बिज़नेस न्यूज़ » Industry » CompaniesRcom को नीलामी से बचाने के बाद अनिल अंबानी ने बेचा रिलायंस पावर का हिस्‍सा

Rcom को नीलामी से बचाने के बाद अनिल अंबानी ने बेचा रिलायंस पावर का हिस्‍सा

अनिल अंबानी ने झारखंड इंटीग्रेटेड पावर में रिलायंस पावर (RPower) की अपनी सारी हिस्सेदारी झारखंड ऊर्जा विकास निगम को बेची

1 of

नई दिल्‍ली। टेलिकॉम कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस यानी Rcom को बिकने से बचाने में कामयाब होने के एक दिन बाद ही अनिल अंबानी ने झारखंड इंटीग्रेटेड पावर में रिलायंस पावर (RPower) की अपनी सारी हिस्सेदारी झारखंड ऊर्जा विकास निगम को 112.64 करोड़ रुपए में बेच दी है। यह सौदा ऐसे समय हुआ है, जब अनिल अंबानी के नेतृत्‍व वाला रि‍लायंस ग्रुप कर्जदारों का बकाया नहीं चुका पाने के चलते कानूनी मुकदमों का सामना कर रहा है। कर्ज कम करने के लिए कंपनी अपनी कई एसेट्स को बेच रही है। 

 

स्टॉक एक्सचेंज को कंपनी ने दी जानकारी 

स्टॉक एक्सचेंज को भेजी जानकारी में RPower ने बताया कि कंपनी ने झारखंड इंटीग्रेटेड पावर में अपनी पूरी हिस्सेदारी 112.64 करोड़ रुपये में झारखंड ऊर्जा विकास निगम को बेच दी है। RPower ने 4,000 मेगावॉट क्षमता की अल्ट्रा मेगा बिजली परियोजना (UMPP) 1.77 रुपए प्रति यूनिट की न्यूनतम बोली लगाकर 2009 में हासिल की थी। RPower जमीन अधिग्रहण में देरी का हवाला देकर 2015 में ही इस परियोजना से निकल गई है। झारखंड इंटीग्रेटेड पावर ने तिलैया मेगा बिजली परियोजना के लिए किए गए बिजली खरीद समझौता करने के बाद भी इसे निलंबित कर दिया था। यह समझौता 10 राज्यों की 18 बिजली कंपनियों से 25 साल के लिए किया गया था। 
 

 

8 अरब रुपए की बैंक गारंटी भी मिली थी

समझा जाता है कि कंपनी को 10 राज्यों के साथ किए गए बिजली करार के लिए 8 अरब रुपए की बैंक गारंटी भी मिली थी। झारखंड के अलावा गुजरात, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों ने तिलैया यूएमपीपी से बिजली खरीद का करार किया था। कंपनी ने इस पर 36,000 करोड़ रुपए के निवेश योजना बनाई थी।  झारखंड का नॉर्थ कर्णपुरा कोयला क्षेत्र केरंदरी कोयला क्षेत्र इस परियोजना के लिए आवंटित किया गया था। 

 

 

इन्‍सॉल्‍वेंसी में जाने से बची आरकॉम 
बता दें कि इससे पहले रिलायंस कम्‍यूनिकेशन के इन्‍सॉलवेंसी में जाने का खतरा पैदा हो गया था। नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल यानी NCLT ने अनिल अंबानी के नेतृत्‍व वाली रिलायंस कम्‍युनिकेशन (आरकॉम) के खिलाफ बैंकरप्सी  की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था। आरकॉम  के खिलाफ बैंकरप्‍सी के लिए स्‍वीडन के टेलिकॉम इक्विपमेंट मेकर एरिक्सन ने NCLT का दरवाजा खटखटाया था। एरिक्सन की ओर से तीन याचिकाएं दायर की गई थीं और तीनों को NCLT ने स्‍वीकार कर लिया। हालांकि इसके बाद आरकॉम और एरिक्सन के बीच समझौता हो गया और अनिल अंबानी की कंपनी एरिक्सन को पैसा देने को तैयार हो गई। बता दें कि एरिक्सन का आरकॉम पर लगभग 1,150 करोड़ रुपए बकाया है। इसी की वसूली के लिए स्‍वीडिश कंपनी ने यह याचिका दायर की थी। 

 

 

 

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट