Home » Industry » CompaniesBurberry burns Rs 262 crore in unsold products to protect brand

ब्रांड की शान को नहीं लगे बट्टा, इसलिए बरबरी ने जला दिए 262 करोड़ के कपड़े और परफ्यूम

ब्रिटिश फैशन ब्रांड ने अपनी एनुअल रिपोर्ट में किया खुलासा, 90 करोड़ रुपए के परफ्यूम भी नष्‍ट किए....

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लंदन। ब्रांड की छवि को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हो, इसलिए ब्रिटेन के लग्‍जरी फैशन हाउस बरबरी ने करोड़ों रुपए के फैशन और कॉस्‍मेटिक्‍स  प्रोडक्‍ट्स को खुद ही आग लगा दी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने अपनी एनुअल रिपोर्ट में खुद इस बात का खुलासा किया है। इसमें कहा गया है कि बीते कुछ साल के दौरान नहीं बिकने वाले करीब 3.7 करोड़ डॉलर (262 करोड़ रुपए) के कपड़ों और एसेसरीज  को आग के हवाले कर दिया। ब्रांड को कोई कॉपी नहीं कर ले या ब्रांड के नाम पर कोई फर्जी सामान नहीं बेच दे, इससे बचने के लिए फैशन इंडस्‍ट्री से जुड़ी कंपनियां अनसोल्‍ड कपड़ों और एसेसरीज को साल दर साल जलाती रही हैं। ऐसा अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के अलावा ब्रांड वैल्यू को संरक्षित करने के लिए किया जाता है। बरबरी ने ये सभी कपड़े पिछले साल जलाए।

5 साल  में 800 करोड़ रुपए से ज्‍यादा के प्रोडक्‍ट जलाए 
द टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच साल में बरबरी ने पिछले पांच साल में 9 करोड़ पाउंड (करीब 800 करोड़ रुपए) से ज्‍यादा के प्रोडक्‍ट्स नष्‍ट कर दिए हैं। प्रोडक्‍ट्स को जलाने का खुलासा बरबरी के हाल के बुक्स ऑफ अकाउंट्स में हुआ है। 

 

अकेले 90 करोड़ का परफ्यूम ही जलाया
बरबरी ने अपनी एनुअल रिपोर्ट में बताया कि उसने करीब 90 करोड़ रुपए के परफ्यूम्स और कॉस्मेटिक्स जलाए। कंपनी को 2017 में अमेरिकी कंपनी कॉटी के साथ नई डील करने के बाद बर्बाद करने पड़े। कंपनी  ने कहा कि कॉटी उसके लिए नए स्‍टॉक तैयार कर रही है, ऐसे में उसने अपना पुराना स्‍टॉक जलाना पड़ा।  

 

भारत में 2008 में खोला था पहला स्‍टोर 

बरबरी ने भारत में अपना पहला स्टोर 2008 में खोला था। कहा जा रहा है कि कंपनी ने इतने बड़े पैमाने पर उत्पादों को इसलिए बर्बाद किया, ताकि उसके ब्रांंड की वैल्‍यू बनी रहे। बरबरी अपने अनोखे ट्रेंच कोर्ट, चेक वाले स्कार्फ और बैग्‍स के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। दुनियाभर में फैले अरबों डॉलर के डुप्‍लीकेट कारोबार में सबसे ज्यादा इसी कंपनी के डिजाइन कॉपी किए जाते हैं। इसके चलते अपनी ब्रांड वैल्‍यू को बनाए रखने के लिए बरबरी को अच्‍छी खासी मेहनत करनी पड़ रही है।  

 

आगे पढ़ें- बरबरी को सस्‍ते में सामान बचेना गवारा नहीं...  

सस्‍ते में सामान बेचना गवारा नहीं 
मैनचेस्‍टर मेट्रोपॉलिटेन यूनिवर्सिटी में फैशन बिजनेस की लेक्‍चरर मारिया मैलोन के मुताबिक, फैशन ब्रांड से जुड़ी बरबरी जैसी कंपनियां अपने प्रोडक्‍ट की न तो कीमत घटाती हैं और न ही इनपर किसी तरह का डिस्‍काउंट ऑफर करती हैं। कंपनियों का मानना है कि इससे उसनकी ब्रैंड वैल्यू घटती है। दरसअल इस तरह के प्रोडक्‍ट की बिक्री का कोई ठोस अंदाजा और आंकड़ा दोनों नहीं होता है। यही कारण है कि कंपनियों की सेल और प्रोडक्‍शन में कभी कभी भारी गैप हो जाता है। कॉस्मेटिक्स एक वक्त के बाद खराब हो जाते हैं। ऐसे में उन्‍हें नष्‍ट करना मजबूरी हो जाता है।

 

फैशन वेस्‍ट घटाने की कोशिश में बरबरी 
द टेलिग्राफ के अनुसार, कंपनी ने हाल ही में द एलीन मैकआर्थर फाउंडेशन के साथ 'मेक फैशन सर्कुलर' मुहिम शुरू किया है। इसका मकसद फैशन वेस्‍ट को कम करना है। कंपनी के एक स्‍पोक्‍सपर्सन का कहना है कि जब प्रोडक्‍ट्स का डिस्‍पोजल जरूरी हो जाता है, हम उसे एक जिम्‍मेदार तरीके से करते हैं। 

 

 

आगे पढ़ें- इस लिस्‍ट में बरबरी अकेली नहीं 


 

इस लिस्‍ट में बरबरी अकेली नहीं 
बता दें कि ब्रांड वैल्‍यू बनाए रखने के लिए पश्चिमी देशों में फैशन इंडस्‍ट्री से जुड़ी कंपनियां इस तरह के कई कदम उठाती हैं। Cartier और Montblanc जैसे ब्रांड रन करने वाली रिचमोंट कंपनी ने पिछले दो साल के दौरान 43 करोड़ ब्रिटिश पाउंड ( करीब 3800 करोड़ रुपए) कीमत की घड़ी बाई बैक की हैं। एनॉलिस्‍ट का कहना है कि इन घडि़यों के कुछ पार्ट्स को री-साइकिल किया जाएगा, जबकि बाकी हिस्‍सा फेंक दिया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकता फैशन कंपनियों के इन कदमों पर सवाल भी खड़े करते रहे हैं  

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