कमी /दशहरी आम की तोड़ाई शुरू, जून मध्य से कीमतें गिरेंगी

money bhaskar

Jun 02,2019 04:54:00 PM IST

नई दिल्ली. फलों का राजा आम इस बार खास हो गया है। लगभग पूरे देश में आम की पैदावार कम हुई है। इसलिए दाम भी चढ़े हुए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि अपने लजीज स्वाद के लिए पहचाने जाने वाले दशहरी आम की बाजार में आवक शुरू हो गई है। कीड़ों के प्रकोप की वजह से इसमें देरी हुई थी। अब बाजार में इसकी आवक बढ़ने से दाम कम होने के आसार हैं। कारोबारियों की मानें तो अभी 50 से 60 रुपए किलो तक दशहरी मिल सकेगा। जून के मध्य से कीमतें गिरनी शुरू हो सकती हैं।


विदेशी बाजारों में भी दाम ज्यादा

उत्तर प्रदेश के फल पट्टी क्षेत्र काकोरी-मलिहाबाद के बागवानों और कारोबारियों का कहना है कि बीते सालों से करीब एक सप्ताह की देरी से दशहरी देशी-विदेशी बाजारों में 1 जून से दस्तक दी है। हालांकि मई के आखिरी हफ्ते से कच्ची दशहरी की तोड़ाई शुरू हो गई है लेकिन पक कर बिकने में इसे अभी छह-सात दिन का समय लगेगा। इस बार खराब मौसम और कीड़ों के प्रकोप से दशहरी की फसल पकने में भी देरी हुई है। जिसके कारण न केवल उत्पादन में गिरावट आएगी बल्कि दाम भी ज्यादा रहेंगे। घरेलू ही नहीं बल्कि विदेशी बाजारों में भी दशहरी के ऑर्डर बीते साल के मुकाबले ऊंचे रेट पर मिल रहे हैं।

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अब पर्याप्त मात्रा में दशहरी बाजार में आने लगा

बागवान शबीहुल हसन का कहना है कि आमतौर पर दशहरी की तोड़ाई 18-20 मई के आसपास शुरू हो जाती है जब आम में जाली पड़ जाती है। डाल की पकी दशहरी तो जून में ही उपलब्ध हो पाती है। इस बार मौसम की बेरुखी के कारण दशहरी में जाली पडऩे में देर हुई, लिहाजा कच्ची तोड़ाई भी देरी से हो रही है। बहरहाल उनका कहना है कि अब पर्याप्त मात्रा में दशहरी उतारा जा रहा है और इन्हें दिल्ली तथा मुंबई के बाजारों में भेजे जाने का काम शुरू हो गया है। आम के कारोबारी संजीव सिंह का कहना है कि स्थानीय बाजारों में भी दशहरी की आमद 1 जून से शुरू हो गई है। इस बार कमजोर फसल के चलते स्थानीय बाजारों में दाम 40-50 रुपये पर ही खुलेंगे जो जून के मध्य तक कुछ नीचे आ सकते हैं।

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27 हजार हेक्टेयर में होता है दशहरी

आम के आढ़ती फैजान अहमद का कहना है कि बीते दो सालों से आम का कारोबार सालाना 2,400-2,500 करोड़ रुपये तक हो रहा था जो इस बार घटकर 600 से 800 करोड़ रुपये के बीच ही रह सकता है। पिछले दो सालों से फल पट्टी क्षेत्र काकोरी, मलिहाबाद में 35 से 40 लाख टन टन दशहरी का उत्पादन हो रहा है। इस बार इसके और भी कम होने की संभावना है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में मलिहाबाद क्षेत्र के 27,000 हेक्टेयर में दशहरी की उपज होती है। बीते करीब 10 सालों से मंडी परिषद से सहयोग से यहां का दशहरी आम नवाब के ब्रांड नाम से अमेरिकी व यूरोपीय देशों में भेजा जा रहा है। खाड़ी देशों और दक्षिण एशियाई देशों में भी मलिहाबाद के दशहरी की खासी मांग है।

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पूरे देश में ही आम की आवक कम

देश के सबसे बड़े आम उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में आम की फसल पिछले साल से 45 से 50% तक कम आ रही है। साथ ही आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में भी फसल उम्मीद के मुताबिक नहीं है। इसलिए आम की कीमतें भी पिछले साल से 25-30% ज्यादा हैं। देश में आम उत्पादकों और व्यापारियों की सबसे बड़ी संस्था भारतीय मैंगो ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष इंशाराम अली बताते हैं कि देश में पिछले साल करीब 2 करोड़ टन तक आम आया था। इस साल उत्पादन 1.31 करोड़ टन पर अटक सकता है। वे बताते हैं कि इस बार देशभर में उपज आधी रह सकती है। इसकी वजह यह है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में रेतीले तूफान ने फसल बर्बाद कर दी है। पहले अनुमान था कि इस बार उत्तर प्रदेश में आम का उत्पादन पिछले साल के 40 से 45 लाख टन से घटकर 30 लाख टन तक सिमट जाएगा। क्योंकि एक साल आम अच्छा आता है, तो दूसरे साल इसमें कमी आती है। लेकिन रेतीले तूफान के कारण अब उत्पादन सिमटकर 20 से 22 लाख टन ही रह जाने की आशंका है। लखनऊ में आम ट्रेडर और इम्पोर्टर कौशिक मलिक बताते हैं कि इसका असर आम की कीमतों पर भी दिखाई देगा।

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