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पश्‍मीना शॉल पर भी दिखने लगा GST का असर, 60-70% तक गिरा बिजनेस

क्रिसमस और न्‍यू ईयर के लिए मिलने वाले ऑर्डर भी इस साल कारोबारियों को नहीं मिले हैं।

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नई दिल्‍ली. देश में GST लागू होने का असर अब दुनिया भर में मशहूर कश्‍मीर के पश्‍मीना शॉल बिजनेस पर भी दिखने लगा है। पश्‍मीना शॉल के मैन्‍युफैक्‍चरर्स और होलसेलर्स का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल बिजनेस 60-70 फीसदी तक डाउन चल रहा है। कारोबारियों का कहना है कि अभी तक पश्‍मीना पर कोई भी टैक्‍स नहीं था लेकिन अब GST लागू होने के बाद इसे भी टैक्‍स के दायरे में लाया गया है, जिससे इसकी कीमतें बढ़ी हैं और बिक्री सुस्‍त पड़ी है। क्रिसमस और न्‍यू ईयर के लिए मिलने वाले ऑर्डर भी इस साल कारोबारियों को नहीं मिले हैं। काम कम होने की वजह से कारोबारियों को अपने कारीगरों को काम से हटाना भी पड़ा है। 

 

इस सीजन बिजनेस अच्‍छा होने की नहीं है उम्‍मीद 
कश्‍मीर वीव कंपनी लिमिटेड के नाजिर अब्‍दुल्‍ला ने moneybhaskar.com से बातचीत में बताया कि पिछले साल इस वक्‍त तक जितना बिजनेस था, उसके मुकाबले इस साल उनके बिजनेस में 70 फीसदी तक की गिरावट है। वैसे तो अभी सीजन की शुरुआत ही है लेकिन बाकी के सीजन में बिजनेस बहुत अच्‍छा जाने की उम्‍मीद नहीं है। उन्‍होंने बताया कि नवंबर तक क्रिसमस पर पूरा किए जाने वाले ऑर्डर आ जाते थे, जो लगभग पूरे भी हो जाते थे। लेकिन इस बार अभी तक ऑर्डर नहीं आए हैं। उनके यहां पहले 20 लोग काम करते थे लेकिन अब काम न होने के चलते केवल 6 ही लोग काम कर रहे हैं।  

 

पहले नहीं था टैक्‍स, अब लगता है GST​ 
अमीन शॉल स्‍टोर के मालिक नजीर ने बताया कि अभी तक पश्‍मीना शॉल पर कोई टैक्‍स नहीं था लेकिन अब यह भी जीएसटी के दायरे में आ गई है। जिसके चलते पश्‍मीना शॉल्‍स की कीमत में इजाफा हुआ है। पहले से ही महंगी पश्‍मीना अब और महंगी हो चली है, जिससे इसकी बिक्री प्रभावित हुई है। कश्‍मीर में पर्ल क्राफ्ट्स के मालिक इरफान अहमद ने बताया कि 2016 तक बिजनेस सही चल रहा था। ग्रोथ नहीं थी तो गिरावट भी नहीं थी लेकिन पिछले साल से बिजनेस में गिरावट शुरू हुई और इस साल भी यह सिलसिला जारी है। पिछले साल नोटबंदी की वजह से बिजनेस में गिरावट दर्ज की गई थी। उसका असर पूरे साल इसकी मैन्‍युफैक्‍चरिंग पर रहा। अब GST​ में पश्‍मीना को टैक्‍स के दायरे में लाए जाने से बिक्री गिरी है।

 

पश्‍मीना पर कैसे लग रहा है GST​ 
धागे पर GST 18 फीसदी, डाइंग पर 12 फीसदी और पूरी तरह से तैयार माल पर 5 फीसदी GST है। इसके चलते हैंडलूम और मशीन दोनों से बनी पश्‍मीना शॉल पर GST की दर 5 फीसदी है। 

 

रॉ मैटेरियल महंगा होने से प्रॉडक्‍शन हुआ कम  
बांडे शॉल्‍स के आदिल बांडे ने बताया कि GST की वजह से लोग पहले जहां 2 शॉल खरीदते थे अब केवल 1 ही शॉल खरीद रहे हैं। वहीं मैन्‍युफैक्‍चरर्स भी कच्‍चे माल का दाम GST से बढ़ने के चलते कम रॉ मैटेरियल ला रहे हैं, जिससे प्रॉडक्‍शन भी कम है। 

 

कहां सबसे ज्‍यादा सप्‍लाई 
पश्‍मीना शॉल के बिजनेस से कश्‍मीर के 60 फीसदी लोग जुड़े हैं। कश्‍मीर से इनकी सप्‍लाई सबसे ज्‍यादा दिल्‍ली और नॉर्थ इंडिया में होती है। बाहर के देशों की बात करें तो यूरोप, जर्मनी आदि देशों में भी कश्‍मीर से पश्‍मीना शॉल का एक्‍सपोर्ट होता है।  

 

बकरी से मिलती है पश्‍मीना वूल 
लद्दाख में हिमालयन शॉल्‍स के ओनर अब्‍दुल बशीर ने बताया कि पश्‍मीना वूल सबसे अच्‍छा वूल माना जाता है। यह बहुत ज्‍यादा ठंडी जगहों पर पाई जाने वाली बकरी से मिलता है। भारत में ऐसी बकरी लद्दाख में पाई जाती है। भारत में इसे पश्‍मीना वूल कहते हैं लेकिन यूरोप के लोग इसे कैश्‍मीर वूल कहते हैं। पश्‍मीना से बनने वाली शॉल पर कश्‍मीरी एंब्रॉयडरी की जाती है। बशीर ने बताया कि प्‍योर पश्‍मीना 3000 रुपए से लेकर 1 लाख रुपए तक हो सकती है। इसमें डिजाइन और एंब्रॉयडरी मायने रखती है। 

 

केवल कश्‍मीर में होती है मैन्‍युफैक्‍चरिंग 
लद्दाख से पश्‍मीना वूल कश्‍मीर आता है और वहां इससे धागे और फिर धागे से पश्‍मीना शॉल बनाने की प्रोसेस और एंब्रॉयडरी होती है। वैसे तो पश्‍मीना शॉल फुली हैंडमेड होती है लेकिन कहीं-कहीं अब इसे मशीन से बनाया जाने लगा है। भारत में केवल कश्‍मीर में ही इसकी मैन्‍युफैक्‍चरिंग होती है। कश्‍मीर में कारीगर घर-घर में वूल से धागा बनाते हैं और फिर शॉल बनाई जाती है। उसके बाद उस पर एंब्रॉयडरी होती है। किसी-किसी बहुत ज्‍यादा बारीक और हैवी वर्क वाली को पूरा करने में में कारीगरों को 1 साल तक का समय लग जाता है। 

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