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GST से बढ़ीं डेनिम उत्‍पादकों की दिक्‍कतें, इंडस्ट्री ने कहा-सरकार बढ़ाए एक्‍सपोर्ट इन्‍सेंटिव

डेनिम इंडस्‍ट्री इन दिनों ज्‍यादा उत्‍पादन क्षमता से जूझ रही है। बीते पांच सालों में इसकी क्षमता 90 फीसदी बए़ी है।

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भोपाल. डेनिम इंडस्‍ट्री इन दिनों ज्‍यादा उत्‍पादन क्षमता से जूझ रही है। बीते पांच सालों में इसकी क्षमता 90 फीसदी  बढ़ी है। इस वजह से नई मिलों का संकट बढ़ गया है। गुजरात और राजस्‍थान में इन्‍सेंटिव मिलने से क्षमता का तेजी से विस्‍तार हुआ, लेकिन डिमांड उतनी नहीं बढ़ी। मिलों में क्षमता का 60-70 फीसदी ही उत्‍पादन हो रहा है। घरेलू बाजार में फिलहाल मांग ज्‍यादा बढ़ने की उम्‍मीद नहीं है। इसलिए इंडस्‍ट्री ने निर्यात इन्‍सेंटिव बढ़ाने की मांग की है।

 

 

30-40 फीसदी क्षमता का इस्‍तेमाल नहीं हो पा रहा

डेनिम निर्माताओं के संगठन डीएमए के चेयरमैन शरद जयपुरिया ने कहा कि जीएसटी के बाद इंडस्‍ट्री की 30-40 फीसदी क्षमता बंद पड़ी है। यही स्थिति रही तो आगे उत्‍पादन में और कटौती करनी पड़ सकती है। आर एंड बी डेनिम्‍स के अमित डालमिया के अनुसार सिलाई और वाशिंग करने वाली छोटी इकाइयों को बैंकिंग सिस्‍टम से औपचारिक रूप से जोड़ने में समय लगेगा। इसलिए निकट भविष्‍य में मार्केट में रिकवरी की उम्‍मीद नहीं है। भास्‍कर डेनिम के डायरेक्‍टर अखिलेश राठी ने बताया कि देश में बनने वाला 85 फीसदी फैब्रिक घरेलू मार्केट में ही बिकता है, इसलिए यहां मांग घटने से मिलें प्रभावित हुई हैं।

 

निर्यात बढ़ाने के उपायों की घोषणा जरूरी

फैब्रिक मैन्‍युफैक्‍चरर आशिम ग्रुप के डायरेक्‍टर अतुल सिंह ने कहा कि डेनिम इंडस्‍ट्री की मौजूदा हालत को देखते हुए सरकार को निर्यात बढ़ाने के उपायों की घोषणा करनी चाहिए। उन्‍होंने ड्यूटी ड्रॉ बैक बढ़ाने, एमईआईएस, आरओएसएल, फोकस मार्केट और फोकस प्रोडक्‍ट स्‍कीम में इन्‍सेंटिव बढ़ाने की मांग की।

 

करीब 20 करोड़ मीटर का निर्यात

घरेलू बाजार में हर साल 75- 80 करोड़ मीटर डेनिम फैब्रिक की खपत होती है। हर साल करीब 20 करोड़ मीटर का निर्यात होता है। 2016-17 में 31.6 करोड़ डॉलर का डेनिम निर्यात हुआ। इसमें 2014- 15 के 35.5 करोड़ डॉलर की तुलना में 11 फीसदी गिरावट आई है। अरिहंत कैपिटल एंड ब्रोकरेज के वाइस प्रेसिडेंट अर्पित जैन ने बताया कि लिक्‍विडिटी समस्‍या और कम डिमांड के कारण सितंबर तिमाही में डेनिम मिलों की बिक्री और मुनाफा प्रभावित हुआ है। दिसंबर तिमाही में भी ही स्थिति रहने के आसार हैं।  


 
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