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H-1B visa: TCS लेबर सर्टिफिकेशन पाने वाली दुनिया की टॉप 10 कंपनियों में

भारतीय आईटी पेशेवरों को एच1बी वीजा के सख्त नियमों के चलते काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

India TCS among top 10 firms to get foreign labour certification for H-1B visas

वाशिंगटन. टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेस (TCS) फिस्कल ईयर 2018 के लिए एच1बी वीजा के वास्ते फॉरेन लेबर सर्टिफिकेशन पाने वाली टॉप 10 कंपनियों में शामिल हो गई है। वह ऐसी अकेली भारतीय कंपनी है, जिसने टॉप 10 लिस्ट में जगह बनाई है। भारतीय आईटी पेशेवरों को एच1बी वीजा के सख्त नियमों के चलते काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपको बता दें कि यह वीजा कार्यक्रम विदेशी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है। यह एक गैर-अप्रवासी वीजा है। 

 

दूसरे स्थान पर अर्न्स्ट एंड यंग

इस लिस्ट में अर्न्स्ट एंड यंग कंपनी टॉप पर रही है। इसका वैश्विक मुख्यालय लंदन, ब्रिटेन में है। अर्न्स्ट एंड यंग के बाद  डेलॉयट कन्सल्टिंग का नाम भी इस लिस्ट में है, जिसने 69,869 विदेशी कर्मचारियों को नौकरी दी है। अमेरिका के लेबर डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर इंडियन-अमेरिकन स्वामित्व वाली कॉग्निजैंट टेक्नोलॉजी कॉर्प है जिसने 47,732 विदेशी नागरिकों को नौकरी पर रखा है। वहीं एचसीएल अमेरिका ने 42,820, के फोर्स इंक ने 32,996 और ऐप्पल ने 26,833 विदेशी कर्मचारियों को अपनी कंपनी में नौकरी दी हैं। 

 

 

टीसीएस ने 20,755 विदेशी कर्मचारियों को दी नौकरी

अमेरिका के लेबर विभाग के मुताबिक, 2018 वित्त वर्ष में टीसीएस ने 30 सितंबर तक 20,755 विदेशी कर्मचारियों को रोजगार उपलब्ध करवाए हैं। इसके चलते टीसीएस साल 2018 की टॉप 10 कंपनियों में पहले स्थान पर पहुंच गई है। टॉप 10 कंपनियों में क्वालकॉम टेक्नोलॉजीज (20,723), मोफिसिस कॉर्पोरेशन (16,671) और कैपेमिनी अमेरिका भी शामिल हैं। वित्त वर्ष में अमेरिकी लेबर विभाग के  पास एच1बी वीजा के लिए 654,360 एप्लीकेशन आईं थी जिनमें से 599,782 लोगों को नौकरियां मिली, 8,627 लोगों को वीजा नहीं मिल पाया और 45,951 लोगों ने अपने आवेदन वापस ले लिए। साथ ही, लेबर विभाग को 1,266,614 पदों के लिए आवेदन मिले जिनमें से 1,223,053 प्रमाणित किए गए।  

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