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इनोवेशन /बाजार में आएंगे जूट पल्प से बने सैनेटरी नैपकिन, किसानों को होगा फायदा, महिलाओं को मिलेगा रोजगार: कपड़ा मंत्रालय

  • इन सैनेटरी नैपकिन्स को कोलकाता के National Test House द्वारा सर्टिफाई किया गया है। 

Moneybhaskar.com

Jun 17,2019 01:39:00 PM IST

नई दिल्ली.
जल्द ही बाजार में जूट पल्प से बने सैनेटरी नैपिकन्स मिल सकते हैं। फिलहाल देश में आयात किए हुए वुड पल्प को नैपकिन बनाने के लिए कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। टेक्सटाइल मंत्रालय को उम्मीद है कि घरेलू स्तर पर उत्पादित होने वाले जूट के पल्प से नैपकिन बनाने से किसानों को अच्छा मुनाफा कमाने में मदद मिलेगी और महिलाओं के लिए रोजगार का सृजन होगा।


रोजाना बन सकेंगे एक लाख नैपकिन
मंत्रालय ने National Jute Board के जरिए Indian Jute Industries’ Research Association (IJIRA) को जूट आधारित कम कीमत वाले सैनेटरी नैपकिन बनाने का प्रोजेक्ट स्पॉन्सर किया था। अब सरकार इस प्रोजेक्ट में किसानों को भी शामिल करना चाहती है। मंत्रालय के मुताबिक, फिलहाल इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत रोजाना एक लाख जूट सैनेटरी नैपकिन बनाए जाने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट जूट किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर रकम दिलाने में मदद करेगा और महिलाओं के लिए रोजगार के मौके पैदा होंगे।


चीन और अमेरिका के कच्चे माल से बनते हैं नैपकिन
सरकार के मुताबिक बाजार में मिलने वाले अधिकतर सैनेटरी नैपकिन अमेरिका और चीन से आयात किए जाने वाले वुड पल्प से बनाए जाते हैं। मंत्रालय के मुताबिक IJIRA ने जूट पल्प से जो नैपकिन तैयार किए हैं, उसमें जूट के रेशे और जूट की लकड़ी का सही अनुपात में इस्तेमाल किया गया है। इन सैनेटरी नैपकिन्स को कोलकाता के National Test House द्वारा सर्टिफाई किया गया है।

40 फीसदी तक सस्ता है जूट पल्प
जूट की पैदावार रिन्युएबल रिसोर्स से होती है। पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल होने वाले वुड पल्प से जूट पल्प की लागत 30 से 40 फीसदी कम होती है। सालाना उत्पादित होने वाले जूट फाइबर में से 12-13 फीसदी और जूट की लकड़ी में से सिर्फ 6-7 फीसदी उत्पादन देश की कुल सैनेटरी नैपकिन की जरूरत को पूरा करने के लिए काफी होगा। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2015-16 के मुताबिक देश में 15 से 24 वर्ष की उम्र वाली 57.6 फीसदी महिलाएं माहवारी के दौरान नैपकिन या टैम्पॉन जैसे हाईजीनिक उत्पाद इस्तेमाल करती हैं। देश में सात राज्यों के तकरीबन 83 जिलों में जूट की पैदावार होती है। यह राज्य हैं- पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा और मेघालय। अकेले पश्चिम बंगाल में ही कुल जूट उत्पादन का 59 फीसदी उत्पादित होता है।

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