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अब ग्राहकों को धोखा नहीं दे पाएंगी कंपनियां , झूठे प्रचार पर होगी 2 साल की जेल और 10 लाख का जुर्माना

यह विधेयक दो बार स्थायी समिति के पास भेजा जा चुका है।

Consumer Protection Bill with stringent provisions passed in Lok Sabha
Consumer Protection Bill with stringent provisions passed in Lok Sabha  ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए ज्यादा कड़े प्रावधानों वाला उपभोक्ता संरक्षण विधेयक आज लोकसभा में हंगामे के बीच पारित हो गया। इस विधेयक में यह प्रावधान है कि यदि कोई कंपनी झूठा या भ्रामक प्रचार करती है जो उपभोक्ता के हित के खिलाफ है तो उसे दो साल की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।

नयी दिल्ली। ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए ज्यादा कड़े प्रावधानों वाला उपभोक्ता संरक्षण विधेयक आज लोकसभा में हंगामे के बीच पारित हो गया। इस विधेयक में यह प्रावधान है कि यदि कोई कंपनी झूठा या भ्रामक प्रचार करती है जो उपभोक्ता के हित के खिलाफ है तो उसे दो साल की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। अपराध दोहराए जाने पर जुर्माने की राशि 50 लाख रुपये तक और कैद की अवधि पांच साल तक हो जायेगी। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने बताया कि 32 साल बाद उपभोक्ता संरक्षण कानून में कोई बदलाव किया गया है। यह विधेयक दो बार स्थायी समिति के पास भेजा जा चुका है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को लागू कराने के लिए तीन स्तरीय नियामक की व्यवस्था की गयी है। सबसे ऊपर राष्ट्रीय आयोग, उसके नीचे राज्य आयोग और सबसे नीचे स्तर पर जिला आयोग होंगे। केंद्रीय आयोग का आदेश नहीं मानने पर छह महीने तक की कैद या 20 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। 

 

मिलावट करने वालों पर अलग से प्रावधान

उन्होंने बताया कि जिला आयोग के आदेश के खिलाफ राज्य आयोग में और राज्य आयोग के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय आयोग में अपील की जा सकती है। राष्ट्रीय आयोग के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकेगी। असामान्य परिस्थितियों को छोड़कर अपील आदेश के 30 दिन के भीतर करनी होगी।  श्री पासवान ने बताया कि मिलावट करने वालों पर नकेल कसने के लिए विधेयक में अलग से प्रावधान है। यदि उपभोक्ता को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है तो छह महीने तक की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना, यदि उपभोक्ता को मामूली स्वास्थ्य नुकसान पहुँचा है तो एक साल तक की कैद और तीन लाख रुपये तक का जुर्माना, गंभीर स्वास्थ्य नुकसान की स्थिति में सात साल तक की कैद और पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना तथा उपभोक्ता की मृत्यु की स्थिति में कम से कम सात साल और अधिक से अधिक आजीवन कारावास और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने की व्यवस्था है। विधेयक में ई-कॉमर्स और डायरेक्ट सेलिंग में अनुचित व्यवहार को रोकने तथा इन मामलों में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार को समुचित कदम उठाने का अधिकार दिया गया है। 

 

पहले किए जाएंगे सुलह के प्रयास

उपभोक्ता संरक्षण पर सरकार को सलाह देने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता सरंक्षण परिषद के गठन का प्रावधान है जिसके अध्यक्ष उपभोक्ता मामलों के मंत्री होंगे। इसकी बैठक कम से कम साल में एक बार होगी। राज्य और जिला स्तर भी ऐसे परिषदों को प्रावधान विधेयक में है। उपभोक्ता अधिकारों के हनन, अनुचित व्यापार तथा भ्रामक प्रचारों के नियमन के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण का गठन किया जायेगा। राज्य और जिला स्तरों पर भी प्राधिकरणों का गठन होगा जबकि सुनवाई की जिम्मेदारी राष्ट्रीय, राज्य तथा जिला स्तरीय आयोगों की होगी। जिला स्तर पर शिकायत प्राप्त होने पर यदि आयोग को लगता है कि मामले में सुलह की गुंजाइश है तो पहले वह सुलह का प्रयास करेगा। सुलह का प्रयास विफल होने पर आगे की सुनवाई शुरू की जायेगी। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि यह कानून उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में नियामकीय कमी को पूरा करता है। इसका उद्देश्य उपभोक्ता शिकायतों का जल्द निपटारा करना तथा इस प्रक्रिया को सरल बनाना है। 

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