कायदा-कानून समझ कर ही मकान खरीदें या बुक करें, डेवलपर्स नहीं कर पाएंगे धोखाधड़ी

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अपना घर हर एक इंसान का सपना होता है। हर कोई चाहता है कि वह अपने घर में सुकून से रहे। ऐसे में, यदि आप नया मकान लेने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इस खबर के जरिए आपको कुछ चीजों को जानने का मौका मिलेगा और आप घर खरीदते समय डेवलपर्स की धोखाधड़ी से बच सकते हैं। अक्सर देखा जाता है कि जो लोग पहली बार घर खरीदते हैं डेवलपर्स उन्हें आसानी से बेवकूफ बना लेते हैं। लेकिन अब आप आसानी से धोखाधड़ी से बच सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक बार रेरा के तहत पंजीकृत होने के बाद डेवलपर अपनी इच्छा से कोई बदलाव नहीं कर सकता। इसके लिए खरीदार की सहमति अनिवार्य है। बता दें कि केंद्र सरकार ने डेढ़ साल पहले सभी राज्य सरकारों को रेरा कानून लागू करने की बात कही थी। ऐसे बहुत से लोग है जिन्हें रेरा कानून के मामूली से नियम भी नहीं पता है। जिनसे उन्हें काफी फायदा मिल सकता है। रेरा कानून बनने के बाद भी की ऐसे लोग होते हैं जो डेवलपर्स से संपर्क करते हैं।

Money Bhaskar

Dec 02,2018 06:01:00 PM IST

नई दिल्ली। अपना घर हर एक इंसान का सपना होता है। हर कोई चाहता है कि वह अपने घर में सुकून से रहे। ऐसे में, यदि आप नया मकान लेने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इस खबर के जरिए आपको कुछ चीजों को जानने का मौका मिलेगा और आप घर खरीदते समय डेवलपर्स की धोखाधड़ी से बच सकते हैं। अक्सर देखा जाता है कि जो लोग पहली बार घर खरीदते हैं डेवलपर्स उन्हें आसानी से बेवकूफ बना लेते हैं। लेकिन अब आप आसानी से धोखाधड़ी से बच सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक बार रेरा के तहत पंजीकृत होने के बाद डेवलपर अपनी इच्छा से कोई बदलाव नहीं कर सकता। इसके लिए खरीदार की सहमति अनिवार्य है। बता दें कि केंद्र सरकार ने डेढ़ साल पहले सभी राज्य सरकारों को रेरा कानून लागू करने की बात कही थी। ऐसे बहुत से लोग है जिन्हें रेरा कानून के मामूली से नियम भी नहीं पता है। जिनसे उन्हें काफी फायदा मिल सकता है। रेरा कानून बनने के बाद भी की ऐसे लोग होते हैं जो डेवलपर्स से संपर्क करते हैं।

जान लें यह बात

अपने अधिकारों के बारे में न जानना महंगा पड़ सकता है। कई ऐसे मामले हैं जहां न्यायालय ने जागरूकता न होने के कारण ग्राहकों को फटकार लगाई है। घर खरीदने वाले ग्राहकों को यह बात भी जानना जरूरी है कि प्रोजेक्ट में 50 प्रतिशत से अधिक मकान बिक जाने पर डेवलपर को हाउसिंग सोसायटी बनाना जरूरी है। घर खरीदने से पहले ग्राहकों के लिए जरूरी है कि डेवलपर के साथ एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करते समय ध्यान दिया जाए कि , वह राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए रेरा के मसौदे पर आधारित हो।

अगली स्लाइड में पढ़ें ग्राहकों को किन बातों का पता होना है

डेवलपर ने निर्माणाधीन परियोजना को महारेरा में पंजीकृत नहीं कराया
हाल ही में उपभोक्ता संगठन मुंबई ग्राहक पंचायत ने महाराष्ट्र में मकान खरीदने वाले लोगों के बीच एक ऑनलाइन सर्वेक्षण करवाया था। जिसमें पाया गया कि 707 मकान खरीदारों में 374 ने बताया कि डेवलपर ने निर्माणाधीन परियोजना को महारेरा में पंजीकृत नहीं कराया है। जबकि 35 प्रतिशत लोग लोग तो ऐसे हैं जिन्हें यह भी नहीं पता था कि इस तरह के किसी पंजीकरण की जरूरत भी होती है। आपको बता दें कि किसी भी निर्माणाधीन परियोजना का पंजीकरण ना करवाना अपराध है जिसके लिए डेवलपर को दंड भी दिया जा सकता है। 

अगली स्लाइड में पढ़ें ग्राहकों को किन बातों का पता होना जरूरी है

डेवलपर पर लगाया जा सकता है जुर्माना
वहीं ग्राहकों को यह भी नहीं पता कि बिल्डर बिक्री एग्रीमेंट के बिना किसी भी फ्लैट की कीमत का 10 प्रतिशत से ज्यादा का हिस्सा नहीं ले सकता। ऐसा करने से डेवलपर को 5 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।इसके साथ ही अगर डेवलपर कोई भी बदलाव कर रहा है तो पहले से मकान खरीद चुके लोगों में से दो-तिहाई की लिखित मंजूरी आवश्यक है। ऐसा नहीं हुआ तो डेवलपर कोई बदलाव नहीं कर सकता।  

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