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चीन ने 28 दवाओं से इंपोर्ट ड्यूटी हटाई, फार्मा सेक्‍टर को होगा फायदा

चीन ने भारतीय दवा कंपनि‍यों को बड़ी राहत दी है।

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नई दि‍ल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा का असर दिखने लगा है। इसी के तहत चीन ने भारतीय दवा कंपनि‍यों को बड़ी राहत दी है। उसने भारत से आने वाली करीब 28 दवाओं पर से इंपोर्ट ड्यूटी हटा दी है। इससे भारतीय दवाओं को वहां के बाजार में आसान एंट्री मि‍ल पाएगी। भारतीय फार्मा सेक्‍टर के लि‍ए यह बड़ी खबर है। 


भारत में चीन के राजदूत  Luo Zhaohui ने एक ट्वीट में बताया, 'चीन ने एक मई से 28 दवाओं पर से इंपोर्ट ड्यूटी हटा दी है। इनमें कैंसर की सभी दवाएं शामि‍ल हैं। भारतीय फार्मा कंपनि‍यों के लि‍ए यह अच्‍छी खबर है। मुझे उम्‍मीद है कि इससे भारत और चीन के बीच जो व्‍यापार असंतुलन है, उसे भवि‍ष्‍य में कम करने में मदद मि‍लेगी।'

 

चीन ने वादा कि‍या था
आर्थि‍क रि‍श्‍तों, व्‍यापार, वि‍ज्ञान और तकनीक पर भारत-चीन संयुक्‍त समूह की बैठक में व्‍यापार असंतुलन के मुद्दे पर काफी लंबी बातचीत हुई थी। उस समय चीन ने यह वादा कि‍या था कि वह इस गैप को भरने के लि‍ए कदम उठाएगा।  


आपको बता दें कि अप्रैल-अक्‍टूबर 2017-18 में चीन के साथ भारत का व्‍यापार घाटा 36.73 अरब डॉलर था। हालांकि वर्ष 2016-17 में यह 51 अरब डॉलर था। चीनी राजदूत ने यह भी कहा कि चीन कारोबारी माहौल को सुधारने की दि‍शा में और काम करेगा। बिजनेस शुरू करने में लगने वाले समय को आधा कर दि‍या जाएगा। 

 

चीन के दरवाजे और खोले जाएंगे
उन्‍होंने आगे कहा, बाहरी दुनि‍या के लि‍ए चीन के दरवाजे और खोले जाएंगे। भारतीय बि‍जनेस का स्‍वागत है। वैसे भारत ने भी चीन से नि‍वेश बढ़ाने का आग्रह कि‍या है। इस पर चीन भारत में एक इंडस्‍ट्री पार्क बनाने पर सहमत हो गया है, ताकि नि‍वेश बढ़ सके और व्‍यापार घाटे को कम करने में मदद मि‍ल सके। आगे पढ़ेंं 

 

 

 

बीते माह चीन गए थे मोदी 

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल के आखि‍र में चीन गए थे और वहां उन्‍होंने चीनी राष्‍ट्रपति‍ शी जि‍नपिंग से कई मुलाकात की। यह मोदी की चौथी चीन यात्रा थी। सूत्रों के मुताबि‍क, इन मुलाकातों में सीमा पर शांति‍ बहाली और व्‍यापार संतुलन को लेकर दोनों पक्षों के बीच चर्चा हुई। 

चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान में हुई इस अनौपचारिक मुलाकात में शी जिनपिंग ने कहा कि हम आने वाले समय में भारत और चीन के बीच सहयोग का तेज़ और सुनहरा भविष्य देखते हैं। वहीं मोदी ने कहा, कि‍ मुझे उम्मीद है ऐसी अनौपचारिक मुलाक़ातें दोनों देशों के बीच परंपरा बन जाएं। मुझे ख़ुशी होगी अगर 2019 में ऐसी मुलाकात भारत में हो सके। आगे पढ़ें 

 

 

 

लंबे समय भारतीय कपनियों के लिए बंद हैं दरवाजे 
इंटरनेशनल ट्रेड पर नजर रखने वाले जेएनयू के प्रोफेसर विश्‍वजीत धर के मुताबिक, चीन के साथ सिर्फ भारत ही कारोबारी घाटे में नहीं है। अमेरिका से लेकर यूरोपीय यूनियन तक इसी समस्‍या से जूझ रहे हैं। चीन ने एक तरफ तो अपने प्रोडक्‍ट्स को ग्‍लोबल मार्केट से भी सस्‍ता बनाकर रखा है, वहीं दूसरी ओर नॉन टैरिफ बैरियर्स लगाकर ऐसे प्रोडक्‍ट्स को अपने मार्केट में इंट्री नहीं करने देता, जिसमें वह पीछे है। फार्मास्युटिकल एक्‍सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसा नहीं है कि चीन ने फॉर्मा सेक्‍टर को प्रवेश देने से मना कर दिया है। हालांकि उन्‍होंने लंबे समय से लटका कर रखा था। 

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