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हनुमान जयंती 2018:दर-दर भटक रहे थे जुकरबर्ग, इस हनुमान मंदिर में खुला था किस्‍मत का ताला

हनुमान जयंती 2018:जुकरबर्ग ने तो ऐसे दौर में मंदिर का दौर किया था, जब वह फेसबुक को लेकर लगातार मात खा रहे थे.....

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नई दिल्‍ली। 2008 में अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने अपना प्रचार अभियान शुरू किया तो उनकी जेब में बहुत सी चीजों के साथ हनुमान जी की  एक मूर्ति भी थी। यह ओबामा यह मूर्ति बहुत सालों तक जेब में रखते रहे। दरअसल हनुमान एक ऐसे देवता है, जो अपने रंग, रूप और काम के लिए हिंदुओं और भारत के अलावा विदेशों में भी फेमस हुए। सिर्फ ओबामा ही नहीं दुनिया के कई ऐसे अरबपति भी हुए जिन्‍हें हनुमान जी ने प्रभावित किया। इसमें 2 सबसे बड़े नाम फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और एप्‍पल के संस्‍थापक रहे स्‍टीव जॉब्‍स के हैं। 

 

दरअसल आध्‍यात्मिक शांति के लिए इन दोनों ने किसी दौर में भारत के एक हनुमान मंदिर का दौरा किया था। जुकरबर्ग ने तो ऐसे दौर में मंदिर का दौर किया था, जब वह फेसबुक को लेकर लगातार मात खा रहे थे। यहां वह शांति के लिए आए थे। यहां आने के बाद ही उन्‍हें अपने जीवन के मकसद का पता चला।  

 

ये है नीम करोली आश्रम का हनुमान मंदिर 
दरअसल उत्‍तराखंड के नीम करोली बाबा आश्रम का हनुमान मंदिर है। नीम करोली आश्रम नैनीताल में स्थित है। लोग दूर-दूर से इस मंदिर में आते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह आश्रम कभी बाबा नीम करोली ने बनवाया था। बाबा नीम करोली को हनुमान का अवतार भी कहा जाता है। यही वह मंदिर हैं, जहां कभी फेसबुक और एप्‍पल जैसी कंपनियों की किस्‍मत का ताला खुला। नीम करोली बाबा ने अपने जीवनकान के दौरान देश और दुनिया में करीब 108 हनुमान मंदिर और आश्रम बनवाए।

जुकरबर्ग ने खोला राज तब दुनिया ने जाना 
दरअसल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका दौरे के मौके पर फेसबुक के दफ्तर गए थे। यहां टाउन हॉल के दौरान फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने नीम करोली आश्रम से जुड़ी कुछ यादें ताजा की थीं। जुकरबर्ग के मुताबिक, जिस समय में वह बुरे दौर से गुजर रहे थे, उस समय उन्‍होंने आध्‍यात्मिक शांति के लिए इस आश्रम की शरण ली थी। इस आश्रम का पता उन्‍हें एप्‍पल के को फाउंडर रहे मार्क जुकरबर्ग ने बताया था। बकौल जुकरबर्ग, जॉब्‍स ने मुझे बताया था कि कंपनी को लेकर अगर मुझे अपनी योजनाओं को पूरा करने के‍ लिए मुझे फिर से रिकनेक्‍ट होने की जरूरत है। इसके लिए मुझे एक महीने के लिए नीम करोली मंदिर में रहना चाहिए।

स्‍टीव जॉब को भी यहीं मिला था सक्‍सेज का मंत्र 
जुकरबर्ग के मुतातबिक, यही वो जगह थी जहां कभी स्‍टीव जॉब्‍स को भी अपने जीवन के मायने पता चले थे और एप्‍पल को नई ऊंचाईयों पर ले जाने में सफल रहे थे। बता दें कि जॉब्‍स इस जगह 1970 के दशक में आए थे।  जुकरबर्ग के मुताबिक, जॉब्‍स को यहीं आकर पता चला था कि वास्‍तव में एप्‍पल को लेकर उनकी सोच क्‍या है। बताया जाता है कि हॉलीवुड एक्‍ट्रेस जूलिया रॉबर्ट को भी इस मंदिर से बेहद जुड़ा रहा है।  

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