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कंपनी आपके काम करने के लिए ठीक है या नहीं, इन 8 तरीकों से करें चेक

अगर ऑफिस इनवायरमेंट अच्‍छा नहीं है तो आपका काम तो प्रभावित होता ही है आपकी मेहनत और टैलेंट के साथ भी न्‍याय नहीं हो पाता

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नई दिल्‍ली. नौकरी करना या पैसा कमाना हर किसी की जरूरत है। ऐसे में अगर हमें एक अच्‍छी कंपनी, एक अच्‍छे ऑफिस कल्‍चर में काम करने का मौका मिलता है तो हम काफी अच्‍छा परफॉर्म करते हैं। हम अपने काम को अपना बेस्‍ट दे पाते हैं, जिससे कंपनी को भी फायदा पहुंचता है। अगर ऑफिस का इनवायरमेंट अच्‍छा नहीं है तो आपका काम तो प्रभावित होता ही है आपकी मेहनत और आपके टैलेंट के साथ भी न्‍याय नहीं हो पाता। 

 

अक्‍सर हम खराब माहौल में भी काम करते रहते हैं, जबकि हमें पता होता है कि अब हालात सुधरने की गुंजाइश नहीं है। ऐसा करना हमारे करियर और स्किल के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इससे हमारी क्रिएटिविटी और क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए अच्‍छा है कि हम अपनी कंपनी का आकलन करें कि वह हमारे काम करने के लिए ठीक है या नहीं। बिजनेस वेबसाइट इंक डॉट कॉम की एक रिपोर्ट में ऐसे ही तरीकों का जिक्र है, जिनसे आप अपनी कंपनी को परख सकते हैं। 

 

आगे पढ़ें- क्‍या है पहला तरीका 

1. आपका टीम लीडर करे केवल अपनी परवाह

अगर आपका मैनेजर या टीम लीडर केवल अपनी परवाह करता है, वह केवल अपनी जरूरतों और हितों को ध्‍यान में रखते हुए काम करे तो आप समझ जाएं कि उसकी दुनिया केवल उस तक ही सीमित है। ऐसे टीम लीडर्स को अपनी टीम मेंबर की कोई परवाह नहीं होती न ही वह उनकी ग्रोथ के लिए कुछ करता है। इसलिए आपको समझ जाना चाहिए कि इस मैनेजर की टीम में रहकर आपका कोई भला नहीं होने वाला। 

 

आगे पढ़ें- दूसरे तरीके के बारे में 

2. इंप्‍लॉइज हों मैनेजर के हाथ की कठपुतली 

अगर आपकी कंपनी में इंप्‍लॉइज, टीम लीडर के हाथ की कठपुतली बन कर रह गए हैं यानी हर परिस्थिति में मैनेजर ही उन पर पूरा कंट्रोल किए रहता है तो संभल जाएं। यह सच है कि टीम लीडर के हाथ में कंट्रोल होना चाहिए लेकिन हर बार वह अपनी ही चलाए, यह ठीक नहीं है। कुछ जगहों पर फैसला इंप्‍लॉइज को लेने का हक होना चाहिए। अगर मैनेजर वह स्‍पेस नहीं देता है तो इससे कंपनी में ग्रुप डिस्‍कशन या आइडिया रखने जैसी किसी भी चीज के लिए जगह नहीं होती। 

 

आगे पढ़ें- तीसरा तरीका 

3. साथी इंप्‍लॉइज का व्‍यवहार हो आपके खिलाफ

ऑफिस में कई इंप्‍लॉइज ऐसे होते हैं, जो पीठ पीछे आपकी बुराई और आपके खिलाफ गुटबंदी करते हैं। अगर ऐसे लोग आपकी ही टीम है तो यह नुकसानदायक हो सकता है। प्रतिस्‍पर्धा होना अच्‍छी बात है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप किसी के खिलाफ ऑफिस में पॉलिटिक्‍स करने लगें। कई बार आपके अच्‍छे काम या आपके टैलेंट को देखकर लोग ईर्ष्‍या में गुटबंदी करने लगते हैं, आपको नीचा दिखाने और फंसाने की फिराक में रहते हैं। 

 

आगे पढ़ें- चौथा तरीका 

4. इन्‍सान नहीं मशीन की तरह कराया जाए काम

इन्‍सान भले ही रोजी-रोटी कमाने के लिए नौकरी करता है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कंपनी उससे मशीन की तरह काम ले। अगर किसी कंपनी में काम के घंटे हफ्ते में 50 घंटों से ज्‍यादा हैं, छुट्टियां न के बराबर हैं, काम से जुड़ी कम्‍युनिकेशन के लिए 24 घंटे अलर्ट रहना पड़े और इसकी वजह से व्‍यक्तिगत या पारिवारिक जिन्‍दगी के लिए समय नहीं निकल पाए तो ऐसी कंपनी केवल मशीनों के काम करने के लिए अच्‍छी है। 

 

आगे पढ़ें- 5वां तरीका 

5. ऑफिस में हों चोरी, फ्रॉड जैसी घटनाएं

अगर किसी कंपनी में इंप्‍लॉइज की चीजें चोरी होने या लोगों के साथ फ्रॉड किए जाने की खबरें हों तो ऐसी कंपनी से दूर रहना ही अच्‍छा है। ऐसी कंपनी में काम करने वाले इन्‍सान का सारा ध्‍यान काम से ज्‍यादा अलर्ट रहने पर होता है, ऐसे में उनकी प्रॉडक्टिविटी घट जाती है। इंप्‍लॉई हर वक्‍त टेंशन के साथ काम करता है। इसलिए ऐसी कंपनी में जॉब करने से बचने की कोशिश करें। 

 

आगे पढ़ें- 6वां तरीका 

6. इंप्‍लॉइज रहते हों बीमार या हरदम स्‍ट्रेस में 

सालों की रिसर्च से सामने आया है कि इंप्‍लॉइज पर काम का बहुत ज्‍यादा बोझ और टेंशन उनके फोकस और प्रॉडक्टिविटी को घटा देती है। सेहत पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। कई रिसर्च में यह भी सामने आया है कि आपके आस-पास के लोगों की संगत भी आपको प्रभावित करती है, उदाहरण के तौर पर अगर आपका कोई साथी बहुत ज्‍यादा खाता है तो आप भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होते हैं, या फिर कोई नकारात्‍मक विचारों वाला व्‍यक्ति है तो आपके अंदर भी नकारात्‍मकता बढ़ने लगती है। इसलिए ऐसी जगह काम करने के लिहाज से उचित नहीं होती है। 

 

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