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जिस पर लगाया है अंबानी ने दांव, उसी पर भिड़ गए भाजपा और कांग्रेस

डिफेंस को अनिल अंबानी अपना मुख्य कारोबार बनाना चाहते हैं, पर पहली डील पर ही उन्हें किरकरी झेलनी पड़ी है

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मुंबई। देश के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी के छोटे भाई और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG)के प्रमुख  अनिल अंबानी ने कहा है कि वाले दिनों में डिफेंस ही उनकी कंपनी का मुख्य कारोबार होगा। कंपनी आने वाले दिनों में इसी पर फोकस करेगी। हालांकि उनका यह मंसूबा इतना आसान नहीं दिख रहा है। उनकी कंपनी की ओर से किया गया पहला डिफेंस सौदा ही उनपर भारी पड़ रहा है। दरसअल राफेल विमान पर उनकी कंपनी की ओर से फ्रांसीसी कंपनी की साथ की गई डील राजनीतिक बयानबाजी में फंसती दिख रही है। हालत यह है कि खुद आंबानी को दो बार राहुल गांधी को खत लिखना पड़ा है। 

 
आखिर क्या है अंबानी का प्लान 
दरअसल ADAG पर इस समय करीब 40 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा का कर्ज है। ADAG कर्ज से मुक्त होने के लिए अपनी कई कंपनियों की हिस्सेदारी बेच रही है। इसके तहत अंबानी ने अपनी टेलिकॉम कपंनी ऑरकॉम का ज्यादातर बिजनेस बड़े भाई मुकेश अंबानी की जियो को बेच दिया। ग्रुप की कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर का मुंबई बिजली कारोबार अडाणी समूह को 18,800 करोड़ में बेचने का फैसला किया गया है। कनाडा की  PSP Investments रिलायंस इन्फ्रा पावर जनरेशन में 49 फीसदी का स्टेक खरीद रही है। ADAG की कोशिश है कि वह अपना कर्ज चुकाकर डिफेंस सेक्टर में फोकस करे। 
 
डिफेंस पर अंबानी ने लगाया है दांव 
अनिल अंबानी अब अपना पूरा फोकस डिफेंस पर लगा रहे हैं। उन्होंने पिछले साल ही कहा था कि आने वाले दिनों में डिफेंस ही उनके ग्रुप का प्रमुख कारोबार होगा। कंपनी जलपोत और फाइटर जेट बनाने से लेकर सेना के लिए अन्य इक्विपमेंट बनाने पर फोकस करेगी। ग्रुप ने शिप बनाने वाली पीपावास डिफेंस एंड ऑफसोर इंजीनियरिंग में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी। कंपनी भारत को राफेल विमान की सप्लाई करने वाली डासाल्ट के साथ मिलाया है। जहां वह आने वाले  दिनों में वह राफेल के मेंटीनेंस से जुड़े जरूरी कल पुर्जे बनाएगी।  कंपनी को उम्मीद है कि आने वक्त में उसे सालाना 1 लाख करोड़ के आर्डर डिफेंस आर्म्ड फोर्सेज से हासिल हो सकते हैं। ग्रुप को फोकस नेवी, इंडियन एयरफोर्स, और आर्मी के लिए एडवांस वैपन प्लेटफॉर्म और मिलिट्री हार्डवेयर के क्षेत्र में  प्रमुख मैन्यूफैक्चरर और सल्लायर बनना है।  
 
आगे पढ़ें- पहली डील ही विवाद में फंसी 
 
पर पहली ही डील पड़ी राजनीतिक विवाद में 
हालांकि अंबानी की डिफेंस कंपनी को मिली पहली बड़ी डील ही विवाद में फंस गई है। राफेल डील को लेकर कांग्रेस लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए है। उसका सीधा आरोप है कि अनिल अंबानी को लाभ पहुंचाने के लिए ही मोदी सरकार ने पूर्व की यूपीए सरकार में की गई करीब 125 फाइटर जेट की डील को छोट करके 36 जेट का कर दिया। जबकि डील की लागत बढ़ गई। हालांकि भाजपा और सरकार का दावा है कि यूपीए के दौर में की गई डील में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का क्लॉज नहीं जोड़ा गया था, जब नई डील में दासाल्ट टेक्नोलॉजी का भी ट्रांसफर करेगी। यही कारण है कि यह डील महंगी पड़ी। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए ही दासाल्ट ने रिलायंस डिफेंस के साथ करार किया है।  
 
 
आगे पढे़ं- 12 साल में छोटे भाई से 12 गुना अमीर हो गए मुकेश अंबानी, पलट गया खेल
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