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एयरलाइन कंपनियों के Inside सीक्रेट्स, इमरजेंसी में पायलट खुद गिरा देते हैं फ्यूल

हवाई यात्रा के ऐसे सीक्रेट्स जो पैसेंजर्स को पता नहीं होते हैं

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नई दिल्ली। हवाई यात्रा करना हमेशा से एक रोमांच भरा सफर होता है। इसे दुनिया के सबसे सुरक्षित सफर में से एक माना जाता है। ऐसा टेक्नोलॉजी और इमरजेंसी सिचुएशन में पायलट की सूझबूझ से होता है। टेक्नोलॉजी लेवल पर और हवाई यात्रा के दौरान ऐसे कई काम किए जाते हैं, जो एयरलाइन कंपनियां आपको कभी नहीं बताती है। आज हम आपको उनकी उसी इनसाइड स्टोरी के बारे में बता रहे हैं, जो एक एयरलाइन कंपनी में काम करने वाले इंजीनियर ने खुद शेयर की।

 

फ्यूल खुद गिरा देते हैं पायलट

किसी भी प्लेन को टेकऑफ और लैंड करने के लिए अलग-अलग वजन की जरूरत होती है। खास तौर से टेक ऑफ के समय हमेशा ज्यादा वजन होता है, जबकि लैंडिंग के समय प्लेन का वजन कम होता है। इसे फ्यूल के जरिए मैनेज किया जाता है। यात्रा के दौरान फ्यूल खपत होने के समय लैंडिंग करते वक्त प्लेन का वजन कम होता है। लेकिन इमरजेंसी लैंडिंग के समय जब प्लेन का फ्यूल नहीं खर्च होता है, तो ऐसे सिचुएशन में पायलट खुद ही प्लेन के फ्यूल को समुद्र या आसमान में काफी ऊंचाई पर ले जाकर गिरा देते हैं। इससे प्लेन का वजन कम हो जाता है और इमरजेंसी लैंडिंग आसान हो जाती है।

 

आगे पढ़ें - किन सिग्नल को न करें इग्नोर

मौसम खराब होने को न करें इग्नोर

कई बार हवाई यात्रा के दौरान एयरहोस्टेस मौसम खराब होने का अनाउंसमेंट करती हैं, जिसे पैसेंजर इग्नोर करते हैं। लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। वह इसलिए है कि ऐसी सिचुएशन में ज्यादातर प्लेन के बाहर एयर प्रेशर कम हो जाता है। इस वजह से प्लेन काफी तेजी से नीचे आता है। ऐसी सिचुएशन में कभी भी प्लेन की सीट से नहीं उठना चाहिए, साथ ही सीट बेल्ट जरूर बांधनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होगा, तो रिएक्शन की वजह से आप सीट पर से काफी तेजी से उछल सकते हैं।

 

 

ऑटो मोड में भी प्लेन रहता है सेफ

हवाई सफर के दौरान ऊंचाई पर प्लेन कई बार ऑटो मेड में रहता है। यानी उस समय प्लेन को पायलट नहीं उड़ा रहा होता है। इस स्थिति में अगर कोई इमरजेंसी आती है, तो भी प्लेन सेफ रहता है। खास तौर पर यह सेफ्टी तब काम आती है, जब एक ही ऊंचाई पर दो प्लेन आमने-सामने आ जाएं। इस स्थिति में प्लेन के नोज काम आते हैं, जो 4000 फुट की दूरी में आने पर खुद ही प्लेन अपना रूट चेंज कर लेता है। इससे एक्सीडेंट का खतरा दूर हो जाता है। यह स्टैण्डर्ड प्लेन के हिसाब से अलग भी हो सकता है।

 

आगे पढ़ें - चिड़िया से क्यूं होता है प्लेन को खतरा..

 

प्लेन को चिड़िया से सबसे ज्यादा खतरा

किसी भी बड़े प्लेन में दो इंजन होते हैं। इंजन का काम होता है कि वह हवा को खींचकर, करीब तीन गुना स्पीड से उसे पीछे छोड़े। ऐसा होने पर प्लेन को उड़ने में मदद मिलती है। प्लेन के इंजन को सबसे ज्यादा खतरा आसामान में उड़ने वाली किसी चिड़िया से होता है। ऐसा इसलिए है कि अगर किसी भी तरह उडान के समय इंजन को वह हिट करती है, तो इंजन खराब हो जाता है। ऐसी सिचुएशन में आग लगने जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है।

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