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अब हर फैक्ट्री के टॉयलेट में महिलाओं के लिए रखना होगा सैनिटरी नैपकिन, सरकार की नई पहल

8 फरवरी को श्रम मंत्रालय ने जारी किया है यह नियम

Labour Ministry Makes it Compulsory For Factories To Keep Sanitary Napkins For Women Labourers

नई दिल्ली.

सरकार ने महिला श्रमिकों की सुविधा और हाईजीन के लिए नया नियम लागू किया है, जिसके तहत अब हर फैक्ट्री में महिलाओं के लिए सैनिटरी नैपकिन रखना अनिवार्य होगा। श्रम मंत्रालय ने 8 फरवरी को मॉडल फैक्ट्री रूल्स के तहत इस नियम को लागू किया है। नियमों के मुताबिक सैनिटरी नैपकिन भारतीय मानकों के अनुरूप होने चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नैपकिन की अपयुक्त संख्या बरकरार रखी जा रही है। इसके साथ ही नियमों में यह भी कहा गया है कि सभी टॉयलेट्स में डिस्पोजेबल डस्टबिन भी रखें जाएं, जिससे नैपकिन्स को कलेक्ट किया जा सके।

 

देश में हैं 15 करोड़ महिला मजदूर

2011 की जनगणना के मुताबिक देश में 14.98 करोड़ महिला मजदूर हैं। इसमें से 12.18 करोड़ ग्रामीण क्षेत्रों में और 2.8 करोड़ शहरी इलाकों में मजदूरी करती हैं। कुल 14.98 करोड़ महिला श्रमिकों में से 3.59 करोड़ महिलाएं कल्टीवेटर्स के तौर पर काम करती हैं, 6.15 करोड़ महिलाएं कृषि मजदूर के तौर पर काम करती हैं। 85 लाख महिलाएं हाउसहोल्ड इंडस्ट्री व 4.37 करोड़ महिलाएं अन्य श्रमिकों में गिनी जाती हैं। इस नियम से इन सभी महिलाओं को काफी सहूलियत होगी।

 

जीएसटी में लगाया गया था पैड पर टैक्स

जुलार्ठ 2017 में जब जीएसटी लागू हुआ था तो सैनिटरी नैपकिन को जीएसटी के दायरे में लाया गया था। इस पर 12 फीसदी टैक्स लगाया गया था। महिलाअों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लगातार मांग करने के बाद पैड्स पर लगे इस टैक्स को हटाया गया। पिछले साल जुलाई में अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल सैनिटरी नैपकिन को टैक्स फ्री किया था।

 

 

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