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माल्या ने कहा- मैं बैंक धोखाधड़ी का पोस्टर ब्वॉय बन गया, मोदी-जेटली को खत लिखा पर जवाब नहीं मिला

माल्‍या ने लेटर में बयां किया है कि किस तरह हालात बिगड़ते चले गए और किंगफिशर को अक्‍टूबर 2012 में बंद करना पड़ा।

details of vijay mallya letter which he had written to PM narendra modi in april 2016

 

नई दिल्‍ली. बैंकों के 9000 करोड़ रुपए के बकायदार शराब कारोबारी विजय माल्‍या ने 2 साल पहले पीएम नरेन्‍द्र मोदी और वित्‍त मंत्री अरुण जेटली को लिखे एक लेटर को सार्वजनिक कर दिया है। इस लेटर में माल्‍या ने उन्‍हें अपनी किंगफिशर एयरलाइन्‍स की वित्‍तीय स्थिति और उसके खस्‍ताहाल में पहुंचने की वजह बताई थीं। माल्‍या का कहना है कि दोनों नेताओं में से किसी ने भी उनके लेटर का जवाब नहीं दिया था और अब स्थिति यह है कि उन्‍हें बैंक डिफॉल्‍ट का पोस्‍टर बॉय बना दिया गया है।  


लेटर में माल्‍या ने कर्ज न चुका पाने की जिन वजहों का हवाला दिया था, उनमें देश का मैक्रो इकोनॉमिक इनवायरमेंट, सरकार की पॉलिसीज के साथ-साथ अन्‍य कई कारणों को जिम्‍मेदार बताया था। इनमें 2008 में आई ग्‍लोबल मंदी भी शामिल रही। माल्‍या ने लेटर में बयां किया है कि किस तरह हालात बिगड़ते चले गए और किंगफिशर को अक्‍टूबर 2012 में बंद करना पड़ा। लेटर में माल्‍या ने लिखा था कि किंगफिशर एयरलाइन्‍स का फेल होना एक स्‍वाभाविक असफलता थी। उन्‍होंने यह भी कहा कि नेताओं, सरकारी एजेंसियों और मीडिया द्वारा उन्‍हें लगातार चोर ठहराया जा रहा था। इसके चलते ऐसे हालात पैदा हुए कि उन्‍हें देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ गया। आइए आपको बताते हैं माल्‍या ने लेटर में पीएम मोदी के सामने किस तरह अपनी मजबूरियों को बयां किया था-


ये गिनाईं किंगफिशर के दिवालिया होने की वजह
1- मिस्र और लीबिया में अशांति के कारण कच्‍चे तेल के दाम तेजी से बढ़े और 60 डॉलर प्रति बैरल से सीधे 145 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचे। इससे पूरी दुनिया में एविएशन इंडस्‍ट्री को करारा झटका लगा, जिसमें किंगफिशर भी शामिल थी। 

2- भारत में राज्‍य सरकारों द्वारा एविएशन टर्बाइन फ्यूल  (एटीएफ) पर 20 से 30 फीसदी तक एड वेलोरम  सेल्‍स टैक्‍स लगा दिया गया। यह रेट बहुत ज्‍यादा था और पहले से ही कच्‍चे तेल की अंतरराष्‍ट्रीय कीमतों में बढ़ोत्‍तरी के चलते एटीएफ के दाम भी बढ़ गए थे। 

3- मैंने केन्‍द्र सरकार से कई बार ATF को डिक्‍लेयर्ड गुड्स श्रेणी में रखने की बात कही, ताकि इस पर सेल्‍स टैक्‍स घटकर 4 फीसदी रह जाए लेकिन इस पर विचार नहीं हुआ। 

4- मैंने राज्‍यों से भी निवेदन किया कि वे एटीएफ पर उच्‍च एड वेलोरम रेट के बजाय एक फ्लैट टैक्‍स वसूलें, लेकिन वहां भी कुछ नहीं हुआ। लिहाजा लगातार बढ़त सेल्‍स टैक्‍स के चलते किंगफिशर नुकसान में चली गई। 

