विज्ञापन
Home » Industry » CompaniesAir India does not have money to repair planes

बेकार खड़े 15 विमानों की मरम्मत के लिए एयर इंडिया के पास पैसे नहीं, सालाना 5000 करोड़ रुपए का घाटा

यह विमान देश के विभिन्न हवाई अड्‌डों पर बेकार खड़े हैं।

1 of

नई दिल्ली। भारी घाटे से जूझ रही देश की सरकारी विमानन कंपनी इस समय वित्तीय संकट से जूझ रही है। आलम यह है कि कंपनी के पास विमानों की मरम्मत कराने के लिए भी पैसे नहीं हैं। मरम्मत नहीं होने के कारण कंपनी ने 15 विमानों को परिचालन से बाहर कर दिया है। यह विमान देश के विभिन्न हवाई अड्‌डों पर बेकार खड़े हैं। परिचालन नहीं होने के कारण जहां इन विमानों से कमाई नहीं हो रही है, वहीं इनको खड़ा करने के लिए कंपनी को शुल्क भी अदा करना पड़ रहा है।

 

एयर इंडिया के पास हैं 123 विमान
नागरिक विमानन मंत्रालय के अनुसार, एयर इंडिया के पास इस समय कुल 123 विमान हैं। इसमें 4 बी-747, 18, बी-777, 27 बी-787, 22 ए-319, 32 ए-320 और 20 ए-321 विमान हैं। इसमें से 15 विमान मरम्मत के अभाव में बेकार खड़े हैं। मंत्रालय के अनुसार इनमें 5 बोइंग (2 बी-787 और 3 बी-777) और 10 एयरबस (5 ए-319 और 5 ए-320) विमान शामिल हैं। बेकार होने का कारण एयर इंडिया ने इन विमानों को परिचालन से बाहर कर दिया है। परिचालन न होने के कारण इन विमानों से कंपनी को कोई कमाई नहीं हो रही है। इसके उलट इन विमानों को हवाई अड्‌डों पर खड़ा करने के लिए कंपनी को शुल्क देना पड़ रहा है।

 

विमानों की कमी के कारण कई मार्गों पर उड़ानों की संख्या घटी
वित्तीय संकट से जूझ रही एयर इंडिया अपने विमानों की मरम्मत नहीं करा पा रही है। इस कारण 15 विमान परिचालन से बाहर हैं। इससे एयर इंडिया के बेड़े में विमानों की कमी हो गई है। बेड़े में विमानों की कमी होने के कारण कंपनी को कई मार्गों पर अपनी उड़ानों की संख्या में भी कमी करनी पड़ रही है। उड़ानों की संख्या में कमी होने और कभी-कभी अचानक उड़ान निरस्त होने के कारण एयर इंडिया को यात्रियों के गुस्से का शिकार भी होना पड़ रहा है।

 

अगली स्लाइड में पढ़ें एयर इंडिया को हर साल हो रहा है घाटा

एयर इंडिया को हर साल 5000 करोड़ रुपए का घाटा
देश की एकमात्र सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया का 2007 में इंडियन एयरलाइंस में विलय किया गया था। तभी से यह कंपनी लगातार घाटे में चल रही है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एयर इंडिया को हर साल करीब 5000 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है। इस प्रकार 2007 से अब तक कंपनी को 47,152 करोड़ रुपए का संचित घाटा हो चुका है। इसके अलावा कंपनी पर विदेशी बैंकों के कंसोर्टियम का करीब 20,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। यह कर्ज बीते कुछ वर्षों में नए विमान खरीदने के लिए लिया गया था। इसके अलावा कंपनी पर 18 भारतीय बैंकों के कंसोर्टियम का करीब 32,000 करोड़ रुपए का कार्यशील पूंजीगत कर्ज है। इस कर्ज की एवज में कंपनी हर साल करीब 6,500 करोड़ रुपए का ब्याज चुकाती है। 

 

अगली स्लाइड में पढ़ें और

सरकार को नहीं मिल रहा खरीदार
एयर इंडिया को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार विनिवेश की योजना भी बनाई। इसके लिए दो बार टेंडर भी निकाले गए। लेकिन सरकार को इन प्रयासों के बाद कोई भी खरीदार नहीं मिला। अंत में सरकार ने अपने ही प्रयासों से इस कंपनी के हालात सुधारने का बीड़ा उठाया है। नीति आयोग भी सरकार को एयर इंडिया को बेचने से पहले इसकी माली हालत सुधारने की सिफारिश कर चुका है। इसी साल अगस्त में केंद्रीय नागरिक उड्‌डयन मंत्री सुरेश प्रभु भी एक इंटरव्यू में मान चुके हैं कि एयर इंडिया के कर्ज को कोई नहीं संभाल सकता है। 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
विज्ञापन
विज्ञापन
Don't Miss