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6 गुरुमंत्र जिसने मुकेश अंबानी को बनाया देश का सबसे अमीर आदमी, 4,180 करोड़ डॉलर है नेटवर्थ

मुकेश अंबानी के टीचर जिनके गुरुमंत्र से वह बने देश के सबसे रईस बिजनेसमैन

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नई दिल्ली. देश के सबसे अमीर आदमी मुकेश अंबानी की सफलता के पीछे उनके पिता धीरुभाई अंबानी के अलावा उनके टीचर्स का भी हाथ है। धीरूभाई के सिखाए कारोबारी गुर और स्कूल-कॉलेज के प्रोफेसर ने आउट ऑफ द बॉक्स सोचने के आइडिया ने मुकेश अंबानी को देश का सबसे अमीर करोबारी बनने में मदद की है। टीचर्स डे स्पेशल स्टोरी में आपको बता रहे हैं कि मुकेश अंबानी को यहां तक लाने में किनका और किन गुरुमंत्र का हाथ रहा है।

 

मुकेश अंबानी की लाइफ में इन टीचर का है हाथ

 

मुकेश अंबानी ने मीडिया में दिए अपने इंटरव्यू में बताया था कि 60 के दशक में उनके पिता धीरूभाई अंबानी ने न्यूजपेपर में टीचर के लिए विज्ञापन छपवाया लेकिन ये साफ कर दिया की टीचर की जिम्मेदारी अकेडमिक की नहीं होगी। धीरूभाई ने महेंद्रभाई व्यास को चुना जो मुकेश अंबानी को जनरल नॉलेज की जानकारी देते थे। वह उन्हें शाम को घर पर पढ़ाने आते थे। वह तब हॉकी, फुटबॉल जैसे अलग-अलग खेलने के अलावा देखते भी थे। वह बस से लेकर ट्रेन में सफर करते थे। वह गांवों में 10 से 15 दिन बिताते थे। इन अनुभवों ने उनको लाइफ एक्सपीरियंस सीखने में मदद मिली है।

 

प्रोफेसर्स ने सिखाया आउट ऑफ द बॉक्स सोचना

 

नोबेल लॉरेट, बिल शॉर्प और एम एम शर्मा जैसे फाइनेंशियल इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर का मुकेश अंबानी की लाइफ पर काफी असर पड़ा। इन प्रोफेसर की वजह से वह आउट ऑफ द बॉक्स सोच पाए। प्रोफेसर एमएम शर्मा का पहला लेक्चर था कि केमिकल बिजनेस से कैसे पैसे बनाए जाएं। बिल शार्पे ने पूछा कि आप इस वर्ल्ड में कैसे बदलेंगे।

 

आगे पढ़ें – पिता से कौनसे मिले कारोबारी गुर

धीरूभाई अंबानी से मिले एन्टरप्रेन्योरशीप के गुर

 

हाई स्कूल के दौरान ही मुकेश अंबानी वीकेंड में सबसे ज्यादा समय ऑफिस में बिताते थे। वहां उनके पिता ने कारोबार और एन्टरप्रेन्योरशीप के गुर सीखाए।

 

कारोबार में आइडिया होता है सुप्रीम

 

रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी अपने पिता धीरूभाई अंबानी की ये बात हमेशा याद रही है कि यह वर्ल्ड सिर्फ आइडिया के दम पर भी आगे बढ़ता है। पहले सिर्फ सरकारें समाज में बदलाव लाती थीं, फिर कारोबारियों ने बदलाव शुरू किया और अब यह काम स्‍टार्टअप कर रहे हैं। यानी एक छोटा आइडिया भी आपकी डेली रूटीन लाइफ से लेकर दुनिया को बदलने का माद्दा रखता है।

 

हमेशा सीखते रहो

 

धीरूभाई अंबानी ने कहा था कि रिलायंस की उम्र हमेशा 30 रखना। यानी, अपने अंदर हमेशा सीखने की भूख को डेवलप करते रहना। यानी 30 तक की उम्र ऐसी होती है जब आपके अंदर हमेशा सीखते रहने की सोच बनी रहती है। मुकेश अबांनी ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि जब उन्होंने कंपनी ज्वाइन की थी तब रिलायंस कंपनी 18 करोड़ रुपए की थी। पहले ही साल में 1.8 करोड़ रुपए का आईपीओ लेकर आए थे। अब उन्हें कारोबार में 40 साल से अधिक हो गया है। उन्होंने हमेशा सीखते रहने के जज्बे को अपने अंदर जिंदा रखा है।

 

आगे पढ़ें – पिता से कौनसे मिले कारोबारी गुर

नेक्स्ट जनरेशन के साथ कनेक्ट रहो

 

मुकेश अंबानी के मुताबिक उन्होंने अपने पिता से काफी कुछ सीखा है। मुकेश अंबानी ने बताया कि उनके पिता उन्हें पार्टनर की तरह ट्रीट करते थे। जब मुकेश अंबानी 14 साल के थे, तब धीरूभाई अंबानी ने उन्हें कहा था कि वह अंडर ट्रेनिंग नहीं है, बल्कि उनके पार्टनर हैं और ये कंपनी उनकी जिम्मेदारी है।

 

मुकेश अंबानी ने अपने बच्चों ईशा और आकाश अंबानी के साथ भी कारोबार में ट्रेनी की जगह पार्टनर वाला ही रिश्ता रखा है। पार्टनरशिप वाले रिश्ते के अच्छे रिजल्ट उन्हें अपने कारोबार के नए वेंचर में भी नजर आया है।

 

कारोबार में हिस्ट्री बनाते रहो

 

आप अपनी जिदंगी में ऐसे काम करें कि लोग आपके जाने के बाद भी आपके किए गए काम को याद रखें। अपना एटीट्यूट अच्छा रखें और नेगेटिविटी न लाएं। जैसे अगर ‘इसने काम किया है , अच्छा नहीं किया होगा।’ कारोबार में पॉजिटिविटी के साथ काम करते रहे।

 

कारोबार में कस्टमर होता है बॉस

 

कारोबार में कस्टमर हमेशा बॉस होता है। कभी भी कारोबार में ऐसा मत करो कि कस्टमर को नुकसान उठाना पड़े या उसे परेशानी हो। मुकेश अंबानीको धीरूभाई अंबानी की ये सीख हमेशा याद रही है कि कस्टमर के हित का ध्यान पहले रखना है।

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