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जब राजेंद्र प्रसाद ने विपक्ष के सवाल उठाने पर लौटा दी थी मार्क-7 जगुआर कार

आज देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का है जन्मदिन

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नई दिल्ली. आज के दौर के नेता अपनी सैलरी खुद ही बढ़ाने में यकीन करते है। साथ ही महंगे  गिफ्ट लेने से भी परहेज नहीं करते हैं। यहां तक की अपने ऊपर लगने वाले आरोपों को राजनीतिक साजिश बताकर बच निकलते हैं। लेकिन भारत में कुछ ऐसे भी नेता हुए हैं, जिन्होंने विपक्ष के एक आरोप पर अपने पैसों से खरीदी कार तक कंपनी को लौटा दी। दरअसल आज देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का जन्मदिन है, जिन्हें लोग उनके उसूलों के लिए याद करते हैं। 

2500 रुपए लेते थे सैलरी 

राजेंद्र प्रसाद को उस वक्त राष्ट्रपति के पद अनुरुप 10 हजार सैलरी मिलती थी। लेकिन वो अपनी आधी सैलरी ही लेते थे। उनका कहना था कि इतने पैसों में उनका घर खर्च आराम से चल जाता है। बाकी आधा पैसे अपने खाते में ही छोड़ देते थे। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के परिवार जन बताते हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति रहते अपने बाद के दिनों में वेतन का सिर्फ एक चौथाई (2500 रुपए) लेना मंजूर किया था। 

 

आगे पढ़ें- विपक्ष के आरोपों पर लौटा दी थी कार

 

आरोपों पर लौटा दी थी कार

राजेंद्र प्रसाद ने अपनी सैलरी से की गई बचत के पैसों से 1956 मॉडल की मार्क-7 जगुआर कार खरीदी थी। इसके बावजूद विपक्ष की ओर से उन पर आरोप लगाया कि इतनी कम सैलरी में कोई राष्ट्रपति पद पर रहते हुए कार कैसे खरीद सकता है। किसी ने ध्यान दिलाया कि इतने वेतन में कार तो नहीं खरीदी जा सकती। बस फिर क्या था, उन्होंने अपनी कार कंपनी को लौटा दी।

 

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श्यामाचरण शुक्ला ने खरीदी थी राजेंद्र प्रसाद की कार

राजेंद्र प्रसाद की 1956 मॉडल की मार्क-7 जगुआर कार को श्यामाचरण शुक्ला ने खरीदा था जिनकी माइंस की कंपनी थी। वे उसी वक्त विधायक बने थे। उस जमाने में यह कार डबल कार्बोरेटर वाली सिक्स सिलेंडर कार था। समय बीतता गया और कार नागपुर में रख दी गई। जिसे अमितेश शुक्ल रायपुर लेकर आ गए।

 

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