगता है। अगर ऑफिस में इम्‍प्‍लॉइज को फ्रेंडली इनवायरमेंट मिलता है तो इससे उसका काम प्रभावित नहीं होता बल्कि वह और ज्‍यादा एनर्जी के साथ काम करता है। साथ ही उसके ऐसे ऑफिस में ज्‍यादा टाइम तक बने रहने की संभावना ज्‍यादा होती है।

 

 

 

2. चुनौतीपूर्ण मौके

 

काम करना लोगों के लिए नए स्किल्‍स सीखने और नए आइडियाज डेवलप करने का एक प्‍लेटफॉर्म भी है। अपने काम से ही इन्‍सान अपनी क्षमता आंकता है और उसे बेहतर बनाने की कोशिश करता है। इन्‍सान कुछ नया तभी सीखता है, जब उसे कुछ नया, कुछ चैलेंजिंग करने को मिलता है। अगर हमेशा एक जैसा ही काम करने को मिले तो इन्‍सान को कुछ नया करने का मौका मिल ही नहीं पाता। इसलिए जरूरी है कि इम्प्‍लॉइज को कुछ नए, कुछ चैलेंजिंग मौके दिए जाएं ताकि वह अपने आप का आकलन कर सकें, साथ ही उनके अंदर एक उत्‍साह बना रहे। हर वक्‍त एक ही काम इम्‍प्‍लॉइज के अंदर के उत्‍साह को धीरे-धीरे खत्‍म कर देता है।

 

3. फैसला लेने की आजादी

 

यह बात सही है कि इम्‍प्‍लॉयर होने के नाते आखिरी फैसला इम्‍प्‍लॉयर का ही होना चाहिए लेकिन कुछ मामलों में इम्‍प्‍लॉइज को विचार रखने और फैसला लेने की आ‍जादी दी जानी चाहिए। इससे उनका खुद पर भरोसा तो बढ़ता है ही, साथ ही इम्‍प्‍लॉयर्स को भी कुछ नए आइडियाज, कुछ अलग देखने का मौका भी मिलता है और हो सकता है कि यह उनकी कंपनी के लिए अच्‍छा हो। इसलिए इम्‍प्‍लॉयर्स को चाहिए कि वे वर्कप्‍लेस पर ऐसा वातावरण निर्मित करें, जहां इम्‍प्‍लॉइज को कुछ मामलों में फैसले लेने का हक हो।

 

 

 

4. क्रेडिट दिया जाना

 

किसी को भी हतोत्‍साहित करने के लिए इससे बड़ी कोई चीज नहीं है कि उसके काम का क्रेडिट किसी और को मिल जाए। अगर कोई इन्‍सान किसी काम में अपना वक्‍त और मेहनत दे रहा है तो यह भी जरूरी है कि उसके काम का क्रेडिट भी उसी को मिले। मेहनत करने के बावजूद क्रेडिट न मिलने पर इम्‍प्‍लॉइज के अंदर यह भावना आ जाती है कि जब क्रेडिट किसी और को ही मिलना है तो वह क्‍यों मेहनत करे। लेकिन अगर उसे उसके काम का क्रेडिट दिया जाता है, वह शाबाशी दी जाती है जिसका वह हकदार है तो वह और ज्‍यादा उत्‍साह, एनर्जी और डबल मेहनत से काम करता है। इम्‍प्‍लॉयर को चाहिए कि वह अपने इम्‍प्‍लॉइज के अच्‍छे काम की तारीफ करे और उन्‍हें मोटिवेट करे। आप अपने इम्‍प्‍लॉइज के काम से खुश हैं, यह दर्शाने का सबसे अच्‍छा तरीका है उनकी सैलरी बढ़ा दी जाए या फिर उन्‍हें बोनस या कोई गिफ्ट दिया जाए।

 

 

5. समानता

 

इम्‍प्‍लॉयर्स को अपने हर इम्‍प्‍लॉई के साथ एक सा होना चाहिए। उनमें कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए। उदाहरण के लिए ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक जैसे स्किल्‍स, क्‍वालिफिकेशन और बराबरी का काम करने वाले इम्‍प्‍लॉइज में से एक के साथ बहुत अच्‍छा व्‍यवहार किया जाए या फिर उसे ज्‍यादा सैलरी दी जाए और बाकियों को उससे कम। या फिर इम्‍प्‍लॉयर किसी एक पर आंख बंद कर भरोसा करे और उसकी कही हर बात को ही सच माने। ऐसा होने पर इम्‍प्‍लॉई का उस कंपनी से लगाव खत्‍म हो जाता है और वह किसी अन्‍य जगह जाने की तैयारी करने लगता है।

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