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35 से 50 फीसदी फायदे के लिए अस्पताल कर रहे हैं लोगों की जिंदगी से खिलवाड़

50 से 70 पर्सेंट प्राइवेट अस्पतालों के पैथलैब में यूज्ड मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है।

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नई दिल्ली।भारत में मौजूद सभी प्राइवेट अस्पताल और लैब्स अपने महंगे इलाज के लिए जाने जाते हैं लेकि अब इन लैब्स और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की जिंदगियों से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।  रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में ज्यादातर डायग्नोस्टिक लैब्स में यूज्ड मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है। एंडोस्कोपी और MRI के लिए ज्यादातर डायग्नोस्टिक लैब यूज्ड मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। डायग्नोस्टिक लैब्स की इस हरकत पर मरीज ध्यान नहीं देते और ये लैब्स कानून को दरकिनार करते हुए इनका खुलेआम इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा  हुआ है कि 50 से 70 पर्सेंट प्राइवेट अस्पतालों में यूज्ड मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है। 

 

इन यूज्ड मशीनों का इस्तेमाल पैथ लैब से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में किया जाता है। एंडोस्कोप से एमआरआई मशीनों तक यह सेकेंड हैंड मशीनें थर्ड पार्टी की ओर से ऑनलाइन बेचे जाते हैं। इसके साथ ही अनुपयुक्त मशीनों को ठीक करके उन्हें फिर से बेचा जाता है। हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस और ICIJ  (International Consortium of Investigative Journalists) ने मेडिकल बाजार का दौरा किया जहां उन्होंने पाया कि इन कोई नियामक बिक्री से पहले या बाद में इन मशीनों की जांच नहीं करता है। ऐसे में इन पुरानी मशीनों में  मरीजों की जांच करने का कोई फायदा नहीं होता।

 

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सैकेंड हैंड उपकरण 35 से 50 फीसदी सस्ते
National Accreditation Board for Testing & Calibration Laboratories (NABL) की ओर से मशीनों की गुणवत्ता को लेकर गाइडलाइंस तय की है लेकिन कोई भी लैब और अस्पताल इसे फॉलो नहीं कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारत में कुल 1 लाख डायग्नोस्टिक लैब हैं जिनमें से केवल 2 प्रतिशत ही इन गाइडलाइंस को फॉलो कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी पता चला कि नए उपकरणों के बदले ये सैकेंड हैंड उपकरण 35 से 50 फीसदी सस्ते पड़ते हैं।

 

अगली स्लाइड में पढ़ें नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने भी मानी यह बात 

कोई भी नहीं जानता 80 प्रतिशत लैब्स और अस्पतालों में क्या इस्तेमाल किया जाता है। 
 नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने माना कि लैब्स और अस्पतालों में सैकेंड हैंड उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। कोलकाता के टाटा मेडिकल सेंटर के डायरेक्टर डॉ दीपक मिश्रा ने कहा कि भारत की प्रयोगशालाओं में से केवल 20 प्रतिशत संगठित क्षेत्र में हैं और उनमें से कई सैकेंड हैंड उपकरणों का उपयोग करते हैं। कोई भी नहीं जानता कि अन्य 80 प्रतिशत क्या उपयोग कर रहे हैं। 

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