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मोदी राज में इन कॉरपोरेट ने किए फ्रॉड, बैंकों को लगा हजारों करोड़ का चूना

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में फ्रॉड का मामला सामने आने के बाद सरकार, कॉरपोरेट वर्ल्‍ड और बैंक सभी सकते में हैं...

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नई दिल्‍ली। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में फ्रॉड का मामला सामने आने के बाद सरकार, कॉरपोरेट वर्ल्‍ड और बैंक सभी सकते में हैं। मुंबई की एक ही ब्रांच की ओर से की गई 11,330 करोड़ रुपए की धांधली की खबर सामने आने के बाद ईडी ने जगह जगह छापेमोरी शुरू कर दी है। अभी तक इस मामले में करीब 10 लाखों को सस्‍पेंड किया जा चुका है। आरोप है कि ये लोग कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्डर को फायदा पहुंचा रहे थे। जिन लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा था, उसमें से ज्‍यादातर लोग कॉरपोरेट वर्ल्‍ड से जुड़े हुए हैं। 

 

मोदी राज में नहीं है यह पहला मामला 
हाल में लगातर कॉरपोरेट फ्रॉड के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2014 में मोदी सरकार के सत्‍ता में आने कें बाद ही देश में अब तक कॉरपोरेट फ्रॉड के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसमें दो मामले तो बीते एक सप्‍ताह के भीतर ही आए हैं। ये ऐसे फ्रॉड रहे, जिनके चलते बैंकों को हाजारों करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। आइए जानते हैं मोदी राज में सामने आने वाले इन्‍हीं कॉरपोरेट फ्रॉड के बारे में... 


 

 

 

 

नंबर-1 
पीएनबी में 11,330 करोड़ का घोटाला 

यह सबसे ताजा मामला है। इसके तार डायमंड कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल मेहुल चौकसी के बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन दोनों ने पीएनबी अधिकारियों के साथ मिलकर 11,330 करोड़ रुपए का फ्रॉड किया है। इन लोगों ने फर्जी खातों से बैंक की गारंटी ली और इसके आधार पर लोन ले लिया। बाद में इस लोन को चुकाया भी नहीं गया।  
 

 

नंबर-2 
सिंह बदर्स का 500 करोड़ का फ्रॉड 

यह मामला देश की दूसरी सबसे बड़ी हॉस्पिटल चेन फोर्टिस से जुड़ा है। फोर्टिस के फाउंडर और प्रमोटर शिविंदर सिंह और मलविंदर सिंह ने कंपनी के खातों से करीब 500 करोड़ रुपए निकाल लिए। हाल में एक अन्‍य कंपनी के साथ इसकी मर्जर डील के लिए हुई छानबीन के बाद यह मामला समाने आया। हालांकि सिंह बदर्स अब फोर्टिस के बोर्ड से बाहर हो चुके हैं। 


 

नंबर-3 
विजय माल्‍या ब्रिटेन भागा 
मोदी राज में सबसे बड़ा कॉरपोरेट फ्रॉड विजय माल्‍या का रहा। बैंकों का करीब 9 हजार करोड़ रुपए बकाया नहीं चुकाने के बाद विजय माल्‍या भारत से लंदन भाग गया। कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया किया गया कि माल्‍या को बैंकों ने गलत तरीके से लोन बांटा था। अदालत को ओर से विलफुल डिफाल्‍टर घोषित किए जाने के बाद माल्‍या देश से फरार हुआ। भारत सकार माल्‍या के प्रत्‍यर्पण के लिए ब्रिटिश अदालत में अर्जी दे चुकी है।  

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