बजट 2017 एग्रीकल्‍चर : सपने अच्‍छे हैं मगर साकार करना चुनौती

विजय सरदाना

Feb 02,2017 01:58:00 PM IST
नई दिल्‍ली. फूड सि‍क्‍योरि‍टी के सामने गंभीर चुनौति‍यों और चुनावी राज्‍यों में राजनीति‍क नफे नुकसान को देखते हुए बजट 2017-18 में खेतीबाड़ी से जुड़ी परि‍योजनाओं में आवंटन बढ़ाया गया है। बजट दस्‍तावेज में इस बात पर गौर कि‍या गया है कि‍ कृषि‍ उपज स्‍थि‍र बनी हुई है। अनाज का उत्‍पादन भी तकरीबन 25.2 करोड़ टन के आसपास ही ठहरा हुआ है वहीं फूड इंपोर्ट बढ़ रहा है। मांग का बढ़ना और प्रोडक्‍शन का स्‍थि‍र रहना अच्‍छा नहीं है।
सरकार ने लघु सिंचाई, कॉन्‍ट्रैक्‍ट फार्मिं‍ग, डेयरी प्रोसेसिं‍ग, फसल बीमा और फार्म क्रडि‍ट के मामलों में घोषणाएं की हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि‍ ये घोषणाएं महत्‍वपूर्ण हैं मगर अभी तक इन्‍हें लेकर को जो प्‍लानिंग हुई है और जि‍स तरह से इन्‍हें लागू कि‍या जा रहा है यह देश के लि‍ए एक चुनौती है।
सरकार माइक्रो इरिगेशन में ज्‍यादा निवेश करने की योजना बना रही है मगर पहले जो बजट आवंटन किया गया था उसे सही ढंग से इस्‍तेमाल नहीं किया गया, यही वजह है कि उत्‍पादन क्षमता ठहरी हुई है। सिर्फ खेती की बदौलत फार्म आउटपुट नहीं बढ़ेगा। किसानों को अच्‍छे बीज और सही सलाह की जरूरत भी है, जिसके बारे में बजट में कुछ नहीं कहा गया। केवीके में सॉइल टेस्‍टिंग के लिए मिनी लैब बनाने की घोषणा है मगर सक्षम लोगों की कमी के चलते केवीके अब अपना प्रभाव खो रही हैं। इसकी वजह से आउटपुट अपनी जगह ठहरा हुआ है।
सरकार डेयरी की मशीनरी को बदलने के लिए फंड दे रही है, इसका मतलब ये हुआ कि यह फंड एनडीडीबी के पास जाएगा और केवल कोऑपरेटिव सेक्‍टर को इससे फायदा होगा। प्राइवेट सेक्‍टर के लिए कोई सपोर्ट नहीं है। इसके अलावा जानवरों के लिए चारे की 60 फीसदी तक कमी है। बजट में इस बात कोई जिक्र नहीं है कि सरकार चारे की कमी को पूरा करने के लिए क्‍या कर रही है। इसके अलावा ऐसे जानवरों को लेकर सरकार की क्‍या योजना है जिन्‍होंने अब दूध देना बंद कर दिया है।
सरकार ने फसल के लिए बीमा योजना का दायरा बढ़ाया है मगर जानवरों और पोल्‍ट्री सेक्‍टर के बीमा पर कोई बात नहीं हुई। किसानों की इनकम बढ़ाने में इनका बड़ा रोल है। मछली और मधुमक्‍खी पालन भी दो ऐसे क्षेत्र हैं, जिनसे किसानों की आय बढ़ती है मगर इनके बारे में कोई घोषणा नहीं हुई।
सरकार ने किसानों को कर्ज देने के लिए 10 लाख का रिकॉर्ड टारगेट तय कर लिया मगर वाजिब इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर न होने के चलते किसानों को अपनी फसल का एमएसपी भी नहीं मिलता। वो अपने फंड का सही ढंग से उपयोग नहीं करते, जिसके चलते वह कर्ज के चंगुल में फंसते चले जाते हैं। जब तक इस कर्ज को कमाई वाली फसलों में नहीं लगाया जाएगा तब तक फार्म इनकम को लेकर आप आश्‍वस्‍त नहीं हो सकते।
मेरा मानना है कि‍ बजट आवंटन ठीक है मगर योजनाओं को सही ढंग से लागू करने की चुनौती बजट में देखे गए सपनों के सामने खड़ी है। केंद्र को राज्‍य सरकारों से पूछना चाहिए कि बजट आवंटन के बावजूद जमीन स्‍तर पर चीजें क्‍यों नहीं सुधर रहीं। इस तरह की समीक्षा हमें आगे का रास्‍ता दिखाएगी।
(विजय सरदाना एग्री बिजनेस एक्‍सपर्ट हैं)
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