5- भारतीय करेंसी (रुपए) की कीमत डॉलर के मुकाबले 20 फीसदी गिर गई, जिससे एयरक्राफ्ट लीज की कॉस्‍ट में उल्‍लेखनीय बढ़ोत्‍तरी होने लगी। 

6- मुंबई और नई दिल्‍ली में एयरपोर्ट चार्ज बढ़ गए, जिससे पहले से ही खस्‍ता हाल में चल रही एविएशन इंडस्‍ट्री को और झटका लगा। 

7- हमारे एयरबस एयरक्राफ्ट में इस्‍तेमाल होने वाले वी 2500 एयरक्राफ्ट इंजन में तकनीकी खराबियां आ गई, जिससे हमारे लगभग आधे एयरोप्‍लेन खड़े हो गए। 

8- 2008 में ग्‍लोबल फाइनेंशियल मार्केट में आई मंदी के चलते हमारी लाख कोशिशों के बावजूद हम विदेशी इन्‍वेस्‍टर्स से पूंजी नहीं जुटा पाए। 

9- हमने सरकार से कई बार कहा कि एविएशन इंडस्‍ट्री में एफडीआई को अनुमति दी जाए ताकि स्‍ट्रैटेजिक एयरलाइन इन्‍वेस्‍टर्स से इन्‍वेस्‍टमेंट जुटाया जा सके, लेकिन इस पर भी आगे कुछ नहीं हुआ। 

10- भारतीय एविएशन इंडस्‍ट्री के वित्‍तीय संकट से जूझने के बावजूद इंडियन एयरलाइन्‍स (एयर इंडिया) ने यात्रियों को लुभाने के लिए प्राइस वॉर छेड़ दी। इंडियन एयरलाइन्‍स को भारी नुकसान हुआ लेकिन केन्‍द्र सरकार की फंडिंग के चलते वह पब्लिक फंड का इस्‍तेमाल करते हुए प्राइवेट कंपनियों को टक्‍कर देती रही। सरकार ने उसके लिए 30,000 करोड़ रुपए का बेल आउट पैकेज मंंजूर किया था। 

11- 2005 से 2013 के बीच हमारे प्रमोटर ग्रुप यूबी ग्रुप ने बाहर से फंड जुटाने के प्रयास के तौर पर किंगफिशर एयरलाइन्‍स में 4000 करोड़ रुपए का निवेश किया था। लेकिन ग्‍लोबल मंदी के चलते यह कदम असफल हो गया और एयरलाइन फंड नहीं जुटा पाई। इसे लेकर जनवरी 2012 में हमारे लीड बैंकर SBI ने RBI को स्थिति से अवगत कराया था। उसके बाद मैंने भी तत्‍कालीन प्रधानमंत्री, वित्‍त मंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्री को कई अपील की थीं। 

 

 

बैंकों ने स्थिति जानते हुए दिया कर्ज

माल्‍या ने यह भी कहा कि सरकारी बैंकों ने जब किंगफिशर को कर्ज दिया, उस वक्‍त एयरलाइन की हालत उनके सामने स्‍पष्‍ट थी। एयरलाइन को कमर्शियल लोन देते वक्‍त उन्‍होंने कंपनी का डिटेल्‍ट असेसमेंट किया था। उसके बाद लोन दिया गया था।

 

RBI ने भी किया था आगाह

माल्‍या के मुताबिक, RBI ने किंगफिशर एयरलाइन्‍स को बैंकों द्वारा लोन दिए जाने को मंजूरी देने से पहले यह साफ तौर पर कहा था कि बैंक एयरलाइन की व्‍यावहारिक‍ता को लेकर पूरी तरह से संतुष्‍ट हों तभी लोन दें। केवल पर्सनल गांरटी जैसी चीजों के भरोसे लोन देने पर राजी न हो जाएं।

 

 

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