बंगाली मार्केट की एक कोठी की बरसाती में रहते थे नरेश गोयल, इराक और कुवैत एयरलाइंस के टिकटों को बेचने से शुरू किया था कारोबार

How naresh goyal started his company: जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल ने अपनी कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। पैसों की कमी की वजह से बीते कुछ दिनों में जेट एयरवेज ने अपनी 40 से ज्‍यादा विमानों को खड़ा कर दिया था। इसके साथ ही अब वे इसके चयेरमेन भी नहीं रहे हैं। नरेश गोयल 1975 के आसपास पंजाब के शहर संगरूर से दिल्ली आए थे। रहने लगे बंगाली मार्केट की एक कोठी की बरसाती में। उन दिनों तक दिल्ली में बरसाती कल्चर था। कई मकान मालिक अपने घरों के तीसरे फ्लोर में एक कमरा बना देते थे।

Money Bhaskar

Mar 25,2019 07:27:00 PM IST

नई दिल्ली.

जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल ने अपनी कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। पैसों की कमी की वजह से बीते कुछ दिनों में जेट एयरवेज ने अपनी 40 से ज्‍यादा विमानों को खड़ा कर दिया था। इसके साथ ही अब वे इसके चयेरमेन भी नहीं रहे हैं। नरेश गोयल 1975 के आसपास पंजाब के शहर संगरूर से दिल्ली आए थे। रहने लगे बंगाली मार्केट की एक कोठी की बरसाती में। उन दिनों तक दिल्ली में बरसाती कल्चर था। कई मकान मालिक अपने घरों के तीसरे फ्लोर में एक कमरा बना देते थे।

बंगाली मार्केट से शुरू हुआ सफर

कुछ उसी तरह की बरसाती में नरेश गोयल रहते थे। वहां पर रहते हुए उनकी मुलाकात बंगाली मार्केट की जान बंगाली स्वीट्स के मालिक लाला भीमसेन से होने लगी। वो नरेश गोयल से उसके काम-धंधे का हाल-चाल पूछने लगे। वे तब तक बंगाली मार्केट के करीब की रिफ्यूजी मार्किट में जाकर खाना खाते थे। बंगाली मार्केट में खाना खाने के पैसे जेब में नहीं होते थे। हालांकि लाला जी की पत्नी उन्हें घर में कभी-कभार बुलाकर खाना खिला दिया करती थी। लाला जी की पत्नी को पुराने बंगाली मार्केट वाले किसी देवी से कम नहीं मानते थे।

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शुरू किया एयरलाइंस के टिकट बेचने का काम

दिल्ली में कुछ दिनों तक इधर-उधर काम करने के बाद नरेश गोयल ने इराक और कुवैत एयरलाइंस की टिकटों को बेचने का काम चालू कर दिया। तब इराक एयरलाइंस का दफ्तर कस्तूरबा गांधी मार्ग में होता था। देखते-देखते नरेश गोयल का धंधा चमका। गोयल ने मोटा पैसा कमाना शुरू कर दिया। काम चला तो गोयल ने कृष्णा नगर में एक घर खरीद लिया पर बंगाली मार्केट की बरसाती नहीं छोड़ी।

ऐसे चमका बिजनेस

वायुदूत एयरलाइंस के पूर्व चेयरमेन हर्षवर्धन के मुताबिक, नरेश गोयल ने सबसे पहले चार्टर फ्लाइट के काम में हाथ आजमाया। उसमें उसे तगड़ी सफलता मिली। गोयल और उसका एक दोस्त अमृतसर से चार्टर फ्लाइट लंदन लेकर जाने लगे। इस काम में उसे तगड़ा लाभ हुआ। नरेश गोयल की एक खास बात ये रही कि वो दोस्त बनाने में माहिर थे। उसे ये पता चल गया था कि बिना दोस्त बनाए बिजनेस नहीं किया जा सकता।

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FDI ने खोले सफलता के रास्ते

सरकार ने 90 के दशक में एविएशन सेक्टर में एफडीआई का रास्ता खोला। उसके फौरन बाद गोयल ने छोड़ दी दिल्ली और बंगाली मार्केट । फिर तो वो आसमान से बातें करने लगे। हालांकि उनका दिल्ली आना लगा रहता। वे मुंबई शिफ्ट हो गए। वे यहां सुबह आकर शाम को वापस मुंबई चले जाते। माया नगरी में नरेश गोयल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वो वहां पर भी दोस्त बनाने लगा। उसके दोस्तों में जेआरडी टाटा भी थे। गोयल की बॉलीवुड में भी खूब दोस्ती थी। इसलिए उन्होंने शाहरुख खान, जावेद अख्तर और यश चोपड़ा को इसका निदेशक बनवा दिया था। वे रोज ताज या ओबराय होटल में शाम को बैठते। कहते हैं कि 90 के दशक में मुंबई का एलिट इन दोनों होटलों में ही शाम को मिल बैठ करता था।

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अब भी जेट में है 51 फीसदी हिस्सेदारी

नरेश गोयल को लंबे समय से जानने वाले दिल्ली के कारोबारी संतोष चावला कहते हैं कि आज एविएशन इंडस्‍ट्री के लिए बेहद दुखद दिन है क्योंकि नरेश गोयल ने भारत की पहली वर्ल्‍ड क्‍लास एयरलाइन का श्रीगणेश किया। आपको बतो दें कि जेट एयरवेज की 51 फीसद हिस्सेदारी नरेश गोयल के पास है। जबकि एतिहाद एयरवेज के पास 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

-विवेक शुक्ला

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