विज्ञापन
Home » Industry » CompaniesCoca-Cola Secret Formula Is Kept In A Vault In Atlanta

कोका-कोला बनाने की सीक्रेट रेसिपी बंद है तिजोरी में, सिर्फ दो लोगों को है इसकी जानकारी, अब हुई इसका ट्रेड सीक्रेट चुराने की कोशिश

चीन की महिला पर लगा है 850 करोड़ रु. का यह सीक्रेट चुराने का आरोप

1 of

नई दिल्ली.

कोका-कोला की एक पूर्व साइंटिस्ट Xiaorong You पर कंपनी के ट्रेड सीक्रेट चुराने का आरोप लगा है। यह साइंटिस्ट मूल रूप से चीनी है, लेकिन कई वर्षों से अमेरिका में रह रही थी। आरोपों के मुताबिक वह चीन में कोका-कोला जैसी कंपनी खोलना चाहती थी और इसके लिए उसने पिछले साल कोका-कोला से ट्रेड सीक्रेट चुराए। इन सीक्रेट्स की कीमत करीब 850 करोड़ रुपए (12 करोड़ डॉलर) आंकी जा रही है। यह तो महज कोका-कोला की पैकेजिंग का सीक्रेट है। असल सीक्रेट तो कोका-कोला बनाने की रेसिपी है, जो अमेरिकी शहर अटलांटा में एक तिजोरी में रखी जाती है। इतना ही नहीं, इसके बारे में जानकारी भी सिर्फ दो ही लोगों को है। इसी फॉर्मूले के दम पर कोका-कोला ने बाजार में अपनी धाक जमाई है।

 

सिर्फ दो लोग जानते हैं असली फॉर्मूला

कोक के सीक्रेट फॉर्मूले को लेकर भले ही चर्चा रही हो, लेकिन इस फॉर्मूले का पता कंपनी के अधिकारियों तक को नहीं है। कंपनी के सिर्फ दो एक्जीक्यूटिव ही इसका राज जानते हैं। हालांकि, चर्चा यह भी है कि दोनों ही एग्जीक्यूटिव को आधा-आधा फॉर्मूला पता है। और यह भी कि दोनों एक्जीक्यूटिव को फॉर्मूला पता होने के कारण कभी एक साथ नहीं रखा जाता। कंपनी की स्ट्रैटजी के तहत यह दोनों ट्रैवल भी अलग-अलग ही करते हैं। फॉर्मूले की सीक्रेसी को लेकर वर्ष 2011 में कंपनी ने बयान भी दिया था कि उसका फॉर्मूला अपनी जगह सुरक्षित है और वो बाहर नहीं आ सकता।

 

 

कहां रखा है फॉर्मूला

फॉर्मूले को कंपनी के किसी कर्मचारी या अधिकारी के साथ डिस्‍क्‍लोज नहीं किया गया। अटलांटा के सन ट्रस्ट बैंक में इसकी ओरिजनल कॉपी रखी गई है। सन ट्रस्ट फॉर्मूले को कभी शेयर न करे, इसलिए कोका कोला में उसे 48.3 मिलियन शेयर दिए गए हैं। साथ ही सन ट्रस्ट के अधिकारियों को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी शामिल किया गया है।

 

कब बनाया गया था फॉर्मूला

कोका कोला का गुप्त फॉर्मूला 1886 में अटलांटा में बनाया गया था। इसे बनाने वाले जॉन एस पेंबर्टन उस वक्त दवा की एक दुकान चलाते थे और उन्होंने अपने घर के पिछवाड़े में एक केतली में अलग-अलग बूटियां और सामग्री उबालकर कोका कोला का फॉर्मूला ईजाद किया था।

 

 

दिमाग शांत करने वाला टॉनिक

विश्व भर में विख्यात इस सॉफ्ट ड्रिंक पर किताब लिखने वाले मार्क पेंडरगास्ट के मुताबिक कोका कोला को पहली बार दिमाग को शांत करने वाले टॉनिक के रूप में लोगों के सामने पेश किया गया। इसके निर्माताओं का दावा था कि कोका कोला पीने से सिरदर्द और थकान कम हो जाती है और दिमाग ठंडा हो जाता है। पेंडरगास्ट ने अपनी किताब में इस बात का दावा किया था कि शुरुआत में पेंबर्टन ने इसमें कोकीन भी मिलाया था।

 

कौन से फ्लेवर से बनाई जाती है ड्रिंक

कोका कोला में पानी के अंदर बुलबुले पैदा करने के लिए कारबोनेटेड वाटर का इस्तेमाल किया जाता है। मिठास के लिए इसमें चीनी, कैरेमल का इस्तेमाल होता है। स्वाद अनुसार बनाने के लिए फास्‍फोरस एसिड का प्रयोग होता है। कैफेलिन फेल्वरिंग को पानी में मिलाकर फ्लेवर तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा, नैचुरल फ्लेवरिंग का भी इस्तेमाल होता है, जिसमें सब्जी, फल और मसालों का टेस्ट होता है।

कब शुरू हुआ उत्पादन

कोका कोला ने अपना उत्पादन 1886 में शुरू किया था। काले रंग से शुरू हुई कोला अब कई फ्लेवर में अपनी ड्रिंक्‍स बेचती है। काला गहरा बुलबुला वाला सोडा वर्ष 1886 में अटलांटा (जॉर्जिया) में तैयार किया गया था। अपने शुरुआती दिनों से ही कोका कोला ने दुनियाभर में अपने विस्तार की तरफ देखना शुरू किया। 1900 के दशक से कंपनी ने एशिया और यूरोप में बॉटलिंग का काम शुरू किया। लेकिन, कंपनी को बड़ा विस्‍तार दूसरे विश्व युद्ध के कारण मिला, जब विदेश में मौजूद अमेरिकी सैनिकों को कोका कोला उपलब्ध कराई गई। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान दुनियाभर में कोका कोला के 60 मिलिट्री बॉटलिंग प्लांट थे। इसका फायदा स्थानीय लोगों को भी मिलता रहा। कोका कोला का दावा है कि वह हर दिन अपनी ड्रिंक्‍स की 1.8 अरब सर्विंग्‍स बेचती है।

 

 

भारत में कब आई कंपनी

सॉफ्ट ड्रिंक के बिना भारतीय बाजार की कल्पना करना आसान नहीं है। भारत में कोका कोला की शुरुआत 1956 में हुई। भारत में किसी तरह का फॉरेन एक्सचेंज एक्ट नहीं होने के कारण कंपनी को अच्छी ग्रोथ मिली। वर्ष 1974 में इंदिरा गांधी सरकार ने भारत में फॉरेन एक्सचेंज एक्ट की शुरुआत की। हालांकि, 1977 में कंपनी को एक्ट के मुताबिक कारोबार न करने के चलते भारतीय बाजार को छोड़ना पड़ा। 1993 में उदारीकरण की नीतियों के चलते कंपनी को भारत में कारोबार करने की सरकारी अनुमति मिल गई। ज्यादा इक्विटी रखने से कंपनियों को रोकने वाला फॉरेन एक्सचेंज एक्ट अब पूरी तरह से संशोधित किया जा चुका है।

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
विज्ञापन
विज्ञापन