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E-mail की जगह हाथ से पत्र लिखकर कंपनियों को लुभाया, अब करता है 7100 करोड़ का कारोबार

BMW, L'Oreal, Uber जैसी कंपनियां बन गई क्लाइंट

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नई दिल्ली

इंटरनेट और ई-मेल के जमाने में हाथ से लिखे पत्रों का चलन काफी कम हो गया है। आप खुद ही साेचिए कि आपने आखिरी बार कब हाथ से पत्र लिखा था। और बात अगर व्यावसायिक जगत की हो, यानी कॉरपोरेट कल्चर की, तो यहां तो हाथ से लिखे पत्रों का उपयोग न के बराबर होता है। आधुनिक जगत में कंप्यूटर के जरिए भेजे गए मेल को ही तरजीह दी जाती है। कहा भी जाता है कि अगर बिजनेस में सफल होना है, तो नई तकनीक का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। लेकिन, जर्मनी की टेक्नोलॉजी कंपनी Celonis ने इस बात को गलत साबित करके सफलता की नई तस्वीर पेश की है। इस कंपनी की सफलता के पीछे हाथ से लिखे पत्रों का बड़ा योगदान रहा।

 

क्या था उनका बिजनेस मॉड्यूल

एजेंसी की खबर के मुताबिक साल 2011 में म्यूनिख में 22 साल के Alexander Rinke ने अपने दो दोस्तों Martin Klenk और Bastian Nominacher के साथ Celonis (सेलोनिस) नाम की कंपनी खोली। यह एक हाई टेक डाटा माइनिंग आधारित स्टार्ट-अप था जो अलग-अलग कंपनियों को सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बिजनेस और कर्मचारियों के परफॉर्मेंस को मॉनिटर करने, उनमें मौजूद खामियों का पता लगाने और उपयुक्त समाधान सुझाने का काम करता था। सेलोनिस का सॉफ्टवेयर किसी कंपनी के कंप्यूटर सिस्टम को मॉनिटर कर यह बताने में सक्षम था कि उनका कौन सा कर्मचारी ठीक से काम नहीं कर रहा है और उनके बिजनेस के तरीकों में कहां-कहां गड़बड़ी मौजूद है।

 

कंपनियों को भेजे हाथों से लिखे पत्र

एलेक्जेंडर ने कई कंपनियों को बिजनेस का प्रस्ताव देने के लिए ई-मेल भेजा। लेकिन, कोई जवाब नहीं आया। फिर उन्होंने टाइप किए पत्र भेजे। फिर भी कहीं से जवाब नहीं आया। आखिरी विकल्प के तौर पर एलेक्जेंडर ने अलग-अलग कंपनियों के सीईओ को हाथ से लिखा पत्र भेजना शुरू किया। इन पत्रों ने कमाल दिखाना शुरू किया और उन्हें मीटिंग के लिए जवाब आने लगे।

मिलने लगा रिस्पॉन्स

एलेक्जेंडर बताते हैं, ‘हमने यह महसूस किया कि ज्यादातर कंपनियां अनजान सोर्स से आने वाले ई-मेल को ओपन तक नहीं करती है। टाइप किए हुए पत्र भी सेक्रेटरी स्तर से आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। लेकिन, हाथ से लिखे पत्रों को लेकर ऐसा नहीं है। इसमें पर्सनल टच होता है। ऐसा लगता है कि किसी अपने ने लिखा है। इसलिए हमारे हाथ से लिखे पत्र अपने लक्ष्य तक पहुंचने लगे और हमें रिस्पॉन्स भी मिलने लगा।'

 

7100 करोड़ रुपए है कंपनी का नेटवर्थ

जल्द ही सेलोनिस ने बड़ी संख्या में कस्टमर बना लिए। आज की तारीख में कंपनी के पास बीएमडब्ल्यू, एक्सोन मोबाइल, जनरल मोटर्स, लॉरियल, सीमेंस, उबर और वोडाफोन जैसे कस्टमर हैं। आज की तारीख में कंपनी का नेटवर्थ 1 अरब डॉलर (करीब 7100 करोड़ रुपए) है।

15 साल की उम्र में शुरू की थी पहली कंपनी

बर्लिन के रहने वाले एलेक्जेंडर शुरुआत से ही उद्यमी बनना चाहते थे। उन्होंने 15 साल की उम्र में अपनी पहली कंपनी खोली थी। वह कंपनी हाईस्कूल छात्रों को ट्यूशन के लिए शिक्षक मुहैया कराती थी। कुछ सालों तक उन्होंने यह बिजनेस चलाया भी। लेकिन, बाद में उन्हें अहसास हुआ कि इस बिजनेस की अपनी सीमाएं हैं और वे इसमें बहुत आगे नहीं जा सकते हैं। इसके बाद 2011 में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करते हुए उन्हें सेलोनिस का आइडिया आया।

 

ऐसे शुरू हुई सेलाेनिस

वे एक प्रोजेक्ट के तहत मार्टिन और बास्तियन के साथ मिलकर एक कंपनी को कस्टमर सर्विस में सुधार करने के काम में जुटे। वहां काम करते हुए उन्हें पता चला कि किसी समस्या को दूर करने में कंपनी को पांच दिन तक का समय लग रहा था। इसको लेकर वे कंपनी के कई कर्मचारियों से बात भी की। लेकिन, कोई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं था। इसमें ऑफिस की राजनीति आड़े आ रही थी। फिर उन्होंने खामी खोजने और उसके समाधान के लिए ऐसा सिस्टम बनाने का फैसला किया, जिसमें मानवीय और राजनीतिक दखल की गुंजाइश न हो। इसी से सेलोनिस का जन्म हुआ।

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