मिसाल /बेरोजगारी में आदिवासी महिला ने घर में उगाई मशरूम, होने लगी 15 हजार रुपए प्रतिमाह की कमाई

  • जमातिया त्रिपुरा के गोमाती जिले की तिवुरुपाबरी (TWirupabari) गांव में रहती हैं।
  • 34 वर्षीय जमातिया के परिवार का आगे चलकर मशरूम की खेती आमदनी का मुख्य जरिया है।

 

Money Bhaskar

May 27,2019 07:04:27 PM IST

नई दिल्ली. अक्सर कहा जाता है कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती है। इस कहावत को त्रिपुरा की आदिवासी महिला थाईबलंग जमातिया ने सच कर दिखाया। जमातिया त्रिपुरा के गोमाती जिले की तिवुरुपाबरी (TWirupabari) गांव में रहती हैं।जो कि एक पहाड़ी इलाका है। यहां रोजगार का कोई साधन नहीं उपलब्ध था। ऐसे में जमातिया ने घर में कमरे से मशरूम की खेती शुरू की, जिसने जमातिया की किस्मत बदलकर रख दी।

मशरुम की खेती कमाई का मुख्य साधन

34 वर्षीय जमातिया के परिवार का आगे चलकर मशरूम की खेती आमदनी का मुख्य जरिया है। जमातिया के परिवार में कुल 5 लोग हैं। उनकी तरह ही उनके पति भी किसान हैं,जो मशरूम उगाने में उनकी मदद करते हैं। जमातिया के मुताबिक मशरूम बेचकर उन्हें प्रतिमाह करीब 10 से 15 हजार रुपए की कमाई हो जाती है। जमातिया मशरूम लोकल मार्केट किला बाजार में 250 रुपए प्रति किग्रा के हिसाब बिक्री करती हैं।

आय के साथ पौष्टिक आहार का मुख्य जरिया बना मशरुम

त्रिपुरा के आदिवासी झूम खेती करने के आदी है। इसकी वजह से त्रिपुरा के लोगों को मशरूम की खेती करने में मदद मिलती है। बता दें कि यहां के पहाड़ी इलाके में अनाज उगाना आसान नहीं होता है। लेकिन मशरूम न सिर्फ इन लोगों के लिए आय का साधन का साधन बना हुआ है, बल्कि इसे खाकर खाने के लिए भी एक पौष्टक आहार बन गया है। जमातिया अपनी कमाई से बच्चों को इंग्लिश स्कूल पढ़ने भेजती हैं। जमातिया खुद लिख और पढ़ नहीं सकती हैं। लेकिन अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहती हैं।

सरकार ने मशरूम की खेती को बताया उपलब्धि

जमातिया बताती हैं कि मशरूम की खेती काफी फायदेमंद होती है। साथ ही इसमें लागत भी काफी कम आती है। एक बेरोजगार युवा मशरूम की खेती करके अच्छी कमाई कर सकता है। त्रिपुरा सरकार के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने इकोनॉमिक रिव्यू रिपोर्ट में मशरूम की खेती की एक बड़े उपलब्धि के तौर पर पेश किया था। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017-18 में राज्य में मशरूम का प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन तेजी से बढ़ा है, जिसकी वजह से कई नए लोग मशरूम की खेती की तरफ आ रहे हैं। मशरूम की खेती के मास्टर ट्रेनर और फॉर्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन की सीईओ के सुदीप मजूमदार के मुताबिक त्रिपुरा में मशरूम की खेती ट्रेंड बढ़ा है, क्योंकि मशरूम की खेती त्रिपुरा का आदिवासियों के लिए आय का एक बड़ा साधन बन रहा है।

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