Home » Industry » CompaniesPathetic working condition in China's tech factories driving employees to commit suicide

चीन की फैक्ट्री बन रही हैं मजदूरों की कब्रगाह

मजदूरों से रोबोट जैसे काम कराना चाहती हैं फैक्ट्रियां

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नई दिल्ली। हांगकांग आधारित इकोनॉमिक राइट्स इंस्टीट्यूट (Economic Rights Institute) और लेबर राइट्स ग्रुप इलेक्ट्रॉनिक वॉच (Electronic Watch) द्वारा बुधवार को जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक चीनी फैक्ट्रियां मजदूरों की कब्रगाहें बनती जा रही हैं। यहां काम करने की मुश्किल परिस्थितियों और छोटी-छोटी गलतियों पर मिलने वाली सजा के चलते कर्मचारियों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। दोनों संस्थाओं ने 2010 से अब तक चीनी फैक्ट्रियों के मजदूरों द्वारा आत्महत्या किए जाने या आत्महत्या की कोशिश करने और सार्वजनिक स्थानों पर आत्महत्या करने की इच्छा जाहिर करने के 167 केस की जांच की। कई मजदूरों से बात करने के बाद, फैक्ट्रियों में सर्वे करने के बाद रिसर्चर्स इस नतीजे पर आए कि चीनी फैक्ट्रियां मजदूरों को बहुत अमानवीय तरीके से ट्रीट करती हैं।

 

इन वजहों से सुसाइड करते हैं मजदूर

सुपरवाइजर द्वारा मजदूरों के स्ट्रेस को नजरंदाज करना, काम के दौरान होने वाली छोटी से छोटी गलतियों के लिए भी सजा मिलना, नौकरी ज्वाइन करते समय बोनस मिलने का वादा किए जाने के बाद भी बोनस न मिलना और फैक्ट्रियों में मजदूरों की संख्या बढ़ते जाने के कारण जॉब सिक्योरिटी को लेकर डर जैसी वजहें मजदूरों की आत्महत्या के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

 

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इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर है बदनाम

चीन के इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स भले ही दुनियाभर में बिकते होंलेकिन इस सेक्टर की असलियत काफी भयावह है। इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर मजदूरी की खराब कंडीशन और मजदूरों को नौकरी देने की अनैतिक प्रक्रियाओं के लिए खासा बदनाम है। यहां मजदूरों को बेहद कम तनख्वाह पर हफ्ते में 80 घंटे काम करना होता हैदिन में बिना ब्रेक लिए कई घंटों तक लगातार काम करना पड़ता है और कई बार वे कैंसर फैलाने वाले कारकों के भी संपर्क में आते हैं। सुपरवाइजर्स इन मजदूरों को बुरी तरह ट्रीट करते हैंकई बार उन्हें गालियां भी देते हैं जिससे टार्गेट समय से पूरा किया जा सके।

 

मजदूरों से रोबोट जैसा काम कराने की चाह

 

स्टूडेंट्स एंड स्कॉलर्स अगेंस्ट कॉरपोरेट मिसबिहेवियर नामक लेबर राइट्स ग्रुप ने पिछले महीने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें बताया गया था कि चीन के चोंगक्विंग शहर में Apple कंपनी की एक सप्लायसर कंपनी फॉक्सकॉन (Foxconn) ने अपने स्टूडेंट एम्पलॉयीज को रोबोट की काम करने को मजबूर किया। दुनिया की सबसे बड़े कॉन्ट्रैक्ट इलेक्ट्राॅनिक मेकर कंपनी फॉक्सकॉन के चीन में कई प्लांट हैं जहां दस लाख से भी ज्यादा मजदूर काम करते हैं। इस कंपनी में पहले भी कई बार मजदूरों के शोषण की बातें सामने आई हैं।

 

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मजदूरों के लिए हालात सुधारने की कोशिश

 

इकोनॉमिक राइट्स इंस्टीट्यूट ने बताया कि फैक्ट्रियों की हालात सुधारने के लिए उसने एक इंडस्ट्री ग्रुप रिस्पॉन्सिबल बिजनेस अलायंस से मुलाकात की हैजिसमें टेक कंपनी एप्पल भी सदस्य है। संस्था ने बताया कि फॉक्सकॉन में 2010 में 13 मजदूरों ने आत्महत्या की थी। तब सोशल एक्टिविस्ट्स ने इन कंपनियों और फैक्ट्रियों की मुश्किल परिस्थितियों पर आरोप लगाया था। कुछ महीनों पहले चीन की नामी यूनिवर्सिटीज के छात्रों ने एक चीनी वेल्डिंग कंपनी Jasic Technology में वर्कर्स यूनियन बनाने में मदद कीजिससे वहां काम करने के लिए बेहतर परिस्थितियाें की मांग की जा सके।

 
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