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फेस लॉक सिस्टम भी नहीं है सुरक्षित, सोए हुए आदमी के चेहरे का इस्तेमाल करके चुरा लिए 1.25 लाख रुपए

फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी की ब्रांडिंग सिक्योरिटी फीचर के तौर पर की जाती है

Facial recognition feature in smartphone is not safe

Facial recognition feature in smartphone is not safe बहुत सी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने फेस लॉक सिस्टम बनाया है। जिसपर उनका कहना है कि यह आपके फोन के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित है। जिन समार्टफोन्स में भी यह फीचर होता है उनकी कीमत काफी ज्यादा होती है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यह फीचर भी आपके स्मार्टफोन के लिए सुरक्षित नहीं है। हम आपको चीन का एक मामला बता रहे हैं जहां सोए हुए आदमी के चेहरे का इस्तेमाल करके चोरों ने 1,800 डॉलर यानी 1.25 लाख रुपए उड़ा दिए।

नई दिल्ली। बहुत सी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने फेस लॉक सिस्टम बनाया है। जिसपर उनका कहना है कि यह आपके फोन के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित है। जिन समार्टफोन्स में भी यह फीचर होता है उनकी कीमत काफी ज्यादा होती है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यह फीचर भी आपके स्मार्टफोन के लिए सुरक्षित नहीं है। हम आपको चीन का एक मामला बता रहे हैं जहां सोए हुए आदमी के चेहरे का इस्तेमाल करके चोरों ने 1,800 डॉलर यानी 1.25 लाख रुपए उड़ा दिए। दरअसल यह मामला चीन के जेझियांग प्रांत का है। यहां युआन नाम के व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसके बैंक अकाउंट से 1,800 डॉलर गायब हो गए। जांच के बाद पता चला कि उसके साथियों ने ही फोन में मौजूद वी-चैट एप से फेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल कर ये पैसे ट्रांसफर कर लिए।

दोनों आरोपी पुनलिस की हिरासत में 


दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया और युआन को पैसे भी वापस मिल गए। लेकिन, इस पूरे प्रकरण ने फेशियल रिकग्निशन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। युआन के पास कौन की कंपनी का फोन था, इसका खुलासा नहीं किया गया है। मामले की जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, ‘ऐसा लगता है कि युआन के फोन में मौजूद फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी विश्वसनीय नहीं थी। हमने जो टेस्ट किए उससे पता चलता है कि जब व्यक्ति की आंखें बंद हो तब भी उसके चेहरे का इस्तेमाल कर फोन को अनलॉक किया जा सकता है।’

फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी की ब्रांडिंग सिक्योरिटी फीचर के तौर पर की जाती है


यह बात सभी जानते हैं कि आजकल सभी स्मार्टफोन में फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी की ब्रांडिंग सिक्योरिटी फीचर के तौर पर की जाती है। लेकिन बहुत सी स्मार्टफोन कंपनियां आइरिस स्कैनिंग का इस्तेमाल नहीं करती हैं क्योंकि इस टेक्नोलॉजी की कीमत काफी ज्यादा होती है। औरइसके इस्तेमाल से स्मार्टफोन बनाने की लागत बढ़ जाती है। 

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