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नौकरी छोड़ने वाले हैं तो यह जरूर जान लीजिए, भारत में नौकरी से निकालने की दर पांच साल के अधिकतम पर

औसत इंक्रीमेंट भी सिंगल डिजिट में अटका

If you do a job then it is important for you to know that more people are being removed from India than   hiring jobs

नई दिल्ली. 
नोटबंदी और जीएसटी का असर अब धीरे-धीरे बड़े उद्योगों पर भी आ रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल यानी  बीते पांच साल में नौकरी से निकाले जाने की दर सबसे ज्यादा ऊंचाई पर पहुंच चुकी है।इसके चलते कर्मचारियों को सालाना मिलने वाला इंक्रीमेंट सिंगल डिजिट पर अटक गया है। बीते दो सालों से लोग नौकरियां ज्यादा गंवा रहे हैं जबकि भर्तियों का अनुपात इससे कम है। यही नहीं, कर्मचारियों में यह भी चिंता है कि नई जगह नौकरी का स्थाईत्व कम है। लिहाजा वे अपनी कंपनी के द्वारा कम इंक्रीमेंट दिए जाने के बाद भी ज्यादा सैलरी के लिए दूसरे अवसर नहीं तलाश रहे हैं। एआन कंपनसेशन सर्वे (aon compensation survey)में यह खुलासा हुआ है। सर्वे में 20 सेक्टरों में काम कर ही एक हजार कंपनियां शामिल हैं। 

नए अवसर के लिए नौकरी छोड़ने की दर 15.8 फीसदी पर अटकी

सर्वे के मुताबिक वर्ष 2014-15 में 3.5 फीसदी लोगों को बगैर उनकी मर्जी के
नौकरी छोड़ना पड़ता था। अब ऑटोमेशन और कॉस्ट कटिंग के कारण यह प्रतिशत 3.7 हो गया है। इसी तरह, पहले 18.1 प्रतिशत लोग बेहतर नौकरी के लिए मौजूदा कंपनी छोड़ देते थे लेकिन अब
यह प्रतिशत घटकर 15.8 रह गया है। 

 

30 प्रतिशत कम हुई हायरिंग 

बीते चार सालों के दरमियान कंपनियों ने हाइरिंग बहुत कम कर दी है। इसमें 30 प्रतिशत की गिरावट है।  इसका सबसे ज्यादा असर जूनियर मैनेजमेंट और क्लर्क लेवल के JOB पर हुआ है। 

फिर भी इन सेक्टरों में ज्यादा नौकरियां 

बिग डाटा एनालिस्ट, डिजीटल टेक्नालॉजी, क्लाउड कम्प्यूटिंग, ऑर्टीफिसियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग व साइबर सुरक्षा में अभी सबसे ज्यादा मौके हैं। यहां तेजी से नई नौकरियां निर्मित हो रही है। इसलिए यहां पर रोजगार की सुरक्षा भी है। 

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