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क्‍या है रोटोमैक का 800 करोड़ का डिफॉल्‍ट मामला? 10 प्‍वाइंट में समझें

आइए 10 प्‍वाइंट में समझते हैं रोटोमैक का 800 करोड़ का डिफॉल्‍ट केस

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नई दिल्‍ली. नीरव मोदी के पीएनबी घोटाले की जांच अभी चल ही रही है कि इस बीच रोटोमैक पेन के मालिक विक्रम कोठारी का 800 करोड़ रुपए के लोन डिफॉल्‍ट का मामला सामने आ गया। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने सोमवार को कोठारी के कानपुर स्थित घर समेत तीन ठिकानों पर छापेमारी की और उनकी पत्‍नी और बेटे से पूछताछ की। आइए 10 प्‍वाइंट में समझते हैं रोटोमैक का डिफॉल्‍ट केस 

 

1.  कानपुर की रोटोमैक कंपनी ने पांच सरकारी बैंकों - इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूनियन बैंक से 800 करोड़ रुपए से ज्‍यादा लोन लिया। ऐसा माना जाता है कि इन बैंकों ने शर्तों से समझौता कर लोन मंजूर कर लिया था। विक्रम कोठारी रोटोमैक के प्रमोटर हैं। 

 

2. कोठारी ने 485 करोड़ का लोन मुंबई के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और 352 करोड़ का लोन कोलकाता के इलाहाबाद बैंक से हासिल किया था। एक साल बाद भी रोटोमैक कंपनी ने इन बैंकों का कथित तौर पर न लोन की रकम लौटाई और न ही ब्याज दिया। 

 

3. कोठारी की तरफ से लोन का रिपेमेंट नहीं करने के पर आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार एक कमिटी गठित की गई। कमिटी ने 27 फरवरी 2017 को रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड को विलफुल डिफॉल्टर (जानबूझकर कर्ज नहीं चुकानेवाला) घोषित कर दिया। बैंक ऑफ बड़ौदा की पहल पर कंपनी को विलफुल डिफॉल्‍टर घोषित किया गया। 

 

4. कंपनी रोटोमैक ने विलफुल डिफॉल्‍टर की लिस्‍ट से अपना नाम हटवाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की। कंपनी ने अपनी पिटीशन में दलील दी कि रोटोमैक द्वारा डिफॉल्‍ट की तारीख के बाद से इस बैंक को 300 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की एसेट की पेशकश किए जाने के बावजूद बैंक ऑफ बड़ौदा ने उसे विलफुल डिफॉल्‍टर घोषित कर दिया। 13 अप्रैल 2017 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड को उसकी उन संपत्तियों या किस्तों का ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया, जिनका बैंक ऑफ बड़ौदा को भुगतान किया गया है। 

 

5. बैंक की ओर से कोर्ट में कहा गया कि कंपनी को अपने बकाए का निपटान करने के लिए 550 करोड़ रुपए का भुगतान करना है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि कंपनी के निदेशक लोन रीपेमेंट से बचने के लिए दूसरी कंपनियों में पैसा लगा रहे हैं। 

 

6. कानपुर में माल रोड के सिटी सेंटर स्थित रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के ऑफिस पर पिछले कई दिनों से ताला जड़ा मिला तो विक्रम कोठारी के देश से भागने की खबरें आने लगीं। 

 

7. कोठारी ने शुक्रवार को वीडियो जारी कर कहा, ''मैं देश छोड़कर कहीं नहीं भागा हूं। बैंकों से लोन लिया है लेकिन ये सही नहीं है कि मैंने लोन चुकता नहीं किया। बैंकों के साथ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में केस चल रहा है। जल्द ही फैसला आएगा। 'बैंकों ने मेरी कंपनी को नॉन परफॉर्मर संपत्ति घोषित किया है डिफॉल्टर नहीं। मैंने लोन लिया है और जल्द ही उसे वापस कर दूंगा। भारत छोड़कर कहीं नहीं जा रहा हूं। इससे महान कोई देश नहीं है। मैं कानपुर का निवासी हूं, यहीं रहता हूं और यहीं रहूंगा। हालांकि, मुझे बिजनेस के सिलसिले में विदेश जाना पड़ता है।''

 

8. सोमवार सुबह सीबीआई ने विक्रम कोठारी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबर आ गई। सीबीआई ने उनसे, उनकी पत्‍नी और बेटे से पूछताछ की। 

 

9. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सीबीआई ने बताया कि शिकायत में कहा गया- रोटोमैक केस में साजिशकर्ताओं ने 7 बैंकों के कॉन्सर्टियम को धोखा दिया और बेइमानी से 2919 करोड़ रुपए का बैंक लोन निकाला। इसमें लोन का इंट्रेस्ट शामिल नहीं किया गया है। ब्याज जोड़कर ये रकम 3695 करोड़ रुपए हो जाती है।   

 

10. एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने भी विक्रम कोठारी के खिलाफ मनी लॉन्डरिंग का केस दर्ज किया है।  

 

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