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सरकार के खिलाफ डाबर गई हाई कोर्ट, कहा- GST के बाद नहीं मिल रहा स्पेशल स्टेट बेनेफिट

सरकार छूट देने से मना कर रही है जिसके कारण डाबर ने केंद्र और राज्य दोनों के खिलाफ अपील की है।

Dabur appeal in court against Uttranchal govt
डाबर केंद्र और उत्तराखंड सरकार के खिलाफ कोर्ट गई है। दरअसल, बैकवर्ड एरिया में इंडस्ट्री लगाने पर इंडस्ट्री को टैक्स बेनेफिट्स मिलत है। ये छूट उन्हें केंद्र या राज्य सरकार या कई बार दोनों की तरफ से मिलते है लेकिन देश में 1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद से इंडस्ट्री को यह छूट नहीं मिल रही है। सरकार छूट देने से मना कर रही है जिसके कारण डाबर ने केंद्र और राज्य दोनों के खिलाफ अपील की है।

नई दिल्ली. डाबर ने केंद्र और उत्तराखंड सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दरअसल, बैकवर्ड एरिया में इंडस्ट्री लगाने पर इंडस्ट्री को टैक्स छूट मिलती है। यह छूट उन्हें केंद्र या राज्य सरकार या कई बार दोनों की तरफ से मिलती है लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद से इंडस्ट्री को यह छूट नहीं मिल रही है। सरकार छूट देने से मना कर रही है जिसके कारण डाबर ने केंद्र और राज्य दोनों के खिलाफ अपील की है। देश में 1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू हो गया है। 

 

डाबर गई उत्तराखंड कोर्ट

डाबर को बीते 10 साल से उत्तराखंड के गरीब एरिया में इन्वेस्ट करने पर टैक्स बेनेफिट मिल रहे थे लेकिन नए टैक्स स्ट्रक्चर जीएसटी आने के बाद दिक्क्तें आ रही है। इस पूरे मामले पर जानकारी रखने वाले अधिकारी ने moneybhaskar.com को बताया कि डाबर ने उत्तराखंड हाई कोर्ट की नैनीताल बैंच में अपील की है। उन्होंने शिकायत की है कि नए टैक्स स्ट्रक्चर जीएसटी में टैक्स बेनेफिट्स के बारे में कोई क्लियरिटी नहीं है। ऐसा करने वाली कंपनियों की लिस्ट में डाबर बड़ा नाम है। इससे पहले भी कई छोटी कंपनियां इसके खिलाफ कोर्ट जा चुकी है।

 

दोनों की तरफ से मिलती थी छूट

पुराने टैक्स स्ट्रक्चर में मैन्युफैक्चर को बैकवर्ड एरिया में इन्वेस्ट करने पर राज्य सरकार से इनडायरेक्ट टैक्स में छूट मिलती थी और कई बार केंद्र सरकार भी छूट देती थी। सरकार का मकसद ऐसे बैकवर्ड एरिया में इन्वेस्टमेंट बढ़ाना था जिसके लिए यह छूट दी जाती थी। देश की बड़ी एफएमसीजी कंपनी जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर और गोदरेज जैसी कंपनियां प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग के लिए इन एरिया से सोर्स करते हैं और कुछ ने अपने प्लांट इन एरिया में लगाएं है।

 

पुराने टैक्स स्ट्रक्चर में मिलती थी छूट

टैक्स एक्सपर्ट के मुताबिक बैकवर्ड एरिया में कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर क्रेडिट ट्रांजिशन की इजाजत जीएसटी में है लेकिन कितने इन्वेस्टमेंट पर कितना क्रेडिट इस पर कोई क्लियरिटी  नहीं है। जबकि, पुराने टैक्स स्ट्रक्चर में ऐसे एरिया में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट, आउटपुट और रॉ मैटेरियल पर भी टैक्स में छूट मिलती थी। कई मामलों में आउटपुट पर टैक्स इन्पुट टैक्स क्रेडिट के साथ सेटल हो जाता था। यहां इन्वेस्ट करने पर 10 साल का टैक्स हॉलिडे मिलता था

 

GST में क्लियरिटी नहीं होने से इंडस्ट्री परेशान

अब यह सभी टैक्स बेनेफिट्स नहीं मिलने से कंपनियों और इंडस्ट्री को परेशानी हो रही है। अब राज्य और केंद्र सरकार को यह तय करना है कि इन एरिया में किए गए इन्वेस्टमेंट को कैसे देखा जाएगा। टैक्स छूट नहीं मिलने से मैन्युफैक्चर एरिया में जाना पसंद करेंगे जहां उन्हें बेहतर सुविधा मिलेगी।

 

 

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