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इन कंपनियों में किया है निवेश तो हो जाएं सावधान, डूब सकता है आपका पैसा

इसमें से 37 कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 5000 करोड़ रुपए से ज्यादा है

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नई दिल्ली.

BSE 500 इंडेक्स में लिस्टेड कंपनियों में से तकरीबन 77 कंपनिया रिस्क के दायरे में आ गई हैं। साल की शुरुआत में सिर्फ 24 कंपनियां 0.52 फीसदी डिफॉल्ट रिस्क प्रोबाबिलिटी के घेरे में थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर तीन गुना हो गई है। इन कंपनियों में वोडाफोन आइडिया, दीवान हाउसिंग, बॉम्बे डाइंग, Srei Infrastructure, जेट एयरवेज, इंडियाबुल्स रियल एस्टेट, इंडियाबुल्स हाउसिंग एंड फाईनेंस और रिलायंस कैपीटल शामिल हैं। इस साल इन कंपनियों के शेयर औसत 49 फीसदी गिरे हैं, जबकि BSE 500 इंडेक्स में इस साल पांच फीसदी गिरावट हुई है। ऐसे में अगर आपने इन कंपनियों में पैसा लगाया है तो आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

 

6.75 लाख करोड़ रुपए की हैं ये कंपनियां

इन 77 कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 6.75 लाख करोड़ रुपए है। यह कुल भारतीय कंपनियों के कुल मार्केट वैल्यू का चार फीसदी है। इसमें से 37 कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 5000 करोड़ रुपए से ज्यादा है अौर 47 कंपनियां एेसी हैं जो बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़ी हैं।

 

बढ़ रहा कंपनियों पर रिस्क

 

कंपनी एक साल में डिफॉल्ट की संभावना (% में) डिफॉल्ट प्रोबैबिलिटी में Year to date चेंज (% में) कीमत में ईयर टू डेट चेंज (% में) मार्केट कैपिटलाइजेशन (करोड़ में)
Vodafone Idea  4.99 4.40 -64.6 33, 194
Jindal Steel and Power 1.77 1.58 -24.5 14,882
GMR Infra 1.62 1.30 -28.1 9,718
Reliance Power 2.04 1.85 -40.4 8,345
RCom 11.98 9.85 -63.6 3,637
Jet Airways 3.21 2.99 -61.8 3,591

 

 

आगे पढ़ें- 0.52 डिफॉल्ट रिस्क को खराब मानते हैं निवेशक

 

 

0.52 डिफॉल्ट रिस्क को खराब मानते हैं निवेशक

 

ब्लूमबर्ग डाटा के मुताबिक वैश्विक स्तर पर निवेशक ऐसी कंपनियों से दूर रहते हैं जिनके अगले 12 महीने में ऋण पर डिफॉल्ट करने की आशंका 0.52 फीसदी हो। इस संभावना का आकलन करने के लिए Bloomberg अपने रिस्क मॉडल का इस्तेमाल करता है। इसमें कंपनी के शेयर की कीमतमार्केट कैपिटलाइजेशनशेयर की कीमतों में अस्थिरताशॉट-टर्म डेटब्याज पर खर्च और कैश फ्लो को ध्यान में रखा जाता है।

 

आगे पढ़ेंसुधरी है कंपनियों की उधार चुकाने की क्षमता

 

 

सुधरी है कंपनियों की उधार चुकाने की क्षमता

 

अगर फाइनेंशियल कंपनियों को हटा दिया जाए तो डिफॉल्ट रिस्क की अधिक संभावना वाली कंपनियों की कुल उधार राशि 2016 में 7.1 लाख करोड़ रुपए के मुकाबले 2018 में 6.65 लाख करोड़ रह गई है। इस दौरान इन कंपनियों का ब्याज क्षेत्र या उधार चुकाने की क्षमता 1.43 से बढ़कर 1.87 हो गई है।

 
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