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स्लोडाउन से निपटने के लिए बिल्डर्स ने शुरू की बाय बैक स्कीम, इन्वेंट्री क्लीयर करने का नया तरीका

इसके तहत डेवलपर्स खाली पड़े फ्लैट या घर को निकालने के लिए कस्टमर को बाय बैक का ऑफर दे रहे हैं।

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नई दिल्ली। प्रॉपर्टी मार्केट में स्लोडाउन से    निपटने के लिए डेवलपर्स ने नया तरीका निकाला है। इसके तहत डेवलपर्स खाली पड़े फ्लैट या घर को निकालने के लिए कस्टमर को बाय बैक का ऑफर दे रहे हैं। स्कीम के तहत कस्टमर के पास आप्शन होता है कि 10-15 फीसदी रकम देकर घर में रह सकता है। यहीं नहीं उसके लोन की ईएमआई भी डेवलपर्स चुकाएगा। साथ ही जब भी कस्टमर चाहे घर रिटर्न भी कर सकेगा और उसके द्वारा शुरूआत में दी गई रकम भी वापस कर दी जाएगी।

 

 

बिल्डर्स दे रहे हैं बायबैक स्कीम

 

 

प्रॉपर्टी कन्सल्टेंट फर्म जेएलएल के अधिकारी ने बताया moneybhaskar.com को बताया कि बिल्डर्स बायर्स को प्रॉपर्टी का 10 से 15 फीसदी कीमत  चुकाने के बाद 2 साल के लिए घर  दे रहे हैं। 2 साल बाद बायर अगर प्रॉपर्टी खरीदना चाहता है तो पूरा पैसा देकर खरीद सकता है। उसे तब भी मार्केट प्राइस की जगह डील के समय तय प्रॉपर्टी प्राइस चुकाना होगा। अगर बायर प्रॉपर्टी नहीं खरीदना चाहता तो उसे उसका पहले चुकाया 10 से 15 फीसदी वापस मिल जाएगा।

 

 

ये है खेल

 

 

नॉर्थ दिल्ली के बिल्डर विकास बावेजा ने moneybhaskar.com को बताया कि बायर के नाम पर बैंक से लोन लेगा और उसकी ईएमआई भी बिल्डर चुकाएगा। इसमें बिल्डर को यह फायदा है कि उसे बायर्स के नाम पर कम इंटरेस्ट पर होम लोन मिल जाएगा क्योंकि अगर वह बिल्डर के नाम पर लोन लेगा तो उसे कमर्शियल यानी ज्यादा इंटरेस्ट पर लोन मिलेगा। इसलिए वह बायर्स को प्रॉपर्टी दे रहे हैं ताकि उनके नाम पर बैंक से लोन ले सके।

 

 

बिल्डर्स क्यों कर रहे हैं ऐसा

 

 

प्रॉपर्टी मार्केट में स्लोडाउन और वर्किंग कैपिटल की कमी है। 99 एकड़ डॉट कॉम के अधिकारी ने moneybhaskar.com को बताया कि बिल्डर्स का पुराना स्टॉक यानी पहले से बने घर तेजी से नहीं बिक रहे हैं। उनके पास कैश नहीं आ रहा है जिसके कारण वह अपने पेंडिंग प्रोजेक्ट को पूरा कर सके। बैंक का लेंडिंग रेट बहुत ज्यादा है और पहले से ही वर्किंग कैपिटल की कमी झेल रहे बिल्डर्स कम इंटरेस्ट पर लोन लेने का यह तरीका आजमा रहे हैं। ताकि उन्हें सस्ती वर्किंग कैपिटल मिल सके।

 

आगे पढ़े - कहां हो रहा है ऐसा..

 

 

 

कहां हो रहा है ऐसा

 

 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसा गुड़गांव, दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में अनसोल्ड इन्वेंटरी पर ज्यादा हो रहा है जहां बिल्डर को अपनी पेंडिंग पड़ी प्रॉपर्टी को बनाने के लिए पैसा चाहिए। इस स्कीम में बिल्डर और बायर दोनों को फायदा हो रहा है।

 

 

क्या ये सही है?

 

 

सरकार ने बिल्डर्स की बहुत सारी स्कीम को पॉन्जी स्कीम के दायरे में लेकर आई है। लेकिन इस स्कीम में बायर को 10 से 15 फीसदी चुकाने के बाद घर मिल जाएगा और बाकी उसे दो साल बाद चुकाना होगा। एक्सपर्ट के मुताबिक घऱ खरीदार ऐसी स्कीम ले सकते हैं लेकिन बिल्डर्स के साथ डॉक्युमेंट चेक करना न भूलें।

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