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Google.org ने भारत के दो NGO को दी 30 लाख डॉलर की ग्रांट, एजुकेशन के क्षेत्र में होगा इस्‍तेमाल

ये ग्रांट गूगल के ग्‍लोबली 5 करोड़ डॉलर ग्रांट दिए जाने का हिस्‍सा हैं।

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नई दिल्‍ली. Google.org ने दो भारतीय नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन को 30 लाख डॉलर की एडिशनल ग्रांट दी है। इसमें से 20 लाख डॉलर सेंट्रल स्‍क्वैयर फाउंडेशन (CSF) को और 10 लाख डॉलर द टीचर ऐप को जाएंगे। इस तरह इसकी भारत में कुल ग्रांट 1.14 करोड़ डॉलर पर जा पहुंची है। 

 
ये ग्रांट गूगल के ग्‍लोबली 5 करोड़ डॉलर ग्रांट दिए जाने का हिस्‍सा हैं। ग्रांट का इस्‍तेमाल ऑर्गेनाइजेशंस की मौजूदा पहलों की पहुंच बढ़ाने, फंड कंटेंट क्रिएशन और टेक्‍नोलॉजी बेस्‍ड लर्निंग सॉल्‍युशंस के जरिए टीचर ट्रेनिंग में हो रहा है। 
 

पिछले साल 4 भारतीय NGO को मिली थी 84 करोड़ डॉलर की ग्रांट 

पिछले साल Google.org ने 4 भारतीय NGOs- लर्निंग इक्‍वलिटी, मिलियन स्‍पार्क्‍स फाउंडेशन, प्रथम बुक्‍स- स्‍टोरीवीवर और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन को 84 करोड़ डॉलर की ग्रांट दी थी। फंडिंग मिलने के बाद इन NGOs अपने टूल्‍स और प्रोग्राम्‍स से पूरे भारत में 8 लाख से ज्‍यादा स्‍टूडेंट्स और टीचर्स तक पहुंच बनाई। 
 

सबसे ज्‍यादा ग्रांट भारत को 

Google.org से सबसे ज्‍यादा ग्रांट भारत को ही प्राप्‍त हुई है। इसके बाद मेक्सिको, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देश हैं। Google.org के एजुकेशन लीड निक केन ने कहा कि हम मानते हैं कि टेक्‍नोलॉजी भारत में लर्निंग गैप को भरने में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हम भारत में अपना इन्‍वेस्‍टमेंट बढ़ा रहे हैं ताकि सभी टीचर्स और स्‍टूडेंट्स को इसका लाभ मिल सके। ये नए फंड स्‍टूडेंट्स और टीचर्स को भारत के अनुरूप उपयुक्‍त समाधान और कंटेंट उपलब्‍ध कराने में मदद करेंगे। 
 

11 लाख टीचर्स के पास नहीं है प्रॉपर ट्रेनिंग 

केन यह भी कहा कि क्‍वालिटी मैटेरियल्‍स के लिए लिमिटेड एक्‍सेस और संसाधनों की कमी झेल रहे टीचर्स भी भारत के लिए एक प्रमुख चुनौती हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के स्‍कूलों में पढ़ाने वाले टीचर्स में से 11 लाख प्रॉपर तरीके से ट्रेंड नहीं हैं। वहीं वर्ल्‍ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 1.3 लाख स्‍कूल ऐसे हैं, जहां केवल 1 टीचर है। 
 

CSF और टीचर ऐप में कैसे होगा ग्रांट का इस्‍तेमाल 

CSF को ग्रांट के अलावा यूट्यूब लर्निंग टीम से टेक्निकल असिस्‍टेंस भी मिलेगी। यह न्‍यूनतम 20 कंटेंट क्रिएटर्स को सहयोग देगी, जिससे हिंदी और अन्‍य भाषाओं में विज्ञान, टेक्‍नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित संबंधी कंटेंट के कम से कम 200 घंटे प्रोड्यूस हो सकें। वहीं 10 लाख डॉलर की ग्रांट से द टीचर ऐप का उद्देश्‍य टीचर्स को गणित, विज्ञान, भाषा और शिक्षा-विज्ञान को लेकर सही ट्रेनिंग और संसाधन उपलब्‍ध कराना है। इस फंड का इस्‍तेमाल 2 साल में 5 लाख टीचर्स तक पहुंच बनाने के लिए होगा। 
 
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