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स्टील की बढ़ती कीमतों से परेशान साइकिल-इंजीनियरिंग गुड्स इंडस्ट्री, 10-15 फीसदी बढ़ाएंगी कीमत

स्टील प्राइस बढ़ने से रॉ मैटेरियल की तरह इस्तेमाल कर रही इंजीनियरिंग गुड्स बनाने वाली इंडस्ट्री की परेशानी बढ़ गई है।

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नई दिल्ली..लगातार स्टील प्राइस बढ़ने से इसका रॉ मैटेरियल की तरह इस्तेमाल कर रही साइकिल,  इंजीनियरिंग गुड्स, यूटेन्सिल्स बनाने वाली इंडस्ट्री की परेशानी बढ़ गई है। इंडस्ट्री के मुताबिक स्टील कंपनियों  ने बीते 4 महीने में चार बार कीमते बढ़ाई हैं जिससे उनकी लागत 15 से 20 फीसदी तक बढ़ चुकी है। जीएसटी का कारोबार पर नेगेटिव असर पड़ने के कारण वह कीमतें नहीं बढ़ा पाएं थे लेकिन अब उनके पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं।

 

साइकिल हो जाएगी 10-12 फीसदी महंगी

 

लुधियाना की एसोसिएशन यूनाइटेड साइकिल और पार्ट्स मैन्युफैक्चर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट इंद्रजीत सिंह ने कहा कि रॉ स्टील की कीमतें 9,000 पर टन तक बढ़ गई है जिसके कारण लागत काफी बढ़ गई है। अभी तक इंडस्ट्री ने कीमतें नहीं बढ़ाई है लेकिन अगर केंद्र सरकार स्टील की कीमतें कम करने के लिए कोई कदम नहीं उठाती है तो कीमतें बढ़ना तय है। कंपनियां 10-12 फीसदी तक कीमतें बढ़ा सकती हैं। 

 

क्राइसिस में छोटी कंपनियां 

 

सरकार के इंपोर्ट ड्यूटी, एंटी डंपिंग ड्यूटी, काउंटरवेलिंग ड्यूटी, सेफगार्ड ड्यूटी, एमआईपी और बीआईएस लगाने के बाद भारत में स्टील इंपोर्ट करना महंगा और मुश्किल हो गया है। दिल्ली की इंडस्ट्रियल एसोसिएशन एपेक्स चैंबर के अध्यक्ष कपिल चोपड़ा ने moneybhaskar.com  को बताया कि स्टील प्राइस बढ़ने से एक साल में कारोबारियों की लागत 70 से 80 फीसदी बढ़ चुकी है जिसके कारण कई छोटी यूनिट सरवाइव नहीं कर पा रही हैं। पहले नोटबैन फिर जीएसटी के कारण कारोबार कम रहने के कारण कीमतें नहीं बढ़ाई गई थी लेकिन अब वह कीमतें 12 से 15 फीसदी तक बढ़ा सकती है।

 

चीन से बढ़ रहा है इम्पोर्ट

 

मेटल एंड स्टेनलेस स्टील मर्चेंट एसोसिएशन (एमएसएमए) के प्रेसिडेंट जितेंद्र शाह ने बताया कि स्टील कंपनियों ने 8 दिन पहले ही कार्बन बेस्ड स्टील की कीमतें 4 रुपए प्रति किलो बढ़ाई है। पहले ही सरकार ने स्टील पर एमआईपी, ड्यूटी और बीआईएस मानकों ने स्टील इंपोर्ट को महंगा कर दिया है,जिसके कारण लोकल इंडस्ट्री के पास घरेलू कंपनियों से स्टॉक खरीदने का विकल्प नहीं बचता है। एमएसएमई कारोबारी अब चीन से सीधे फाइनल प्रोडक्ट का इंपोर्ट कर रही हैं। इनमें यूटेंसिल्स, नट, बोल्ट, मेडिकल इक्विपमेंट बनाने वाली एमएसएमई शामिल हैं। स्टेनलेस यूटेंसिल्स कारोबारी और एसोसिएशन प्रमुख देवकीनंदन बागला ने बताया कि घरेलू स्टील कंपनियों के महंगे स्टील और बढ़ती मनमानी के कारण कई कारोबारी चीन से सीधे फाइनल प्रोडक्ट मंगा रहे हैं, क्योंकि स्टील इंपोर्ट करने पर ड्यूटी है, फाइनल प्रोडक्ट पर नहीं।

 

 

घरेलू कंपनियों पर मनमानी का आरोप

 

कारोबारियों के अनुसार घरेलू कंपनियां जिंदल, सेल आयरनओर और कोकिंग कोल की कीमतें बढ़ने के कारण कीमतें बढ़ा रही हैं। बीते छह से आठ महीने में स्टील पर कीमतें 2,500 रुपए प्रति टन से लेकर 9,000 रुपए प्रति टन तक बढ़ गई है। जिसकी वजह से छोटी कंपनियों पर प्रेशर बढ़ गया है।

 

आगे पढ़े - सरकार ने स्टील इंपोर्ट रोकने के लिए क्या कदम उठाए

 

 

इन प्रोडक्ट पर लगी एमआईपी

 

 

- सरकार ने पहले ही स्टील इंपोर्ट पर सेफगार्ड ड्यूटी, काउंटरवेलिंग, एंटी डंपिंग ड्युटी और इंपोर्ट ड्युटी लगाई हुई है।

 

- सरकार ने कोल्ड रोल्ड स्टील पर 4.6 से 57.4 पर्सेंट तक एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई है। एंटी डंपिंग ड्यूटी चीन, अमेरिका, साउथ अफ्रीका थाइलैंड और ताइवान से आने वाले स्टील उत्पादों पर लगी है।

 

- स्टील प्रोडक्ट पर 20 सेफगार्ड ड्यूटी लगाई हुई है। सेफगार्ड ड्यूटी को आगे जारी रखना है या नहीं, इस पर अप्रैल 2016 में फैसला लेना है।

 

- स्टील के अलग अलग प्रकार पर 12.5 से 20 पर्सेंट इंपोर्ट ड्यूटी लगी हुई है।

 

- स्टील और सटील अलॉय प्रोडक्ट पर 10-12% की काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगी हुई है।

 

- सरकार ने बीआईएस स्टैंडर्ड पर खरे स्टील के इस्तेमाल का आदेश भी दिया है। ये 4 दिसंबर, 2016 से प्रभावी है।

 

- स्टील की कुछ केटेगरी पर मिनिमम इंपोर्ट प्राइस (एमआईपी) लगा हुआ है।

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