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कार का ऐसे करेंगे इस्तेमाल तो 3 गुना तक कम आएगा खर्च

समझें, ऑफिस जाने के लिए कार या कैब में से किसे चुनना है बेहतर

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नई दिल्ली. भारत में आम तौर पर कार रखना स्टेटस सिंबल के तौर पर देखा जाता हैं। कार फाइनेंस कराने से लेकर ड्राइवर, फ्यूल, बीमा, पार्किंग शुल्क और मेंटीनेंस खर्च के चलते अब कार रखना महंगा पड़ रहा है। अर्न्स्ट एंड यंग (Ernst & Young) के आंकड़ों के मुताबिक एक दिन में खुद की कार से 50 किलोमीटर आना-जाना ज्यादा महंगा पड़ता है। ऐसा तब होता है, जब व्यक्ति कार खुद चलाएं। वहीं ड्राइवर रखकर एक दिन में 20 किलोमीटर का सफर तय करते हैं, तो आपका सफर कैब के मुकाबले तीन गुना ज्यादा महंगा पड़ता है। 

 

लंबी दूरी के लिए कार रखना फायदेमंद

रोजाना 50 से 100 किलोमीटर सफर करने के लिए खुद की कार रखना फायदे का सौदा साबित हो सकता है। मतलब कम दूरी के सफर के लिए केवल स्टेटस सिंबल के तौर पर कार रखना एक तरह से घाटे का सौदा होगा। इससे बेहतर होगा कैब का सहारा लिया जाए। 

 

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माइक्रो सेगमेंट कैब का औसत किराया

7 किलोमीटर - 145 रुपए
12 किलोमीटर- 205 रुपए 
20 किलोमीटर 305 रुपए 
 
शेयर कैब का औसत किराया
24 किमोमीटर- 209 रुपए 

 

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शेयर कैब की परेशानी 

पूल कार या फिर शेयर कैब में सफर करने में काफी समय की बर्बादी होती है, क्योंकि कैब को कई ग्राहकों को लेने और छोड़ने जाना पड़ता है। ऐसे में ज्यादातर लोग फुल कार बुक करते हैं। देश के बड़े शहरों में शेयर कार की सुविधा उपलब्ध हैं। इसमें Ola और Uber दो प्रमुख कैब उपलब्ध कराने वाली ऐप बेस्ड कंपनियां हैं।

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